Friday, February 27, 2026

अविमुक्तेश्वरानंद के घर से उठी बगावत और आश्रम पर एक महिला का कथित एकाधिकार

अविमुक्तेश्वरानंद

अविमुक्तेश्वरानंद के परिवार के लोग ही अब उनके विरोध में खड़े नजर आ रहे हैं। परिवार का आरोप है कि आश्रम में एक महिला रहती हैं जिनका आश्रम पर एकाधिकार है। जब उनसे अधिकार का आधार पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह अविमुक्तेश्वरानंद की सखी हैं।

परिवार के इन आरोपों पर अविमुक्तेश्वरानंद ने पलटवार किया है। उनका कहना है कि संन्यास लेने के बाद उन्होंने परिवार को मठों और आश्रमों में वैसा प्रेफरेंस नहीं दिया जैसा वे चाहते थे, इसलिए वे उनके खिलाफ हो गए हैं। उधर कथित सखी ने आरोपों को अनर्गल बताया।

कथित सखी ने यह भी कहा कि इस तरह के आरोपों से सम्पूर्ण सनातनी खून के आँसू रो रहे हैं। परिवार का तर्क है कि आश्रम में महिला के प्रभाव के कारण बाकी लोगों की भूमिका सीमित हो गई है। वहीं अविमुक्तेश्वरानंद इसे परिवार की नाराजगी और अपेक्षाओं से जोड़कर देख रहे हैं।

सखी का खुला दावा और आश्रम पर नियंत्रण का सवाल

आश्रम में रहने वाली महिला द्वारा स्वयं को अविमुक्तेश्वरानंद की सखी बताने के बाद विवाद और तीखा हो गया। आरोप लगाने वालों का कहना है कि इसी संबंध के कारण आश्रम पर उनका प्रभाव बढ़ा और नियंत्रण एकतरफा हो गया। सवाल यह भी उठ रहा है कि आश्रम संचालन में उनके निर्णय कितने निर्णायक हैं।

अविमुक्तेश्वरानंद के मुताबिक परिवार का विरोध किसी नैतिक चिंता से नहीं बल्कि सुविधाओं और प्रेफरेंस के टूटने से जुड़ा है। उनका कहना है कि संन्यास ग्रहण के बाद परिवार जिन लाभों की उम्मीद कर रहा था, वह नहीं मिले। इसलिए वे उनके विरुद्ध खड़े हो गए और सखी को निशाने पर लिया जा रहा है।

इस बीच कथित सखी लगातार यह कह रही हैं कि आरोप बेबुनियाद हैं और इससे धार्मिक समाज को पीड़ा पहुंच रही है। आरोप लगाने वाले पक्ष का जोर इस बात पर है कि आश्रम में महिला के रहने और कथित अधिकार के कारण आंतरिक व्यवस्था प्रभावित हुई। यही बिंदु विवाद का केंद्र बन गया।

लेखिका भावना द्विवेदी के आरोप और आश्रम की जीवनशैली पर सवाल

लेखिका भावना द्विवेदी ने दावा किया है कि अविमुक्तेश्वरानंद उस सखी के साथ सोते हैं। यह बयान सामने आते ही सखी वाले मुद्दे ने नया मोड़ ले लिया। हालांकि भावना ने यह भी कहा कि सखी की सगी बहन भी आश्रम में रहती हैं और उनकी दिनचर्या अलग है।

भावना के अनुसार सखी की बहन समय पर उठती हैं, गंगा स्नान करती हैं और ध्यान साधना में लीन रहती हैं। वहीं सखी और अन्य लोगों का इस जीवन शैली से कोई लेना देना नहीं है। उनका आरोप है कि ये लोग आराम से दस बजे तक उठते हैं और गंगा स्नान से बचने की व्यवस्था कर रखी है।

भावना ने कहा कि बाथरूम में मिस्टर गीजर एवं बाथ टब लगवाए गए हैं ताकि गंगा स्नान आदि से मुक्ति रहे। उनकी बातों से यह एंगल भी बन रहा है कि शायद सखी और उसकी बहन के बीच आश्रम पर कब्जे को लेकर भी लड़ाई चल रही हो।

मेडिकल रिपोर्ट, बदले तेवर और शिष्यों की गुमशुदगी

मेडिकल रिपोर्ट में यौन उत्पीड़न की पुष्टि के बाद अविमुक्तेश्वरानंद के तेवर ढीले पड़ने की बात कही जा रही है। इसी बीच लगातार मीडिया का सामना करने वाले उनके शिष्य भी सुबह से गायब बताए जा रहे हैं। आरोपों के दबाव के बीच आश्रम के भीतर की स्थिति भी सवालों में है।

अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने पक्ष में दो फोटो जारी किए हैं। उन्होंने दावा किया कि आशुतोष महाराज की दोस्ती प्रयागराज के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एवं IPS अजयपाल शर्मा से है। अविमुक्तेश्वरानंद का आरोप है कि अजय पाल शर्मा और आशुतोष महाराज उनके खिलाफ साजिश रच रहे हैं।

अविमुक्तेश्वरानंद ने यह भी कहा कि उनका आशुतोष महाराज से कोई जान पहचान नहीं है, न दोस्ती, न ही दुश्मनी। उनके मुताबिक यह पूरा घटनाक्रम उन्हें फंसाने की कोशिश है। वहीं दूसरी तरफ उनके शिष्यों के अचानक गायब होने को भी घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है।

