Thursday, February 26, 2026

अंजना ओम कश्यप बायोग्राफी: डॉक्टर बनने के सपने से लेकर भारत की मशहूर जर्नलिस्ट बनने की कहानी

अंजना ओम कश्यप बायोग्राफी: “क्या आप जानते हैं उस पत्रकार को, जिसके तीखे सवालों के सामने बड़े-बड़े सूरमाओं के पसीने छूट जाते हैं? जो डिबेट की मेज पर बैठती हैं, तो चर्चा का रुख मोड़ देती हैं।

उनका सफर शुरू हुआ था साल 2000 के शुरुआती दौर में। न कोई बड़ा नाम, न कोई सिफारिश, बस कंधे पर मेहनत का झोला और आँखों में कुछ कर गुजरने की चमक

एक साधारण शुरुआत से लेकर मीडिया जगत के शिखर तक पहुँचने की उनकी कहानी, आज हर उभरते पत्रकार के लिए एक मिसाल है।

चाहे राजनीति के दांव-पेंच हों या समाज की गहरी समस्याएँ, उनकी समझ और पकड़ बेजोड़ है। उनके शो ‘हल्ला बोल’ और ‘स्पेशल रिपोर्ट’ आज करोड़ों घरों की पसंद बन चुके हैं।

उनकी खासियत? तथ्यों को आईने की तरह साफ रखना और बिना डरे सीधे मुद्दे पर बात करना।

चाहे न्यूज़ स्टूडियो की चकाचौंध हो या तपती धूप में किसी रैली से लाइव रिपोर्टिंग, उनकी दमदार मौजूदगी और एंकरिंग का लोहा पूरी दुनिया मानती है।

हिंदी न्यूज़ मीडिया का एक ऐसा भरोसेमंद चेहरा, जिसने अपनी पहचान खुद के दम पर लिखी है… हाँ, हम बात कर रहे हैं , अंजना ओम कश्यप की!

व्यक्तिगत जीवन

श्रेणीविवरण
पूरा नामअंजना ओम कश्यप
जन्म तिथि12 जून 1975
जन्म स्थानउत्तर प्रदेश, भारत
राष्ट्रीयताभारतीय
भाषाहिंदी, अंग्रेज़ी
शिक्षामास्टर ऑफ सोशल वर्क (दिल्ली स्कूल ऑफ सोशल वर्क) और पत्रकारिता में डिप्लोमा
पेशापत्रकार और न्यूज़ एंकर
करियर की शुरुआतसाल 2003 (दूरदर्शन से शुरुआत, फिर ज़ी न्यूज़ और न्यूज़ 24)
वर्तमान पदवरिष्ठ न्यूज़ एंकर और टीवी पत्रकार
विशेषज्ञताराजनीति, सामाजिक मुद्दे, राष्ट्रीय घटनाएँ
अद्वितीय शैलीनिष्पक्ष, तथ्यपरक, स्पष्ट और प्रभावशाली रिपोर्टिंग
लोकप्रिय शोहल्ला बोल, स्पेशल रिपोर्ट, राजतिलक
विशेषताआक्रामक एंकरिंग, निडर सवाल और राजनीतिक विश्लेषण
पहचानहिंदी न्यूज़ मीडिया का प्रभावशाली और भरोसेमंद चेहरा

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

अंजना ओम कश्यप बायोग्राफी: बिहार के एक मध्यमवर्गीय परिवार से भारतीय मीडिया के शिखर तक अंजना ओम कश्यप की यात्रा अकादमिक उत्कृष्टता और अपने सच्चे जूनून की देर से हुई खोज की कहानी है।

प्रारंभिक जीवन और पृष्ठभूमि : राँची की गलियों से न्यूज़ रूम के शिखर तक

  1. फौजी अनुशासन और बचपन

अंजना की कहानी शुरू होती है 12 जून 1975 को राँची (तब बिहार) में। एक आर्मी डॉक्टर, डॉ. ओम प्रकाश तिवारी की बेटी होने के नाते, अनुशासन उनके खून में था।

उनकी शुरुआती पढ़ाई राँची के मशहूर लोरेटो कॉन्वेंट और डीपीएस में हुई, जहाँ से उनके व्यक्तित्व की नींव पड़ी।

जब डॉक्टर बनने का सपना टूटा

दिलचस्प बात यह है कि अंजना कभी पत्रकार बनना ही नहीं चाहती थीं! एक मेधावी साइंस स्टूडेंट होने के नाते, वह अपने पिता की तरह सफेद कोट पहनकर डॉक्टर बनना चाहती थीं।

