आदित्य धर बायोग्राफी: धुरंधर 2 का टीज़र रिलीज़ होते ही सोशल मीडिया पर एक ही सवाल गूंजने लगा- क्या आदित्य धर फिर से इतिहास रचने वाले हैं?
लेकिन धुरंधर 2 की इस चर्चा के पीछे एक लंबा और धैर्य से भरा सफ़र छिपा है। एक ऐसा सफ़र जिसकी शुरुआत किसी सुपरहिट फ़िल्म से नहीं, बल्कि असफल परीक्षाओं, अनदेखे सालों और लगातार संघर्ष से हुई थी।
आदित्य धर आज भले ही भारतीय सिनेमा के सबसे चर्चित निर्देशकों में गिने जाते हों, लेकिन उनकी कहानी उस दौर से शुरू होती है,
जब न तो उनके नाम की पहचान थी और न ही सफलता की कोई गारंटी।
यही वजह है कि आदित्य धर की जीवनी सिर्फ़ उनके काम की सूची नहीं है, बल्कि यह समझने का मौका है कि कैसे एक शांत स्वभाव का लेखक,
जिसने कभी भारतीय सेना में जाने का सपना देखा था, आगे चलकर बड़े पर्दे पर देशभक्ति और रणनीति की सबसे प्रभावशाली कहानियाँ कहने लगा।
व्यक्तिगत जानकारी
| नाम | आदित्य धर |
| जन्म तिथि | 12 मार्च 1983 |
| आयु (2026 तक) | 42 वर्ष |
| जन्मस्थान | नई दिल्ली, भारत |
| पेशा | निर्देशक, लेखक, निर्माता |
| ऊंचाई | लगभग 5 फीट 7 इंच (170 सेमी) |
| राष्ट्रीयता | भारतीय |
| धर्म/ समुदाय | हिंदू (कश्मीरी पंडित) |
| जीवनसाथी | यामी गौतम (विवाह: 4 जून 2021) |
| बच्चे | बेटा- वेदविद धर, जन्म: 10 मई 2024 |
| प्रसिद्ध फिल्में | उरी द सर्जिकल स्ट्राइक, धुरंधर, आर्टिकल 370 |
| आगामी फिल्में | धुरंधर: द रिवेंज (19 मार्च 2026 को रिलीज) |
| प्रमुख पुरस्कार | राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (सर्वश्रेष्ठ निर्देशक – ‘उरी’) |
प्रारंभिक जीवन और अधूरे सपने
आदित्य धर बायोग्राफी: आदित्य धर का जन्म 12 मार्च 1983 को नई दिल्ली में एक मध्यमवर्गीय कश्मीरी पंडित परिवार में हुआ। उनका बचपन एक ऐसे माहौल में बीता जहां पढ़ाई, कला और संस्कृति को बहुत महत्व दिया जाता था।
उनकी मां डॉ. सुनीता धर दिल्ली विश्वविद्यालय में संगीत और ललित कला संकाय की डीन थीं। इसी कारण घर का वातावरण रचनात्मकता से भरा हुआ था, जिसने आदित्य की सोच और व्यक्तित्व को धीरे-धीरे गहराई दी।
हालांकि, बचपन और युवावस्था में आदित्य का सपना फ़िल्मों से जुड़ा नहीं था। वे भारतीय सेना में शामिल होकर देश की सेवा करना चाहते थे।
अनुशासन, देशभक्ति और सैनिक जीवन उन्हें बहुत आकर्षित करता था। इसी सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने संयुक्त रक्षा सेवा (CDS) परीक्षा दो बार दी, लेकिन दोनों बार उन्हें सफलता नहीं मिली।
हालांकि सेना में न जा पाने का दुख उन्हें रहा, लेकिन सेना के प्रति उनका लगाव कभी कम नहीं हुआ।
यही आकर्षण आगे चलकर उनके फ़िल्म निर्माण का एक अहम हिस्सा बना।
उनकी फ़िल्मों में दिखाई देने वाला अनुशासन, रणनीति और देश के प्रति सम्मान उसी अधूरे सपने की झलक है, जिसने उनके सिनेमा को एक अलग पहचान दी।
फिल्म उद्योग में प्रवेश और लेखन करियर
सेना में भर्ती होने की योजना पूरी न हो पाने के बाद आदित्य धर ने अपने जीवन की दिशा बदली और दिल्ली में रंगमंच की ओर कदम बढ़ाया।
उन्होंने दिल्ली म्यूजिक थिएटर जैसे थिएटर समूहों के साथ काम किया, जहां उन्हें अभिनय, लेखन और मंच पर कहानी कहने की बुनियादी समझ मिली।
यही समय था जब उन्होंने यह जाना कि किसी कहानी को दर्शकों तक कैसे पहुँचाया जाता है।
फिल्मों में करियर बनाने के सपने के साथ आदित्य धर 2000 के दशक के मध्य में मुंबई पहुंचे, लेकिन शुरुआती साल किसी भी तरह से आसान या चमक-दमक भरे नहीं थे।
