अजय देवगन बायोग्राफी: कल्पना कीजिए 1991 के एक सिनेमा हॉल की, जहाँ बत्तियाँ धीरे-धीरे मंद हो जाती हैं, भीड़ शांत हो जाती है और पर्दे पर अचानक एक ऐसा दृश्य उभरता है जिसे भूल पाना नामुमकिन है।
तूफानी आँखों वाला एक युवक दो तेज रफ्तार मोटरसाइकिलों पर एक-एक पैर रखकर पूरी संतुलन के साथ खड़ा है,
उसकी बाहें फैली हुई हैं और हवा उसकी जैकेट को जोर से झकझोर रही है। उस पल में न कोई परिचय चाहिए, न कोई नाम क्योंकि उस एक सीन ने ही सब कुछ कह दिया था।
वह थे अजय देवगन निडर, अलग और पूरी तरह अविस्मरणीय। यही वह शुरुआत थी, जिसने एक ऐसे सफर को जन्म दिया जो तीन दशकों से भी ज्यादा लंबा चला।
इस यात्रा में 100 से अधिक फिल्में, चार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, पद्म श्री सम्मान और भारतीय सिनेमा में एक बेहद सम्मानित पहचान शामिल है, लेकिन अजय देवगन की कहानी सिर्फ सफलता की चमक-दमक तक सीमित नहीं है।
दूसरे कई सितारों के विपरीत, जो अचानक चमकते हैं और फिर समय के साथ फीके पड़ जाते हैं, अजय देवगन ने अपने करियर को धीरे-धीरे, मजबूती के साथ बनाया। उन्होंने खुद को हर दौर के साथ बदला एक्शन हीरो से एक गंभीर और गहराई वाले अभिनेता तक,
फिर एक निर्माता और अंततः एक ऐसी शख्सियत तक, जो सिर्फ एक स्टार नहीं बल्कि अपने आप में एक संस्था बन चुकी है। अजय देवगन की जीवनी: यह कहानी है एक शांत और गंभीर इंसान की, जिसने बिना शोर किए, अपने काम के जरिए सिनेमा में एक स्थायी और मजबूत पहचान बनाई।
पर्सनल प्रोफाइल
| श्रेणी | विवरण |
|---|---|
| पूरा जन्म नाम | विशाल वीरेंद्र देवगन |
| स्क्रीन नाम | Ajay Devgn |
| जन्म तिथि | 2 अप्रैल 1969 |
| आयु (2026 तक) | 57 वर्ष |
| जन्म स्थान | New Delhi (परिवार मूल रूप से Amritsar से) |
| राष्ट्रीयता | भारतीय |
| धर्म | हिंदू धर्म (शैव) |
| ऊंचाई | 5 फुट 10 इंच (178 सेमी) |
| आंखों का रंग | काला |
| पिता | Veeru Devgan (स्टंट संयोजक, एक्शन निर्देशक) |
| माँ | वीना देवगन (फिल्म निर्माता) |
| जीवनसाथी | Kajol (विवाह: 24 फरवरी 1999) |
| बच्चे | न्यासा देवगन (2003), युग देवगन (2010) |
| स्कूल | सिल्वर बीच हाई स्कूल, जुहू, मुंबई |
| कॉलेज | मिथिबाई कॉलेज, मुंबई |
| पेशा | अभिनेता, निर्देशक, निर्माता |
| डेब्यू फिल्म | Phool Aur Kaante |
| प्रोडक्शन हाउस | अजय देवगन फिल्म्स (1999) |
| प्रमुख पुरस्कार | 4 राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, 4 फिल्मफेयर पुरस्कार, पद्म श्री (2016) |
| नेट वर्थ | लगभग ₹450–500 करोड़ |
| के लिए प्रसिद्ध | Singham, Golmaal, Drishyam, Zakhm, The Legend of Bhagat Singh |
प्रारंभिक जीवन और पृष्ठभूमि
अजय देवगन का जन्म 2 अप्रैल 1969 को नई दिल्ली में विशाल वीरेंद्र देवगन के रूप में हुआ था। उनका परिवार मूल रूप से पंजाब के अमृतसर का रहने वाला था और पूरी तरह फिल्मी दुनिया से जुड़ा हुआ था। बचपन से ही उनके आसपास सिनेमा का माहौल था, जिससे उनका झुकाव भी उसी दिशा में होने लगा।
