Thursday, April 3, 2025

Atiq Ahmed: अतीक की हत्या में बिश्नोई कनेक्शन, पंजाब के रास्ते आए हथियार, कई बार उड़ाने की हुई साजिश

Atiq Ahmed: यूपी का कुख्यात माफिया और पूर्व सांसद अतीक अहमद की हत्या के तार गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई से जुड़े हुए बताये जा रहे है। वरिष्ठ पत्रकार और लेखक मनोज रंजन त्रिपाठी ने अतीक के साबरमती जेल से लेकर प्रयागराज तक के आखिरी 54 दिनों पर एक किताब लिखी है जिसका नाम है ‘कसारी मसारी’। इस किताब में कुख्यात अपराधी के मरने का जिक्र किया है।

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now

Atiq Ahmed: शूटर्स ने की दिनदहाड़े हत्या

मनोज रंजन का कहना है कि 2005 में राजू पाल हत्याकांड से इस सारे घटना क्रम की शुरूआत हुई, जिसमें राजू पाल की शूटर्स ने दिनदहाड़े हत्या कर दी थी। इस हत्याकांड में अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ का नाम भी शामिल था। जानकारी के लिए बता दें कि 2005 में हुई इस निर्मम हत्या के उमेश पाल एक मुख्य गवाह थे।

2023 में प्रयागराज की खुलेआम सड़कों पर गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई। यह हत्या किसी फिल्मी सीन से कम नहीं थी। मनोज रंजन लिखते है कि उमेश की हत्या के बाद ही यह तय हो गया था कि अतीक का अंजाम भी ऐसा ही होगा।

अतीक का कई दिन से शूटर कर रहे थे पीछा

रंजन ने लिखा है कि अतीक अहमद को जब साबरमती जेल से उत्तर प्रदेश लाया जा रहा था। इस दौरान मीडिया की गाड़ी भी साथ-साथ चल रही थी और सबको ऐसा लग रहा था कि कुछ बड़ा होने वाला है, हो सकता है गाड़ी पलट जाए और उस पल को कैमरे में कैद करना चाहता था और उस पल को कैमरे में कैद करना चाहता था। शूटर उसके साथ थे। ये शूटर अतीक का कई दिनों से पीछा कर रहे थे।

मीडियाकर्मी बनकर आए अपराधी

15 अप्रैल, 2023 को पुलिस हिरासत में तीन युवकों ने अतीक और अशरफ की हत्या कर दी गई। हत्या करने वाले मीडियाकर्मी बनकर आए थे। अतीक को मौत की नींद सुलाने के बाद तीनों ने सरेंडर कर दिया। मनोज रंजन त्रिपाठी बताते हैं कि इस हत्या के पीछे गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का हाथ था। लॉरेंस के करीबी जितेंद्र गोगी ने इन तीनों लड़कों को सुपारी दी थी। जितेंद्र ने उन्हें तुर्किए में बनी जिगाना पिस्टल दी, जिसकी कीमत साढ़े नौ लाख रुपये थी।

इस हथियार को तुर्किए से मंगवाया गया था, जो वहां से होते हुए अजरबैजान, फिर ईरान और पाकिस्तान होते हुए ड्रोन के जरिए पंजाब पहुंची। वहां से लॉरेंस बिश्नोई गैंग के जरिए इरफान खुरजेवाला ने इन्हें सप्लाई किया। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह था कि जिन लड़कों की जेब में नौ रुपये नहीं थे, उनके हाथों में अब यह महंगा हथियार कहा से आया था।

बुंदेलखंड में ट्रेनिंग

रंजन के अनुसार इन तीनों लड़कों को बुंदेलखंड में ट्रेनिंग दी गई। मनोज रंजन त्रिपाठी ने बताया कि ट्रेनिंग के दौरान उन्हें अफगानिस्तान के अहमद शाह की हत्या का वीडियो भी दिखाया गया होगा। अहमद शाह जिन्हें ‘लाइन ऑफ पंजशीर’ कहा जाता था। उनकी हत्या तालिबान ने प्लान की थी।