आशुतोष महाराज का पलटवार और AI फोटो का दावा

आशुतोष महाराज की अविमुक्तेश्वरानंद पर चढ़ाई जारी बताई जा रही है। उन्होंने कहा कि अजय पाल शर्मा से उनकी कोई दोस्ती नहीं है। उनका दावा है कि अजय पाल शर्मा ने ही उन्हें झूठे मामले में जेल भेजा था, इसलिए दोस्ती का आरोप गलत है।

आशुतोष महाराज ने यह भी कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा जारी दोनों फोटो AI से बनाइ गई हैं। इसके साथ उन्होंने भी दो फोटो जारी किए हैं और दावा किया है कि उनकी दोस्ती अजय पाल से नहीं बल्कि उल्टा अविमुक्तेश्वरानंद से ही रही है। उन्होंने फोटो दिखाकर जन्मदिन का उल्लेख भी किया।

आशुतोष महाराज ने कहा कि उनके जन्मदिन पर उन्हें अविमुक्तेश्वरानंद अपने आश्रम बुलाकर सम्मानित करता रहा है। इसी आधार पर उन्होंने कहा कि इस प्रकरण में उनकी एंट्री अचानक नहीं है। उनका दावा है कि वहां के बटुक उन्हें पहले से जानते थे और उनका परिचय पुराना है।

बटुकों के बयान और प्रयागराज माघ मेले का आरोप

दो बटुकों ने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के सामने बयान दिया है। उन्होंने कहा कि माघ मेला के दौरान प्रयागराज में भी उनके साथ यौनशोषण किया गया। उनका दावा है कि जब धरना प्रदर्शन में अविमुक्तेश्वरानंद व्यस्त हुए तो मौका पाकर वे भाग निकले और बाहर आ सके।

बटुकों ने आगे आरोप लगाया कि राजस्थान और बिहार से गरीब ब्राह्मण परिवार के बच्चों को आश्रमों में लाया जाता है। उनका कहना है कि वहां पर जो तमाम सफेदपोश नेता आते हैं, उनके सामने भी बच्चों को परोसा जाता है। इस दावे ने पूरे मामले को राजनीतिक एंगल से जोड़ दिया है।

जब परोसने के तरीके पर उनसे पूछा गया तो उन्होंने कहा कि बच्चों को नेताओं की सेवा के नाम पर उनके कक्ष में भेज दिया जाता है। बटुकों का दावा है कि लगभग 20 बटुक ऐसे कार्यों के कारण बंधक जैसा जीवन जी रहे हैं। उन्होंने मांग की कि उन्हें मुक्त कराया जाना चाहिए।

बढ़ता विवाद, राजनीति की एंट्री और पहचान का दावा

जैसे जैसे मामला बढ़ रहा है वैसे वैसे अविमुक्तेश्वरानंद की मुश्किल बढ़ती जा रही है। समाजवादी पार्टी के साथ खड़े होने की बात भी सामने आ रही है। इसी बीच आशुतोष महाराज का दावा है कि बटुक सपा कांग्रेस नेताओं के सामने परोसे गए हैं, इसलिए वे साथ खड़े हैं।

आशुतोष महाराज के इस दावे से विवाद और तेज हो गया है। वहीं दो बटुकों ने आज तक को बताया है कि सामना कराए जाने पर वे उन सफेदपोश नेताओं को पहचान लेंगे। यह बयान आने के बाद राजनीतिक हस्तियों की भूमिका और जांच की दिशा को लेकर भी चर्चा बढ़ गई है।

मामले में सखी वाले एंगल को लेकर भी सवाल लगातार उठ रहे हैं। एक तरफ आश्रम पर कथित एकाधिकार और सखी होने का दावा चर्चा में है, दूसरी तरफ यौनशोषण और बटुकों के आरोपों ने गंभीरता बढ़ाई है। दोनों ही पहलू अब एक साथ पूरे प्रकरण का केंद्र बन गए हैं।

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now
Samudra
Samudra
लेखक 'भारतीय ज्ञान परंपरा' के अध्येता हैं। वे पिछले एक दशक से सार्वजनिक विमर्श पर विश्लेषणात्मक लेखन कर रहे हैं। सांस्कृतिक सन्दर्भ में समाज, राजनीति, विचारधारा, शिक्षा, धर्म और इतिहास के प्रमुख प्रश्नों के रिसर्च बेस्ड प्रस्तुतिकरण और समाधान में वे पारंगत हैं। वे 'द पैम्फलेट' में दो वर्ष कार्य कर चुके हैं। वे विषयों को उनके ऐतिहासिक आधार, वैचारिक पृष्ठभूमि और दीर्घकालीन प्रभाव के स्तर पर परखते हैं। इसी कारण उनके राष्ट्रवादी लेख पाठक को नई दृष्टि और वैचारिक स्पष्टता भी देते हैं। उनके शोधपरक लेख अनेक मौकों पर राष्ट्रीय विमर्श की दिशा में परिवर्तनकारी सिद्ध हुए हैं।
- Advertisement -
- Advertisement -

Latest article