उनके पिता वीरेंद्र “वीरू” देवगन बॉलीवुड के जाने-माने स्टंट कोरियोग्राफर और एक्शन डायरेक्टर थे, जिन्होंने कई बड़ी फिल्मों में काम किया। वहीं उनकी मां वीना देवगन एक फिल्म निर्माता थीं। उनके परिवार में और भी लोग फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े थे, जैसे उनके चचेरे भाई अनिल देवगन, जो आगे चलकर निर्देशक और लेखक बने।
ऐसे माहौल में पले-बढ़े अजय को प्रेरणा के लिए कहीं और जाने की जरूरत नहीं पड़ी। वह अक्सर अपने पिता के साथ फिल्म सेट पर जाते थे और वहीं से उन्होंने सिनेमा की बारीकियों को समझना शुरू किया।
बाद में उनका परिवार मुंबई में बस गया, जहां उन्होंने जुहू के सिल्वर बीच हाई स्कूल में पढ़ाई की और फिर मिथिबाई कॉलेज से कॉमर्स में अपनी पढ़ाई पूरी की। जहां उनके दोस्त पढ़ाई में व्यस्त रहते थे, वहीं अजय अपने आप को शारीरिक रूप से मजबूत बनाने में लगे रहते थे।
उन्होंने मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग ली और ब्लैक बेल्ट भी हासिल की। इस अनुशासन ने उन्हें न सिर्फ शारीरिक रूप से मजबूत बनाया, बल्कि मानसिक रूप से भी काफी दृढ़ बनाया।
बचपन से फिल्मी माहौल और साथ में मिली कड़ी ट्रेनिंग ने अजय देवगन को एक ऐसा कलाकार बनाया, जो आगे चलकर एक्शन और गंभीर अभिनय दोनों में माहिर साबित हुआ।
फिल्मों में पहला कदम
अजय देवगन की कहानी कैमरे के सामने आने से बहुत पहले ही शुरू हो चुकी थी। दर्शकों ने भले ही उन्हें 1991 में पहली बार बड़े पर्दे पर देखा, लेकिन उनका फिल्मी सफर इससे पहले ही शुरू हो गया था।
उन्होंने 1985 में आई फिल्म प्यारी बहना में एक छोटे से रोल के साथ बाल कलाकार के रूप में काम किया। यह भूमिका भले ही छोटी थी, लेकिन यहीं से उनके अंदर अभिनय की दुनिया में कदम रखने की शुरुआत हो गई थी।
जब उन्होंने 1991 में एक अभिनेता के रूप में फिल्मों में एंट्री करने का फैसला किया, तब उन्होंने एक बड़ा बदलाव भी किया। उन्होंने अपना असली नाम “विशाल” छोड़कर “अजय” नाम अपनाया। उस समय इंडस्ट्री में “विशाल” नाम के कई नए कलाकार आ रहे थे, इसलिए उन्होंने एक अलग पहचान बनाने के लिए यह फैसला लिया।
यह बदलाव सिर्फ नाम का नहीं था, बल्कि एक नई शुरुआत का प्रतीक भी था। “अजय देवगन” के नाम से उन्होंने एक ऐसी पहचान बनाई, जो आगे चलकर भारतीय सिनेमा में एक मजबूत और सम्मानित स्थान बन गई।
बॉलीवुड में शुरुआती करियर
अजय देवगन की पहली फिल्म फूल और कांटे (1991) जब रिलीज़ हुई, तो उन्होंने आते ही धमाका कर दिया। फिल्म की शुरुआत में उनका दो चलती मोटरसाइकिलों पर खड़े होने वाला स्टंट इतना मशहूर हुआ कि उसी एक सीन ने उन्हें रातोंरात पहचान दिला दी।
इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल की और अजय को सर्वश्रेष्ठ नवोदित अभिनेता का फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिला। इसके बाद उनकी फिल्म जिगर (1992), जिसमें उनके साथ करिश्मा कपूर थीं, भी सफल रही। इस फिल्म ने यह साबित कर दिया कि उनकी पहली सफलता कोई संयोग नहीं थी।
