Friday, February 13, 2026

बांग्लादेश चुनाव 2026: पीएम मोदी ने बीएनपी नेता तारिक रहमान को दी जीत की बधाई

बांग्लादेश चुनाव 2026: बांग्लादेश में हुए 13वें संसदीय चुनाव के नतीजों ने दक्षिण एशियाई राजनीति का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

इस चुनाव में मिली बड़ी सफलता पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के नेता तारिक रहमान को बधाई संदेश भेजा।

अपने संदेश में उन्होंने कहा कि यह जीत रहमान के नेतृत्व पर जनता के भरोसे को दर्शाती है और भारत हमेशा एक लोकतांत्रिक, प्रगतिशील तथा समावेशी बांग्लादेश के साथ खड़ा रहेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि वह भविष्य में मिलकर दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत करने तथा साझा विकास के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक हैं।

खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान

बांग्लादेश चुनाव 2026: चुनाव परिणामों के बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने स्पष्ट बहुमत मिलने का दावा किया है।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह परिणाम देश की सत्ता संतुलन को बदल सकता है और लंबे समय से जारी राजनीतिक गतिरोध को नई दिशा दे सकता है।

तारिक रहमान, जो पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे हैं, हाल ही में अपनी मां के निधन के बाद पार्टी की कमान औपचारिक रूप से संभाल चुके हैं।

ऐसे में चुनावी जीत को उनकी नेतृत्व क्षमता की पहली बड़ी परीक्षा और सफलता के रूप में देखा जा रहा है।

यूनुस को मिली हार

यह चुनाव इसलिए भी ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि 2024 में हुए व्यापक राजनीतिक आंदोलनों के बाद पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर मतदान कराया गया।

चुनाव प्रक्रिया अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस की निगरानी में संपन्न हुई, जिससे पारदर्शिता बनाए रखने की कोशिश की गई।

इस बार मतदाताओं को दो अलग-अलग मुद्दों पर वोट देने का मौका मिला—पहला नई संसद के गठन के लिए और दूसरा संविधान संशोधन प्रस्ताव, जिसे “जुलाई चार्टर” कहा गया, पर अपनी राय दर्ज करने के लिए।

इस दोहरे मतदान प्रणाली को लोकतांत्रिक भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक प्रयोग माना जा रहा है।

देश से बाहर रह ही शेख हसीना

तारिक रहमान ने चुनाव में दो सीटों ढाका-17 और बोगुरा-6 से उम्मीदवार के तौर पर हिस्सा लिया और दोनों सीटों पर जीत दर्ज करने का दावा किया।

उनकी इस दोहरी सफलता ने पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह भर दिया है और समर्थक इसे राजनीतिक वापसी का संकेत मान रहे हैं।

हालांकि चुनावी प्रक्रिया को लेकर विवाद भी सामने आए हैं। प्रमुख विपक्षी दल अवामी लीग को चुनाव में भाग लेने की अनुमति नहीं मिली,

जिससे चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठे हैं। देश से बाहर रह रहीं पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने भी चुनाव को “दिखावा” बताते हुए इसकी वैधता पर गंभीर आपत्ति जताई है।

भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार के नए रास्ते

यह चुनाव न केवल बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति बल्कि क्षेत्रीय कूटनीति के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार, सुरक्षा और सीमा सहयोग जैसे कई रणनीतिक मुद्दे जुड़े हुए हैं, इसलिए नई राजनीतिक व्यवस्था का असर द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ना तय है।

यदि नई सरकार स्थिर रहती है और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को प्राथमिकता देती है तो क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक साझेदारी को नया बल मिल सकता है।

कुल मिलाकर, यह चुनाव बांग्लादेश के राजनीतिक इतिहास में एक निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।

एक ओर जहां सत्तारूढ़ पक्ष इसे जनादेश बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाला कदम मान रहा है।

आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि यह परिणाम देश की राजनीति, शासन व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को किस दिशा में ले जाता है।

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Madhuri
Madhurihttps://reportbharathindi.com/
पत्रकारिता में 6 वर्षों का अनुभव है। पिछले 3 वर्षों से Report Bharat से जुड़ी हुई हैं। इससे पहले Raftaar Media में कंटेंट राइटर और वॉइस ओवर आर्टिस्ट के रूप में कार्य किया। Daily Hunt के साथ रिपोर्टर रहीं और ETV Bharat में एक वर्ष तक कंटेंट एडिटर के तौर पर काम किया। लाइफस्टाइल, इंटरनेशनल और एंटरटेनमेंट न्यूज पर मजबूत पकड़ है।
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