उन्होंने जी-जान से मेडिकल (PMT) की तैयारी की, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था , वह परीक्षा पास नहीं कर सकीं।

पढ़ाई का बदलता रुख

डॉक्टरी का सपना पीछे छूटा तो उन्होंने दिल्ली का रुख किया। दौलत राम कॉलेज (DU) से बॉटनी ऑनर्स करने के बाद, उन्होंने एक बड़ा बदलाव किया और दिल्ली स्कूल ऑफ सोशल वर्क से मास्टर डिग्री ली।

पत्रकारिता में आने से पहले, उन्होंने एक काउंसलर और NGO के साथ भी काम किया, जहाँ उन्होंने समाज को करीब से समझा।

जब ‘आवाज़’ को मिली पहचान

2000 के दशक की शुरुआत में अंजना को अहसास हुआ कि उनकी असली ताकत उनकी आवाज़ और बेबाकी है।

इसी जुनून ने उन्हें जामिया मिलिया इस्लामिया पहुँचाया, जहाँ से उन्होंने पत्रकारिता का डिप्लोमा किया।

बस यहीं से शुरू हुआ एक ऐसा सफर जिसने उन्हें न्यूज़ जगत की ‘सुपरस्टार’ बना दिया।

करियर की शुरुआत

सपनों की उड़ान: शुरुआती संघर्ष और पहली नौकरी

अंजना ने जब पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा, तो उनके पास कोई ‘गॉडफादर’ नहीं था। उन्होंने अपनी जगह खुद बनाई

दूरदर्शन से आगाज़ (2003): जामिया से पढ़ाई पूरी करने के बाद, अंजना को अपना पहला बड़ा मौका दूरदर्शन में मिला। यहाँ उन्होंने न्यूज़ एंकर के तौर पर काम शुरू किया और बारीकियों को सीखा।

ज़ी न्यूज़ का सफर: दूरदर्शन के बाद वह ज़ी न्यूज़ (Zee News) पहुँचीं। यहाँ उन्होंने अपनी रिपोर्टिंग और एंकरिंग की धार दिखाई। वे ज़ी न्यूज़ में लगभग पाँच साल रहीं और दर्शकों के बीच एक जाना-माना चेहरा बन गईं।

न्यूज़ 24 की पहचान: इसके बाद उन्होंने न्यूज़ 24 जॉइन किया। यहाँ उनके शो ‘आमने-सामने’ ने उन्हें एक निडर और कड़क एंकर के रूप में पहचान दिलाई।

स्टार न्यूज़ और आज तक: न्यूज़ 24 के बाद वे कुछ समय के लिए स्टार न्यूज़ (अब एबीपी न्यूज़) में रहीं, लेकिन उनकी असली और सबसे बड़ी पहचान बनी ‘आज तक’ (Aaj Tak) के साथ।

कैसे बनीं वो ‘नंबर 1’ एंकर?

कड़ी मेहनत: वे सिर्फ स्टूडियो में नहीं बैठती थीं, बल्कि चुनाव हो या कोई बड़ा मुद्दा, उन्होंने ज़मीन पर जाकर रिपोर्टिंग की।

सटीक सवाल: उन्होंने कभी भी बड़े नेताओं के सामने झुकने के बजाय उनसे सीधे और कड़े सवाल पूछे।

लगातार बदलाव: अंजना ने समय के साथ अपनी एंकरिंग के स्टाइल को बदला और खुद को ‘न्यूज़ रूम’ की सबसे शक्तिशाली आवाज़ बनाया।

बड़ी लीग में शामिल होना: स्टार न्यूज से आज तक :

स्टार न्यूज (अब एबीपी न्यूज) : उन्होंने यहां एक वरिष्ठ एंकर के रूप में संक्षिप्त लेकिन प्रभावशाली कार्यकाल बिताया।

आज तक (2012): अंततः उन्होंने इंडिया टुडे ग्रुप (आज तक) में एसोसिएट एडिटर के रूप में कार्यभार संभाला।

अपनी ऊर्जावान क्षमता और जीवंत बहसों को संभालने की काबिलियत के कारण, वे शीघ्र ही प्रबंध संपादक के पद तक पहुंच गईं।

कैसे बनीं अंजना न्यूज़ की दुनिया का ‘ब्रांड’?