यह उस साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में शामिल हुई। धीरे-धीरे अजय को लगातार फिल्में मिलने लगीं, खासकर एक्शन से भरपूर किरदार, जो उनकी पर्सनैलिटी पर पूरी तरह फिट बैठते थे।
विजयपथ (1994), दिलवाले (1994) और सुहाग (1994) जैसी फिल्मों ने उन्हें 90 के दशक में एक मजबूत और भरोसेमंद एक्शन हीरो के रूप में स्थापित कर दिया। हालांकि इस सफर में उन्हें असफलताओं का भी सामना करना पड़ा।
90 के दशक के बीच में उनकी कई फिल्में बॉक्स ऑफिस पर नहीं चलीं, जिससे उनके करियर पर असर पड़ा।लेकिन अजय देवगन ने हार मानने के बजाय खुद को बदलने का फैसला किया।
उन्होंने अपने काम करने के तरीके और फिल्म चुनने की समझ को और बेहतर किया, जिससे वह धीरे-धीरे फिर से मजबूत होकर सामने आए।
सफलता की नई पहचान
1990 के दशक के अंत में अजय देवगन के करियर ने एक ऐसा मोड़ लिया, जिसने उन्हें सिर्फ एक एक्शन हीरो से आगे बढ़ाकर एक गंभीर अभिनेता के रूप में स्थापित कर दिया।
यह वह समय था जब लोगों ने उन्हें नए नजरिए से देखना शुरू किया। 1998 में आई फिल्म ज़ख्म, जिसे महेश भट्ट ने निर्देशित किया था, उनके करियर की सबसे बड़ी टर्निंग पॉइंट साबित हुई। इस फिल्म में उन्होंने सांप्रदायिक हिंसा और पहचान जैसे गंभीर विषयों को बेहद भावनात्मक तरीके से निभाया।
उनके अभिनय की इतनी सराहना हुई कि उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। दिलचस्प बात यह रही कि जिस दिन उन्हें यह सम्मान मिला, वह खुद समारोह में शामिल भी नहीं हो पाए, क्योंकि उनकी फ्लाइट रद्द हो गई थी।
इसके बाद 1999 में संजय लीला भंसाली की फिल्म हम दिल दे चुके सनम आई, जिसमें अजय देवगन ने वनराज का किरदार निभाया। यह एक ऐसा किरदार था, जो अपनी पत्नी से सच्चा प्यार करता है, लेकिन उसके पुराने प्यार को समझते हुए उसे उससे मिलाने में मदद करता है।
इस फिल्म में उनके साथ सलमान खान और ऐश्वर्या राय भी थे। इस फिल्म में उनका शांत, संतुलित और गहराई से भरा अभिनय लोगों को बहुत पसंद आया और उन्हें फिल्मफेयर में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए नामांकन भी मिला।
इन दोनों फिल्मों ने यह साफ कर दिया कि अजय देवगन सिर्फ एक्शन सीन करने वाले हीरो नहीं हैं, बल्कि एक ऐसे अभिनेता हैं जो हर तरह के किरदार को पूरी सच्चाई और गहराई के साथ निभा सकते हैं।
करियर की खास फिल्में
अजय देवगन का फिल्मी सफर अलग-अलग तरह की फिल्मों और दमदार किरदारों से भरा हुआ है। उनकी फिल्मों की सूची देखना ऐसा लगता है जैसे आप भारतीय सिनेमा के हर रंग को एक साथ देख रहे हों। 2002 में आई द लेजेंड ऑफ भगत सिंह उनके करियर की सबसे बेहतरीन फिल्मों में से एक मानी जाती है।
इस फिल्म में उन्होंने भगत सिंह का किरदार इतने सच्चे और भावनात्मक तरीके से निभाया कि उन्हें दूसरा राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। उसी साल आई कंपनी में उन्होंने एक अंडरवर्ल्ड डॉन का रोल निभाया, जो काफी प्रभावशाली था।