एक इंग्लिश चैनल के इंटरव्यू के बहाने तीन सुसाइड बॉम्बर उनके पास पहुंचे और बम फोड़कर उन्हें मार डाला। अतीक की हत्या भी उसी तर्ज पर हुई। तीनों लड़कों को बैडमिंटन की तरह स्टेपिंग करना सिखाया गया। ताकि अतीक उन्हें पकड़ न सकें। अगर आप उनकी गोली चलाने की स्टाइल देखें, तो यह साफ दिखता है कि वे ट्रेंड थे।

अतीक और अहमद की एक तरह हुई हत्या

बता दें कि अतीक को मारने की कोशिश पहले भी हुई थी। कोर्ट में, फिर मेडिकल रूम में, लेकिन हर बार वह बच गया। 15 अप्रैल तीनों आरोपियों ने मौका देखकर अतीक और अशरफ की हत्या कर दी। पत्रकार त्रिपाठी जिन्होंने 30 साल पत्रकारिता में बिताए कहते हैं कि

उन्होंने कभी लाइव मर्डर नहीं देखा था, लेकिन अतीक की हत्या ने उन्हें अहमद शाह की घटना से जोड़ दिया। दोनों हत्याओं में एक ही पैटर्न था, मीडिया के बहाने कातिलों का करीब आना और फिर हमला करना।

राठी और भाटी गैंग का हाथ

जितेंद्र गोगी, जो तिहाड़ जेल में बंद था और इस साजिश का मास्टरमाइंड था। वह लॉरेंस बिश्नोई का खास आदमी था। जितेंद्र का एक करीबी प्रिंस तेवतिया था, जिसकी टिल्लू तेजपुरिया ने तिहाड़ में हत्या करवा दी थी। इसके बाद जितेंद्र ने टिल्लू को मारने के लिए कई शूटर्स तैयार किए, लेकिन इसी बीच अतीक की सुपारी का प्लान बन गया।

राठी और भाटी गैंग ने इन तीन लड़कों को जितेंद्र तक पहुंचाया। इनमें से एक लड़का पहले जेल में था और वहां राठी-भाटी के पैर दबाता था, जिसमे में क्रिमिनल बनने की चाह नजर आई। उसी ने अपने दो साथियों को जोड़ा और फिर यह तिकड़ी तैयार हुई। जितेंद्र ने उन्हें अतीक और अशरफ की तस्वीरें दीं और कहा, “इन दोनों को खत्म करना है।”

पंजाब से हुई हथियारों की सप्लाई

मनोज रंजन त्रिपाठी ने अपनी किताब के लिए गहरी रिसर्च की। वे पंजाब गए, जहां से हथियारों की सप्लाई हुई। उन्होंने बताया कि यह पूरी साजिश रोहिणी कोर्ट से शुरू होकर उत्तर प्रदेश तक पहुंची।

बुंदेलखंड में ट्रेनिंग हुई, और फिर हत्या को अंजाम दिया गया। उनकी किताब ‘कसारी मसारी’ उन 54 दिनों की कहानी है, जब अतीक साबरमती से प्रयागराज आया और उसकी जिंदगी का अंत हुआ।

यह भी पढ़ें: Bihar: पुल गिरने का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, CJI ने लगाई फटकार

Madhuri Sonkar
Madhuri Sonkarhttps://reportbharathindi.com/
ETV Bharat में एक साल ट्रेनिंग कंटेंट एडिटर के तौर पर काम कर चुकी हैं। डेली हंट और Raftaar News में रिपोर्टिंग, V/O का अनुभव। लाइफस्टाइल, इंटरनेशनल और बॉलीवुड न्यूज पर अच्छी पकड़।
- Advertisement -

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -

Latest article