जब अंजना ने ‘आज तक’ (Aaj Tak) जॉइन किया, तो उनके करियर में एक बड़ा मोड़ आया। यहाँ से उनकी प्रसिद्धि (Fame) आसमान छूने लगी:

‘हल्ला बोल’ का जादू: अंजना का सबसे मशहूर शो ‘हल्ला बोल’ बना। इस शो में उनके बात करने का अंदाज़ इतना कड़क और सीधा था कि लोग टीवी से चिपक जाते थे।

उन्होंने नेताओं से ऐसे सवाल पूछे जो आम जनता पूछना चाहती थी।

चुनावों की जान: चाहे लोकसभा चुनाव हो या राज्यों के चुनाव, अंजना ने स्टूडियो की चकाचौंध छोड़कर ज़मीन पर जाकर रिपोर्टिंग की।

उनका शो ‘राजतिलक’ और चुनावी रैलियों से उनकी लाइव एंकरिंग ने उन्हें लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय बना दिया।

सोशल मीडिया पर धाक: आज के दौर में वह सिर्फ टीवी पर ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर भी सबसे ज़्यादा फॉलो की जाने वाली एंकर्स में से एक हैं।

उनकी छोटी-छोटी क्लिप्स और तीखे जवाब अक्सर वायरल हो जाते हैं।

साहस और निडरता: निर्भया केस हो या सीमा पर तनाव, अंजना ने हर बड़े मुद्दे पर निडर होकर रिपोर्टिंग की। उनकी यही हिम्मत उन्हें दूसरे पत्रकारों से अलग खड़ा करती है।

स्टाइल और शख्सियत का बेजोड़ संगम

अगर न्यूज़ की दुनिया में ‘दबंगई’ और ‘सलीके’ का कोई कॉम्बिनेशन है, तो वो अंजना हैं।

आक्रामक और निडर अंदाज़ (Aggressive & Fearless): अंजना की सबसे बड़ी पहचान उनका ‘अटैकिंग मोड’ है।

जब वो डिबेट में सवाल पूछती हैं, तो वो गोल-मोल जवाब स्वीकार नहीं करतीं। उनकी आवाज़ की बुलंदी और आँखों का आत्मविश्वास सामने वाले को सच बोलने पर मजबूर कर देता है।

हाजिरजवाबी (Wit & Presence of Mind): लाइव शो के दौरान अगर कोई नेता उन्हें घेरने की कोशिश करता है, तो अंजना के पास उसका तुरंत और करारा जवाब तैयार रहता है।

उनकी इसी ‘हाजिरजवाबी’ के वीडियो अक्सर सोशल मीडिया पर वायरल होते हैं।

मैदान और स्टूडियो, दोनों की मास्टर: आम तौर पर बड़े एंकर सिर्फ स्टूडियो में बैठना पसंद करते हैं, लेकिन अंजना की शख्सियत ऐसी है कि वो धूल-मिट्टी और रैलियों के बीच भी उतनी ही सहज दिखती हैं जितनी कि एसी स्टूडियो में।

उनका ‘ग्राउंड रिपोर्टिंग’ का अंदाज़ बहुत ही देसी और सीधा होता है।

सादगी के साथ पावरफुल लुक: उनका पहनावा , साड़ी या फॉर्मल सूट , उनके व्यक्तित्व में एक गंभीरता और शक्ति (Authority) जोड़ता है।

वे दिखावे से ज़्यादा अपनी बात के ‘वज़न’ पर भरोसा करती हैं।

हल्ला बोल (आज तक) : यह उनका सबसे प्रसिद्ध बहस कार्यक्रम है, जिसमें वह दिन की सबसे बड़ी खबरों पर चर्चा करती हैं।

यह अपने तीखे माहौल के लिए जाना जाता है। अंजना अक्सर राजनेताओं और विशेषज्ञों से तीखे सवाल पूछती हैं, सीधे तौर पर उनसे कठिन प्रश्न लेती हैं।

यह भारत के सबसे अधिक रेटिंग वाले समाचार कार्यक्रमों में से एक है।

राजतिलक

यह एक विशेष कार्यक्रम है जो प्रमुख चुनावों के दौरान प्रसारित होता है।

स्टूडियो में रहने के बजाय, अंजना एक विशेष बस या स्टेज के माध्यम से भारत के विभिन्न शहरों की यात्रा करती हैं।

वह जनता (मतदाताओं) से सीधे बात करके यह समझने की कोशिश करती हैं कि वे अपनी सरकार से क्या चाहते हैं।