इसके बाद गंगाजल (2003) में एक सख्त पुलिस अधिकारी के रूप में उनका अभिनय लोगों को बहुत पसंद आया। 2006 में आई ओमकारा में उन्होंने एक गहरे और जटिल किरदार को निभाकर यह साबित किया कि वे सिर्फ एक्शन ही नहीं, बल्कि गंभीर और चुनौतीपूर्ण रोल भी बखूबी कर सकते हैं।
फिर 2011 में सिंघम आई, जिसने उन्हें एक बार फिर बड़े स्टार के रूप में स्थापित कर दिया। यह फिल्म इतनी हिट रही कि इसकी फ्रेंचाइज़ बन गई और आज भी बहुत लोकप्रिय है। इसके साथ ही गोलमाल सीरीज़ ने उनके कॉमिक टाइमिंग को भी दिखाया।
इससे यह साबित हुआ कि अजय देवगन हर तरह की फिल्म एक्शन, ड्रामा या कॉमेडी में फिट बैठते हैं। 2020 में आई तानाजी: द अनसंग वॉरियर उनके करियर की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में से एक बनी।
इसमें उन्होंने मराठा योद्धा तानाजी का किरदार निभाया, जिसे दर्शकों और समीक्षकों दोनों ने खूब सराहा। दृश्यम (2015) और इसकी 2022 में आई सीक्वल में उन्होंने एक साधारण आदमी के किरदार में शानदार अभिनय किया, जो एक जटिल कहानी को अपने दम पर संभालता है।
इसके अलावा रेड (2018) भी एक ऐसी फिल्म थी, जिसमें उनकी शांत लेकिन मजबूत स्क्रीन प्रेजेंस ने फिल्म को खास बना दिया। इन सभी फिल्मों ने यह साबित कर दिया कि अजय देवगन सिर्फ एक स्टार नहीं, बल्कि एक ऐसे अभिनेता हैं जो हर किरदार को अपनी गहराई और सच्चाई से जीवंत बना देते हैं।
निर्देशन और निर्माण में कदम
अजय देवगन सिर्फ एक अभिनेता ही नहीं, बल्कि कैमरे के पीछे भी उतने ही सक्रिय और महत्वाकांक्षी हैं। उन्होंने 1999 में अपना प्रोडक्शन हाउस
अजय देवगन एफफिल्म्स (ADF) शुरू किया, जिसने कई सफल फिल्मों का निर्माण और सह-निर्माण किया है, जैसे तानाजी और गोलमाल सीरीज़।
इसके अलावा उन्होंने NY VFXwala नाम की एक विजुअल इफेक्ट्स कंपनी भी बनाई, जिसका नाम उनके बच्चों नायसा और युग के नाम पर रखा गया है।
निर्देशक के रूप में उन्होंने 2008 में यू मी और हम से शुरुआत की, जिसमें काजोल ने अभिनय किया था।
यह एक भावनात्मक प्रेम कहानी थी, जिसे भले ही मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली, लेकिन इससे उनकी अलग तरह की कहानियाँ बताने की इच्छा साफ नजर आई। 2016 में आई शिवाय एक बड़ी एक्शन-ड्रामा फिल्म थी, जिसमें उन्होंने निर्देशन और अभिनय दोनों किया।
इसके बाद रनवे 34 (2022) जैसी फिल्म ने यह दिखाया कि वह एक गंभीर और आत्मविश्वासी कहानीकार बन चुके हैं। 2023 में आई भोला, जो तमिल फिल्म कैथी का रीमेक थी, भी उनके निर्देशन में बनी।
हालांकि उनकी हर फिल्म सुपरहिट नहीं रही, लेकिन उनका यह सफर यह दिखाता है कि अजय देवगन हमेशा कुछ नया करने और जोखिम लेने के लिए तैयार रहते हैं।
पुरस्कार और सम्मान
| पुरस्कार श्रेणी | उपलब्धियाँ | विवरण |
|---|---|---|
| राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार | 4 पुरस्कार (3 अभिनेता, 1 निर्माता) | Zakhm (ज़ख्म), The Legend of Bhagat Singh (भगत सिंह की कथा), Tanhaji (तान्हाजी) |