मुंबई में उन्होंने संघर्ष के कठिन दौर का सामना किया, जहाँ रोज़मर्रा के खर्च चलाना भी एक चुनौती था।
इस दौरान उन्होंने रेडियो जॉकी के रूप में काम किया, ताकि आर्थिक रूप से खुद को संभाल सकें। साथ ही वे लगातार लिखते रहे।
उन्होंने काबुल एक्सप्रेस जैसी फ़िल्मों के लिए गीत लिखे और आक्रोश (2010) और तेज़ (2012) जैसी फ़िल्मों में संवाद लेखक के रूप में योगदान दिया।
यह दौर लगभग एक दशक से भी ज़्यादा चला, जिसमें वे एक संघर्षरत फ़िल्मकार की तरह जीवन जीते रहे, सीखते रहे, खुद को बेहतर बनाते रहे और सही मौके का इंतज़ार करते रहे।
उनकी शुरुआती परियोजनाओं में से किसी ने भी उन्हें तुरंत पहचान या लोकप्रियता नहीं दिलाई। न ही उनका नाम सुर्खियों में आया, लेकिन इन अनुभवों ने उन्हें सिनेमा की असली समझ दी।
हर छोटा काम, हर असफलता और हर संघर्ष ने उन्हें यह सिखाया कि एक मजबूत कहानी कैसे लिखी जाती है।
‘उरी द सर्जिकल स्ट्राइक’ से मिली ऐतिहासिक सफलता
धर की पहली निर्देशित फिल्म वास्तव में ‘रात बाकी’ नामक एक रोमांटिक कॉमेडी थी, जिसमें फवाद खान मुख्य भूमिका में थे,
लेकिन 2016 के उरी आतंकी हमले के कारण बॉलीवुड में पाकिस्तानी कलाकारों पर प्रतिबंध लगा दिया गया और शूटिंग शुरू होने से कुछ ही दिन पहले इस परियोजना को रोक दिया गया।
हार मानने के बजाय, धर ने भारत के 2016 के वास्तविक सैन्य अभियान पर आधारित एक फिल्म बनाने का फैसला किया।
जनवरी 2019 में रिलीज हुई ‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’ तुरंत ही ब्लॉकबस्टर बन गई और इसने दुनिया भर में ₹3.5 बिलियन से अधिक की कमाई की।
इस फिल्म ने भारत को एक लोकप्रिय नारा भी दिया “जोश कैसा है?”
फ़िल्म की सफलता के साथ ही आदित्य धर को कई बड़े सम्मान मिले। उन्हें सर्वश्रेष्ठ निर्देशक के लिए राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार,
फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ नवोदित निर्देशक पुरस्कार और आईआईएफए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक पुरस्कार से नवाज़ा गया।
इस तरह ‘उरी’ ने न सिर्फ़ आदित्य धर के करियर को नई ऊंचाई दी, बल्कि उन्हें भारतीय सिनेमा के प्रमुख निर्देशकों की सूची में भी शामिल कर दिया।
एक्शन, रणनीति और सिनेमा की समझ
कार्रवाई को वास्तविक और भरोसेमंद बनाने की आदित्य धर की प्रतिबद्धता ही उन्हें अन्य निर्देशकों से अलग पहचान देती है। वे सिर्फ़ एक्शन दिखाने पर ज़ोर नहीं देते,
बल्कि इस बात पर ध्यान देते हैं कि सैन्य और स्पाई अभियानों की योजना कैसे बनाई जाती है, मुश्किल हालात में फैसले कैसे लिए जाते हैं और किसी मिशन में पूरी टीम एक साथ कैसे काम करती है।
उनकी फ़िल्मों की कहानी आमतौर पर धीमी और सधी हुई गति से आगे बढ़ती है। पहले हिस्से में वे किरदारों,
हालात और भावनात्मक व राजनीतिक दबाव को धीरे-धीरे मजबूत करते हैं। इसके बाद कहानी एक ऐसे मोड़ पर पहुँचती है, जहां अंत तेज़, रोमांचक और असरदार होता है।
आदित्य धर के सिनेमा में ध्वनि और संगीत की भी अहम भूमिका होती है। लयबद्ध बैकग्राउंड स्कोर और दमदार संवाद कहानी की ऊर्जा को बढ़ाते हैं और दर्शकों को फिल्म से जोड़े रखते हैं।
निजी जीवन और सार्वजनिक छवि
आदित्य धर ने 4 जून 2021 को अभिनेत्री यामी गौतम से शादी की। यह शादी हिमाचल प्रदेश में बेहद सादगी से हुई और इसे बॉलीवुड की सबसे सरल शादियों में से एक माना गया।