इससे आम लोगों से जुड़ने वाली एक ” ग्राउंड रिपोर्टर ” के रूप में उनकी छवि बनाने में मदद मिली।

ब्लैक एंड व्हाइट

वह एक नए प्रमुख कार्यक्रम की मेजबानी करती हैं (जिसमें कभी-कभी उनका ही एक एआई क्लोन भी शामिल होता है)।

यह एक प्राइम-टाइम शो है जो राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों के गहन विश्लेषण पर केंद्रित है।

यह आधुनिक तकनीक का उपयोग करके समाचारों को स्वच्छ, स्पष्ट और तथ्यात्मक तरीके से प्रस्तुत करता है।

डो टुक (न्यूज़ 24) :

यह उनका पहला बड़ा “सफलता दिलाने वाला” शो था।

आज तक में शामिल होने से पहले उन्होंने एक डिबेट शो की मेजबानी की थी।

यहीं से उन्हें अपने स्पष्टवादी और बेबाक मेजबानी के अंदाज के लिए पहली प्रसिद्धि मिली।

रिपोर्ट और कवरेज :

चुनाव के दौरान जमीनी रिपोर्टिंग: वह 2014, 2019 और 2024 के आम चुनावों की अपनी लंबी कवरेज के लिए जानी जाती हैं।

रिपोर्टिंग के लिए वह अक्सर हफ्तों तक ग्रामीण भारत की यात्रा करती हैं।

विशेष खोजी रिपोर्टें: अपने करियर के शुरुआती दौर में, उन्होंने ‘आंखों देखी’ (दूरदर्शन) नामक एक खोजी शो में काम किया, जो अपराध और सामाजिक मुद्दों की पड़ताल करता था।

हाई-प्रोफाइल साक्षात्कार: उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित भारत के लगभग हर शीर्ष राजनीतिक नेता का साक्षात्कार लिया है।

ये साक्षात्कार अक्सर उनके सीधे और दृढ़ प्रश्नों के लिए जाने जाते हैं।

पुरस्कार व सम्मान

2025 ITA अवार्ड सर्वश्रेष्ठ समाचार एंकर (टॉक शो – हल्ला बोल)

2024 ITA अवार्ड सर्वश्रेष्ठ हिंदी समाचार एंकर

2022 ENBA अवार्ड ‘हल्ला बोल’ के लिए सर्वश्रेष्ठ टॉक शो का पुरस्कार

2018 ITA अवार्ड सर्वश्रेष्ठ एंकर (न्यूज़/करेंट अफेयर्स शो)

2015 IMWA अवार्ड सर्वश्रेष्ठ एंकर

2015 ENBA अवार्ड सर्वश्रेष्ठ एंकर (हिंदी)

2014 ITA अवार्ड सर्वश्रेष्ठ एंकर

अन्य NT अवार्ड साल के सर्वश्रेष्ठ रिपोर्टर का पुरस्कार

अन्य PHD चैंबर पत्रकारिता में उत्कृष्टता के लिए सम्मान

विरासत और प्रभाव

अंजना ओम कश्यप की विरासत और प्रभाव सिर्फ टेलीविजन पर एक चेहरा होने तक सीमित नहीं है। उन्होंने भारत में समाचार प्रस्तुत करने के तरीके को बदल दिया है और कई लोगों के लिए एक आदर्श बन गई हैं।

हिंदी समाचारों को नया अर्थ देना

“हल्ला बोल” शैली : उन्होंने बहस की एक तेज़-तर्रार और ऊर्जावान शैली को लोकप्रिय बनाया।

कई युवा एंकर अब गरमागरम बहसों को संभालने के उनके “लड़ाकू लेकिन संयमित” तरीके की नकल करने की कोशिश करते हैं।

भारत के भीतरी इलाकों से जुड़ना : उन्हें छोटे शहरों के भारत (जिसे “हिंदी भाषी क्षेत्र” कहा जाता है) की चिंताओं को राष्ट्रीय टेलीविजन पर लाने का श्रेय दिया जाता है,

जिसमें उन्होंने बड़े शहरों की खबरों को आम लोगों के लिए मायने रखने वाले मुद्दों के साथ संतुलित किया।

मीडिया में महिलाओं को सशक्त बनाना

लैंगिक भेदभाव की बाधाओं को तोड़ते हुए : एक ऐसे क्षेत्र में जहां अक्सर पुरुषों का वर्चस्व रहता है, उन्होंने प्रबंध संपादक के पद तक तरक्की की।