| नागरिक सम्मान | पद्म श्री (2016) | भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान |
| फिल्मफेयर पुरस्कार | 4 जीत | Phool Aur Kaante (फूल और कांटे), Deewangee (दीवानगी) |
| समीक्षकों द्वारा सम्मान | सर्वश्रेष्ठ अभिनेता | Company (कंपनी), The Legend of Bhagat Singh (भगत सिंह की कथा) |
| अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार | सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (गोल्डन रूस्टर) | Raid (रेड) |
कम ज्ञात रोचक तथ्य
- अजय देवगन को फिल्म करण अर्जुन में करण का रोल ऑफर हुआ था, लेकिन शूटिंग डेट्स क्लैश होने की वजह से उन्होंने विजयपथ चुनी और बाद में यह रोल सलमान खान को मिला।
फिल्म डर के लिए भी उन्हें पहले अप्रोच किया गया था, लेकिन बाद में यह रोल शाहरुख खान ने निभाया और वह उनके करियर का बड़ा टर्निंग पॉइंट बना।
- अजय देवगन मार्शल आर्ट में ब्लैक बेल्ट हैं और उन्होंने अपने शुरुआती दिनों में कड़ी ट्रेनिंग ली थी।
वह एक अच्छे कुक भी हैं और मुगलई, चाइनीज़, कॉन्टिनेंटल और मैक्सिकन खाना बनाना जानते हैं।
- उन्हें जूतों और सनग्लासेस का बहुत शौक है कहा जाता है कि उनके पास सैकड़ों जोड़ी जूते और चश्मे हैं।
रोहित शेट्टी और अजय देवगन बचपन से दोस्त हैं, क्योंकि उनके पिता बॉलीवुड में एक्शन डायरेक्टर थे और एक ही सर्कल में काम करते थे।
- उन्होंने 2009 में अंक ज्योतिष के अनुसार अपने नाम की स्पेलिंग “Devgan” से बदलकर “Devgn” कर ली।
इतनी बड़ी स्टारडम के बावजूद अजय देवगन मीडिया से दूरी बनाए रखते हैं और पब्लिक इवेंट्स में कम ही नजर आते हैं, जो उन्हें बॉलीवुड में अलग बनाता है।
आने वाली फिल्में और आगे का सफर
अजय देवगन आने वाले समय में भी कई बड़ी और दिलचस्प फिल्मों के साथ दर्शकों का मनोरंजन करने वाले हैं।
- दृश्यम 3 — इस सुपरहिट फ्रेंचाइज़ का आखिरी भाग बन रहा है। फिल्म की शूटिंग शुरू हो चुकी है और इसमें तब्बू, श्रिया सरन और जयदीप अहलावत जैसे कलाकार नजर आएंगे। यह फिल्म 2 अक्टूबर 2026 को रिलीज होने की उम्मीद है।
गोलमाल 5 — रोहित शेट्टी की मशहूर कॉमेडी सीरीज़ का अगला पार्ट भी आने वाला है। इसमें अजय देवगन अपनी पुरानी टीम के साथ वापसी करेंगे। फिल्म 2027 में रिलीज हो सकती है।
- धमाल 4 — यह कॉमेडी फिल्म 3 जुलाई 2026 को रिलीज होने वाली है, जिसमें अजय देवगन कई बड़े सितारों के साथ नजर आएंगे।
रेंजर — एक एक्शन-एडवेंचर फिल्म, जिसमें उनके साथ संजय दत्त और तमन्ना भाटिया भी होंगे। इसकी रिलीज डेट 4 दिसंबर 2026 तय की गई है।
- लव रंजन की फिल्म — इस फिल्म में अजय देवगन और रणबीर कपूर पहली बार साथ नजर आएंगे, जो दर्शकों के लिए काफी खास होगी।
शैतान 2 — पहली फिल्म की सफलता के बाद इसका सीक्वल भी प्लान किया जा रहा है, जिसमें अजय देवगन अपने किरदार में फिर दिख सकते हैं।
इन सभी फिल्मों को देखकर साफ है कि अजय देवगन आज भी बॉलीवुड के सबसे सक्रिय और मजबूत कलाकारों में से एक हैं।
लेखिका – नमिता देवड़ा
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