अयोध्या में फिर लौटा त्रेतायुग: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्थित राम जन्मभूमि परिसर अब केवल भगवान श्रीराम के मुख्य मंदिर तक सीमित नहीं रहने वाला है।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट इसे एक व्यापक, सुव्यवस्थित और समग्र धार्मिक-सांस्कृतिक परिसर के रूप में विकसित कर रहा है, जहाँ श्रद्धालुओं को रामायण से जुड़े प्रत्येक प्रमुख पात्र और प्रसंग का सजीव अनुभव मिल सकेगा।
रामायण के महान पात्रों को समर्पित 7 नए मंदिर
अयोध्या में फिर लौटा त्रेतायुग: ट्रस्ट ने परिसर के भीतर 7 नए मंदिरों के निर्माण और उन्हें श्रद्धालुओं के लिए खोलने की योजना को अंतिम रूप दे दिया है।
इन मंदिरों का निर्माण कार्य तेज़ी से प्रगति पर है। ये मंदिर रामायण काल के उन पात्रों और ऋषियों को समर्पित होंगे, जिन्होंने श्रीराम के जीवन और मर्यादा पुरुषोत्तम की यात्रा को दिशा दी।
इनमें महर्षि वाल्मीकि, महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य, निषाद राज, माता शबरी और देवी अहिल्या शामिल हैं।
ट्रस्ट का उद्देश्य इन मंदिरों के माध्यम से रामायण के सामाजिक, आध्यात्मिक और मानवीय मूल्यों को सामने लाना है, ताकि हर वर्ग और समुदाय को यह संदेश मिले कि रामकथा सभी के सम्मान और समावेश की कहानी है।
श्रद्धालुओं को मिलेगा रामायण दर्शन का अनुभव
अयोध्या में फिर लौटा त्रेतायुग: इन उप-मंदिरों के खुलने के बाद राम जन्मभूमि परिसर केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि रामायण दर्शन का केंद्र बन जाएगा।
श्रद्धालु यहाँ भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े हर चरण, हर संबंध और हर आदर्श को महसूस कर सकेंगे। यह परिसर आध्यात्मिकता के साथ-साथ सांस्कृतिक चेतना को भी मजबूत करेगा।
पूजा व्यवस्था के लिए बढ़ेगी पुजारियों की संख्या
नए मंदिरों में नियमित पूजा-पाठ और दर्शन व्यवस्था को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए ट्रस्ट ने करीब 50 नए पुजारियों की भर्ती का निर्णय लिया है। यह प्रक्रिया उप-मंदिरों के उद्घाटन से पहले पूरी की जाएगी।
फिलहाल राम मंदिर परिसर में 20 पुजारी कार्यरत हैं, जो रामलला, राम दरबार, परकोटे के मंदिरों, यज्ञमंडप, सप्त मंडपम और कुबेर टीला स्थित कुबेरेश्वर महादेव मंदिर की पूजा व्यवस्था संभाल रहे हैं।
तीन शिफ्टों में होगी पूजा
अयोध्या में फिर लौटा त्रेतायुग: जब सभी उप-मंदिरों में दर्शन शुरू होंगे, तब सुबह और शाम की पूजा के लिए तीन शिफ्टों में 42 पुजारियों की आवश्यकता होगी।
इसके अलावा सप्त मंडपम और कुबेर टीला के लिए 8 अतिरिक्त पुजारी भी तैनात किए जाएँगे, ताकि हर धार्मिक अनुष्ठान विधिवत और समय पर संपन्न हो सके।
अयोध्या बन रही आस्था का केंद्र
अयोध्या में फिर लौटा त्रेतायुग: राम जन्मभूमि परिसर का यह विस्तार अयोध्या को केवल धार्मिक नगरी ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और रामायण दर्शन का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
आने वाले समय में यह परिसर करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए आस्था, इतिहास और आध्यात्मिक चेतना का संगम बनेगा।