इससे यह साबित हुआ कि महिलाएं न केवल सफल एंकर बन सकती हैं, बल्कि समाचार कक्ष में शक्तिशाली निर्णय लेने वाली भी हो सकती हैं।

एक आदर्श : रांची की एक छात्रा से लेकर दिल्ली की एक शीर्ष कार्यकारी तक की उनकी यात्रा छोटे शहरों की हजारों युवा लड़कियों को पत्रकारिता में करियर बनाने के लिए प्रेरित करती है।

सार्वजनिक प्रभाव

  1. राजनीति को स्टूडियो से सड़क पर लाना (Ground Impact) :

अंजना ने न्यूज़ रूम की चारदीवारी तोड़कर बहस को सीधे जनता के बीच पहुँचाया।

सीधा संवाद: उनके शो ‘राजतिलक’ जैसे कार्यक्रमों ने नेताओं को मजबूर किया कि वे सिर्फ एसी कमरों में बैठकर भाषण न दें, बल्कि जनता के बीच जाकर उनके कड़वे सवालों का सामना करें।

पारदर्शिता: इससे चुनाव कवर करने का तरीका बदल गया। अब नेता और जनता आमने-सामने होते हैं, जिससे राजनीति और भी पारदर्शी (Transparent) हो गई है।

‘जनता की प्रहरी’ और सामाजिक बदलाव

अंजना सिर्फ राजनीति ही नहीं, बल्कि समाज के गहरे जख्मों पर भी मरहम लगाने और सवाल पूछने का साहस रखती हैं।

महिलाओं की आवाज़: साल 2012 के निर्भया केस के दौरान उनकी निडर और भावुक रिपोर्टिंग ने पूरे देश को झकझोर दिया था।

उन्होंने इस मुद्दे को तब तक जीवित रखा जब तक कि महिला सुरक्षा पर राष्ट्रीय स्तर पर कानून और सोच में बदलाव की लहर नहीं आई।

सेंसिटिव रिपोर्टिंग: चाहे अस्पताल की बदहाली हो या सीमा पर जवानों का हाल, उन्होंने हमेशा एक ऐसी ‘प्रहरी’ की भूमिका निभाई जो सोई हुई व्यवस्था को जगाने का काम करती है।

कुल संपत्ति

विवरण अनुमानित आंकड़े

कुल संपत्ति (Net Worth) लगभग ₹50 करोड़ (2025-26 के अनुमान के अनुसार)

वार्षिक वेतन (Annual Salary) लगभग ₹4 करोड़

मासिक आय (Monthly Income) लगभग ₹33 लाख

आय के स्रोत’ आज तक’ से वेतन, पेशेवर कार्यक्रमों में भागीदारी और अन्य निवेश।

विवाद

बिहार आईसीयू घटना (2019) :

बिहार में एक स्वास्थ्य संकट को कवर करते समय, अंजना नवजात शिशु आईसीयू (बच्चों के लिए गहन देखभाल इकाई) में दाखिल हुई और ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर से सवाल पूछने लगी।

विरोध : कई लोगों और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने उनकी आलोचना की।

उनका तर्क था कि उनके तेज आवाज वाले व्यवहार से बीमार बच्चे परेशान हो रहे थे और वे एक मेहनती डॉक्टर पर सरकारी विफलता का आरोप लगाकर “प्रचार” हासिल करने की कोशिश कर रही थीं।

वाल्मीकि की टिप्पणियां (2025) :

2025 के अंत में, लुधियाना में उनके खिलाफ एक एफआईआर (पुलिस शिकायत) दर्ज की गई थी।

मामला: आरोप लगाया गया कि उन्होंने एक टेलीविजन चर्चा के दौरान महर्षि वाल्मीकि के बारे में बात करते हुए “अनुचित” या “अपमानजनक” भाषा का प्रयोग किया।

परिणाम : वाल्मीकि समुदाय के सदस्य बेहद आहत हुए, जिसके चलते विरोध प्रदर्शन हुए और उनके तथा चैनल के नेतृत्व के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई।

“ब्लैक एंड व्हाइट” पार्टीशन शो (2025) :

लखनऊ की एक अदालत ने “विभाजन का उद्देश्य पूरा क्यों नहीं हुआ?” नामक एक शो के संबंध में उनके खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश दिया।

मुद्दा : आलोचकों और कानूनी विशेषज्ञों ने तर्क दिया कि शो ने समुदायों के बीच विभाजन पैदा करने के लिए 1947 के दौरान मुस्लिम प्रवासन के बारे में “विकृत इतिहास” और “चयनात्मक डेटा” का इस्तेमाल किया।