समारोह में केवल 20 करीबी मेहमान शामिल हुए थे और खास बात यह रही कि वहाँ कोई पेशेवर फोटोग्राफर भी मौजूद नहीं था।
इस शादी ने आदित्य धर के सरल और ज़मीन से जुड़े स्वभाव को साफ़ तौर पर दिखाया।
10 मई 2024 को इस दंपति के घर बेटे वेदाविद का जन्म हुआ, जिससे उनके निजी जीवन में एक नया अध्याय जुड़ गया।
कैमरे के पीछे आदित्य धर जानबूझकर लो-प्रोफ़ाइल और सादा जीवन जीना पसंद करते हैं।
वे लाइमलाइट से दूरी बनाए रखते हैं और काम के दौरान अपनी टीम के साथ सहज माहौल बनाना पसंद करते हैं।
स्क्रिप्ट सेशन के समय कलाकारों और सहयोगियों के साथ पारंपरिक कश्मीरी भोजन साझा करना उनकी पसंदीदा आदतों में से एक है।
हाल के कार्य और आगामी परियोजनाएं
आदित्य धर की दूसरी निर्देशित फ़िल्म, स्पाई थ्रिलर ‘धुरंधर’, वर्ष 2025 में रिलीज़ हुई और रिलीज़ होते ही इसने कई बॉक्स ऑफिस रिकॉर्ड तोड़ दिए।
यह फ़िल्म वैश्विक स्तर पर ₹1,000 करोड़ की कमाई का आंकड़ा पार करने वाली चौथी हिंदी फ़िल्म बनी।
इसके साथ ही, भारत में घरेलू बॉक्स ऑफिस पर इसने ‘पुष्पा 2: द रूल’ को पीछे छोड़ते हुए सबसे ज़्यादा कमाई करने वाली हिंदी फ़िल्म का दर्जा हासिल किया।
सिर्फ़ दो फ़िल्मों के साथ ही आदित्य धर ने एक नया रिकॉर्ड बना दिया।
वे ऐसे पहले भारतीय निर्देशक बन गए हैं, जिनकी पहली दो फ़िल्मों ने मिलकर घरेलू बॉक्स ऑफिस पर ₹1,000 करोड़ से अधिक का शुद्ध कलेक्शन किया है।
यह उपलब्धि उनके निर्देशन और दर्शकों के भरोसे को साफ़ तौर पर दिखाती है।
निर्देशन के साथ-साथ आदित्य धर ने निर्माण के क्षेत्र में भी मज़बूत कदम रखे हैं। उन्होंने अपने भाई लोकेश धर के साथ मिलकर बी62 स्टूडियोज़ (B62 Studios) की स्थापना की।
इस प्रोडक्शन हाउस के तहत उन्होंने ‘आर्टिकल 370’ (2024), ‘धूम धाम’ (2025) और ‘बारामूला’ (2025) जैसी फ़िल्मों का निर्माण किया है।
अब दर्शकों की नज़र उनकी अगली फ़िल्म ‘धुरंधर 2’ पर टिकी हुई है, जो 19 मार्च 2026 को रिलीज़ होने वाली है।
इस फ़िल्म में रणवीर सिंह, संजय दत्त और अर्जुन रामपाल एक बार फिर अहम भूमिकाओं में नज़र आएंगे।
इसके अलावा, आदित्य धर की लंबे समय से प्रतीक्षित और महत्वाकांक्षी परियोजना ‘द इमॉर्टल अश्वत्थामा’ पर भी काम सक्रिय रूप से आगे बढ़ रहा है,
जिसे लेकर दर्शकों में काफ़ी उत्सुकता है।
आदित्य धर से जुड़े अनजाने तथ्य
“हाउ इज द जोश ?” संवाद स्क्रिप्ट का हिस्सा नहीं था। धर ने इसे दिल्ली के एक थिएटर निर्देशक से लिया था और आखिरी समय में जोड़ा था,
उन्हें कभी कल्पना भी नहीं थी कि यह एक राष्ट्रीय मुहावरा बन जाएगा।
B62 स्टूडियोज का नाम उनके बचपन के घर के पते से लिया गया है।
वे नई प्रतिभाओं को मौका देने में विश्वास रखते हैं।
उनकी फ़िल्मों में दिखने वाला चिनार पत्ते का पेपरवेट उनकी कश्मीरी पहचान का प्रतीक है।
एक निर्देशक जो आधुनिक भारतीय सिनेमा को आकार दे रहे हैं
आदित्य धर की जीवनी मूल रूप से एक लंबी और कठिन यात्रा की कहानी है। उन्होंने एक दशक से अधिक समय गुमनाम रहकर लेखन,
शिक्षण और चुपचाप उन कौशलों को विकसित करने में बिताया, जो एक दिन भारतीय फिल्म निर्माण की एक नई शैली को परिभाषित करेंगे।
जब उनका समय आया, तो उन्होंने उसे व्यर्थ नहीं जाने दिया।
दिल्ली के एक ऐसे युवक से, जिसने सेना में जाने का सपना देखा था, लेकर एक ऐसे निर्देशक तक,
जिसने बड़े पर्दे पर युद्ध और जासूसी कहानियों को बताने के तरीके को फिर से परिभाषित किया है,
धर ने यह साबित कर दिया है कि शॉर्टकट से कहीं ज्यादा धैर्य और कौशल मायने रखते हैं।

