Wednesday, January 7, 2026

अजय चौटाला ने दिया विवादित बयान, Gen-Z आंदोलन की भारत में जरूरत!

अजय चौटाला ने दिया विवादित बयान: हरियाणा की राजनीति में एक बार फिर बयानबाज़ी तेज हो गई है। जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) के वरिष्ठ नेता अजय चौटाला के एक बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।

एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अजय चौटाला ने पड़ोसी देशों में हुए जन आंदोलनों का हवाला देते हुए मौजूदा शासकों के खिलाफ बेहद आक्रामक भाषा का इस्तेमाल किया।

उन्होंने कहा कि किस तरह पड़ोसी मुल्कों के नौजवानों ने संगठित होकर आंदोलनों के ज़रिए सरकारों का तख्ता पलट दिया और शासकों को देश छोड़ने पर मजबूर कर दिया।

युवाओं ने सड़कों पर उतरकर सत्ता के खिलाफ संघर्ष किया

अजय चौटाला ने अपने भाषण में कहा कि नेपाल समेत कई देशों में युवाओं ने सड़कों पर उतरकर सत्ता के खिलाफ संघर्ष किया।

उनके मुताबिक, इन आंदोलनों ने न सिर्फ सरकारों को गिराया, बल्कि शासकों को रातोंरात देश छोड़कर भागने के लिए मजबूर कर दिया।

उन्होंने कहा कि ऐसे उदाहरण यह दिखाते हैं कि जब जनता खासकर युवा वर्ग एकजुट होता है, तो किसी भी सत्ता को चुनौती दी जा सकती है।

भारत में होना चाहिए पड़ोसी मुल्क जैसा आंदोलन- अजय चौटाला

अपने बयान में अजय चौटाला ने कहा, “पड़ोसी मुल्कों के नौजवानों ने आंदोलन कर के सरकार का तख्ता पलट कर दिया।

शासकों को रातोंरात देश छोड़ने पर मजबूर कर दिया। नेपाल के नौजवानों ने लामबंद होकर न केवल उन्हें सड़कों पर पीटा, बल्कि देश छोड़कर भगा दिया।”

उन्होंने आगे कहा कि मौजूदा हालात में जनता को भी इसी तरह संगठित होकर सड़कों पर उतरना होगा।

चौटाला के अनुसार इन शासकों को गद्दी से खींचकर उतारना होगा। सड़कों पर दौड़ाना होगा और उन्हें देश छोड़ने पर मजबूर करना पड़ेगा। तभी जाकर इस कुशासन से पीछा छूटेगा।

उनके इस बयान को सत्ता विरोधी आक्रोश के रूप में देखा जा रहा है।

हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की भाषा आने वाले समय में विवाद का कारण बन सकती है।

विपक्षी दलों ने इसे गैर-जिम्मेदाराना बयान बताते हुए लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ करार दिया है।

राजनीतिक गलियारों में प्रतिक्रिया

अजय चौटाला के इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है।

सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने बयान की कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि लोकतंत्र में सत्ता परिवर्तन का रास्ता हिंसा या उग्र आंदोलनों से नहीं, बल्कि चुनाव और संवैधानिक प्रक्रियाओं से तय होता है।

वहीं, कुछ विपक्षी नेताओं ने इसे जनता की नाराज़गी की अभिव्यक्ति बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि शब्दों की मर्यादा बनाए रखना ज़रूरी है।

कानूनी जानकारों का कहना है कि इस तरह के बयान यदि उकसावे के दायरे में आते हैं, तो इन पर प्रशासन की नजर रह सकती है।

फिलहाल अजय चौटाला की ओर से इस बयान को लेकर कोई सफाई या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

राजनीतिक माहौल को देखते हुए माना जा रहा है कि यह बयान आने वाले दिनों में हरियाणा की राजनीति में बहस का बड़ा मुद्दा बन सकता है,

खासकर तब, जब राज्य में पहले से ही राजनीतिक तापमान ऊंचा बना हुआ है।

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Madhuri
Madhurihttps://reportbharathindi.com/
पत्रकारिता में 6 वर्षों का अनुभव है। पिछले 3 वर्षों से Report Bharat से जुड़ी हुई हैं। इससे पहले Raftaar Media में कंटेंट राइटर और वॉइस ओवर आर्टिस्ट के रूप में कार्य किया। Daily Hunt के साथ रिपोर्टर रहीं और ETV Bharat में एक वर्ष तक कंटेंट एडिटर के तौर पर काम किया। लाइफस्टाइल, इंटरनेशनल और एंटरटेनमेंट न्यूज पर मजबूत पकड़ है।
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