महाराष्ट्र के स्कूल में बांग्लादेश का झंडा: महाराष्ट्र के पालघर जिले के नालासोपारा स्थित रयान इंटरनेशनल स्कूल में अन्य झंडों के साथ बांग्लादेश का झंडा लगा हुआ नजर आया।
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस पर हिंदू संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताते हुए विरोध दर्ज कराया।
बताया जा रहा है कि बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्याओं को लेकर पहले से ही आक्रोश का माहौल है। इसी दौरान बजरंग दल के सदस्य पुलिस के साथ स्कूल पहुंचे और झंडा हटवाया, साथ ही चेतावनी भी दी।
इस घटना के बाद भारत और बांग्लादेश के संबंधों में चल रहे तनाव के बीच स्थानीय स्तर पर गुस्से का माहौल पैदा हो गया है।
बजरंग दल ने रयान इंटरनेशनल स्कूल में लगे बांग्लादेशी झंडे के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है। यह घटना महाराष्ट्र के पालघर जिले में हुई, जिसने क्षेत्र में जोरदार विरोध प्रदर्शन को जन्म दिया।
महाराष्ट्र के स्कूल में बांग्लादेश का झंडा: बजरंग दल की चेतावनी
बजरंग दल ने कहा, हिंदू समुदाय की ओर से बजरंग दल की स्पष्ट चेतावनी है कि भारतीय धरती पर केवल भारत का तिरंगा झंडा ही फहराएगा।
देश के विरुद्ध कार्य करने वाले किसी भी व्यक्ति को बजरंग दल करारा जवाब देगा। यह भूमि भारत माता की है और यहां केवल भारत का ही सम्मान होगा।
दूसरी ओर, रयान इंटरनेशनल स्कूल के रवैये से बजरंग दल नाराज है। बजरंग दल ने अपने सोशल मीडिया इंस्टाग्राम हैंडल पर लिखा, भारत के नालासोपारा स्थित रयान इंटरनेशनल स्कूल में बांग्लादेश का झंडा फहराया गया।
यह भारत की नैतिक भावना के विरुद्ध है। जब हिंदुओं पर अत्याचार हो रहा है, जब बांग्लादेश में हमारी बहनों और बेटियों की सुरक्षा खतरे में है, ऐसे प्रदर्शन भारत के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाते हैं।
डर के साये में बांग्लादेश के हिंदू
इस बीच बांग्लादेश में हिंदू समुदाय जिस तरह लगातार डर और असुरक्षा के साये में जी रहा है, वह बेहद चिंताजनक और दुखद है।
वहां आए दिन हत्या, हिंसा और अत्याचार की खबरें सामने आ रही हैं। चाहे 1 जनवरी को खोकन चंद्र दास पर जानलेवा हमला हो, 8 जनवरी को सुनामगंज में जॉय महापात्रो की निर्मम हत्या,
जशोर में एक युवा फैक्ट्री मालिक की गोली मारकर हत्या या फिर झेनाइदाह में एक हिंदू महिला के साथ की गई अमानवीय बर्बरता इन सभी घटनाओं ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है।
इन घटनाओं ने साफ कर दिया है कि यह सिर्फ किसी एक धर्म का मुद्दा नहीं, बल्कि इंसानियत पर हमला है। इतनी क्रूरता के साथ किसी भी इंसान की हत्या या प्रताड़ना किसी भी हाल में जायज नहीं ठहराई जा सकती।
समाज में रहने वाले किसी भी व्यक्ति को कानून अपने हाथ में लेने का कोई अधिकार नहीं है। न्याय और सजा का काम केवल कानून और व्यवस्था का है, और अगर उसे अपना काम करने दिया जाए तो वही समाज और देश दोनों के लिए सबसे बेहतर और सुरक्षित रास्ता है।