शिकायत : पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने दावा किया कि यह शो “विभाजनकारी” था और सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ सकता था।

अभिनेता धर्मेंद्र के बारे में फर्जी खबरें (2025) :

नवंबर 2025 में, अंजना ने एक रिपोर्ट प्रसारित की जिसमें दावा किया गया कि दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र का निधन हो गया है।

गलती : रिपोर्ट झूठी थी; अभिनेता जीवित था और उसका इलाज चल रहा था।

प्रतिक्रिया : खबर वायरल हो गई और आज तक को आधिकारिक माफी मांगने के लिए मजबूर होना पड़ा। इस गलती के कारण अंजना सोशल मीडिया पर ट्रोलर्स का निशाना बन गईं।

पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग के आरोप

अपने पूरे करियर के दौरान, आलोचकों (जैसे कि पत्रिका द कारवां) ने उन पर “सरकार समर्थक” होने का आरोप लगाया है।

आलोचना : कुछ लोगों का कहना है कि वह शक्तिशाली नेताओं (जैसे प्रधानमंत्री मोदी) से बहुत आसान सवाल पूछती हैं,

जबकि विपक्षी नेताओं के प्रति उनका रवैया बेहद आक्रामक होता है। उनका दावा है कि उनकी रिपोर्टिंग अक्सर सत्ताधारी पार्टी की विचारधारा का पक्ष लेती है।

5 ऐसी बातें जो आप नहीं जानते :

  1. डॉक्टर बनने का था सपना :

अंजना कभी पत्रकार नहीं बनना चाहती थीं। उनके पिता सेना में डॉक्टर थे, इसलिए वह भी उन्हीं की तरह मेडिकल की पढ़ाई करना चाहती थीं।

उन्होंने इसके लिए तैयारी भी की, लेकिन जब प्री-मेडिकल टेस्ट (PMT) में सफलता नहीं मिली, तो उन्होंने अपनी राह बदल दी।

  1. बॉटनी की छात्रा रही हैं :

न्यूज़ रूम में राजनीति की गुत्थियाँ सुलझाने वाली अंजना असल में विज्ञान की छात्रा रही हैं। उन्होंने दिल्ली के दौलत राम कॉलेज से बॉटनी (वनस्पति विज्ञान) में ऑनर्स किया है।

विज्ञान से पत्रकारिता तक का उनका यह सफर वाकई दिलचस्प है।

  1. NGO में कर चुकी हैं काम :

पत्रकारिता में आने से पहले अंजना ने समाज सेवा का रास्ता चुना था। उन्होंने ‘दिल्ली स्कूल ऑफ सोशल वर्क’ से मास्टर डिग्री ली और एक परामर्शदाता (Counselor) के रूप में एक NGO में काम किया।

समाज की जमीनी हकीकत को उन्होंने न्यूज़ की दुनिया में आने से पहले ही देख लिया था।

  1. जामिया से मिली पत्रकारिता की सीख :

जब उन्होंने मीडिया में आने का फैसला किया, तो उन्होंने दिल्ली की मशहूर जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता का डिप्लोमा किया।

यहीं से उनकी उस ‘धारदार आवाज़’ को एक प्रोफेशनल मंच मिला।

  1. दूरदर्शन से हुई थी शुरुआत :

आज भले ही वह ‘आज तक’ का सबसे बड़ा चेहरा हैं, लेकिन उनके करियर की पहली सीढ़ी दूरदर्शन थी।

साल 2003 में उन्होंने दूरदर्शन से अपना सफर शुरू किया था और फिर ज़ी न्यूज़ और न्यूज़ 24 जैसे चैनलों से होते हुए आज इस मुकाम पर पहुंची हैं।

इस बायोग्राफी का लेखन आरुषि शर्मा ने किया हैं।

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Madhuri
Madhurihttps://reportbharathindi.com/
पत्रकारिता में 6 वर्षों का अनुभव है। पिछले 3 वर्षों से Report Bharat से जुड़ी हुई हैं। इससे पहले Raftaar Media में कंटेंट राइटर और वॉइस ओवर आर्टिस्ट के रूप में कार्य किया। Daily Hunt के साथ रिपोर्टर रहीं और ETV Bharat में एक वर्ष तक कंटेंट एडिटर के तौर पर काम किया। लाइफस्टाइल, इंटरनेशनल और एंटरटेनमेंट न्यूज पर मजबूत पकड़ है।
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