New Tax Slab: नए वित्त वर्ष 2026 की शुरुआत के साथ ही कई इनकम टैक्स नियमों में बदलाव किए गए हैं। ये बदलाव खासतौर पर मध्यम वर्गीय करदाताओं को राहत देने के लिए किए गए हैं। नई टैक्स व्यवस्था में 12 लाख रुपये तक की आय पर कोई टैक्स नहीं लगेगा, जबकि टैक्स स्लैब में भी संशोधन किया गया है। इसके अलावा, टीडीएस, टीसीएस और स्टार्टअप्स के लिए कर संबंधी नियमों में भी बड़े बदलाव हुए हैं
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12 लाख रुपये तक टैक्स छूट
New Tax Slab: पहले 7 लाख रुपये तक की सालाना आय पर छूट मिलती थी, जिसे अब बढ़ाकर 12 लाख रुपये कर दिया गया है। यानी 12 लाख रुपये तक की आय पर कोई टैक्स नहीं देना होगा। पहले, 12 लाख की आय पर करीब 80,000 रुपये का टैक्स देना पड़ता था, लेकिन अब यह पूरी तरह से टैक्स-फ्री होगी।
हालांकि, इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करना अनिवार्य रहेगा। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य करदाताओं को राहत देना और उनकी कर देनदारी को कम करना है।
नया इनकम टैक्स स्लैब
New Tax Slab: नई व्यवस्था के तहत इनकम टैक्स स्लैब में संशोधन किया गया है। अब सात अलग-अलग स्लैब के आधार पर टैक्स दरें तय की गई हैं—
नई व्यवस्था के तहत इनकम टैक्स स्लैब में संशोधन किया गया है। अब सात अलग-अलग स्लैब के आधार पर टैक्स दरें तय की गई हैं—
वार्षिक आय (रुपये) | टैक्स दर (%) |
---|---|
0-4 लाख | शून्य |
4-8 लाख | 5% |
8-12 लाख | 10% |
12-16 लाख | 15% |
16-20 लाख | 20% |
20-24 लाख | 25% |
24 लाख से अधिक | 30% |
New Tax Slab: पहले 3 लाख रुपये तक की आय टैक्स-फ्री थी, लेकिन अब यह बढ़कर 4 लाख रुपये हो गई है। साथ ही, 24 लाख रुपये से अधिक की आय पर अधिकतम 30% टैक्स लागू होगा, जो पहले 15 लाख रुपये से ऊपर लगता था।
पहले 3 लाख रुपये तक की आय टैक्स-फ्री थी, लेकिन अब यह बढ़कर 4 लाख रुपये हो गई है। साथ ही, 24 लाख रुपये से अधिक की आय पर अधिकतम 30% टैक्स लागू होगा, जो पहले 15 लाख रुपये से ऊपर लगता था।
स्टैंडर्ड डिडक्शन में राहत
New Tax Slab: नए नियमों के तहत, सैलरीड टैक्सपेयर्स को 75,000 रुपये तक स्टैंडर्ड डिडक्शन का लाभ मिलेगा। यानी कोई व्यक्ति 12 लाख रुपये की आय पर 75,000 रुपये घटाकर अपनी कुल टैक्सेबल इनकम 11.25 लाख रुपये कर सकता है।
- इसका सीधा फायदा यह होगा कि 12.75 लाख रुपये तक की इनकम टैक्स-फ्री हो सकती है।
टीडीएस में बदलाव
New Tax Slab: टैक्स डिडक्शन एट सोर्स (TDS) के नियमों में भी बदलाव किए गए हैं—
सीनियर सिटीजन के लिए बैंक ब्याज पर टीडीएस 50,000 रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर दिया गया है।
अन्य करदाताओं के लिए बैंक ब्याज पर टीडीएस अब 50,000 रुपये तक होगा।
डिविडेंड इनकम पर टीडीएस की सीमा 5,000 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये कर दी गई है।
किराये की आय पर टीडीएस की सीमा 2.4 लाख रुपये से बढ़ाकर 6 लाख रुपये सालाना कर दी गई है।
इससे खासतौर पर सीनियर सिटीजन और मकान मालिकों को फायदा होगा, जिससे किराये के बाजार को बढ़ावा मिलेगा।
टीसीएस नियमों में बदलाव
New Tax Slab: टैक्स कलेक्शन एट सोर्स (TCS) की सीमा भी बढ़ाई गई है।
अब बिना TCS के 10 लाख रुपये तक विदेश में भेज सकते हैं, जो पहले 7 लाख रुपये तक की सीमा थी।
विदेश में पढ़ाई, पारिवारिक खर्च या अन्य किसी कारण से पैसा भेजने वाले लोगों को इस नियम का फायदा मिलेगा।
बिजनेस करने वालों के लिए, अब 50 लाख रुपये से अधिक की बिक्री पर 0.1% टीसीएस काटने की जरूरत नहीं होगी।
अपडेटेड टैक्स रिटर्न (ITR-U) की समयसीमा बढ़ी
New Tax Slab: अब टैक्सपेयर्स के पास अपना अपडेटेड ITR फाइल करने के लिए 48 महीने (4 साल) का समय होगा, जो पहले सिर्फ 12 महीने था। इससे उन करदाताओं को राहत मिलेगी जो गलती से या किसी कारणवश सही समय पर रिटर्न दाखिल नहीं कर पाते थे।
स्टार्टअप्स को टैक्स में छूट
1 अप्रैल 2030 से पहले शुरू किए गए स्टार्टअप्स को दस में से तीन वर्षों के लिए 100% टैक्स छूट का लाभ मिलेगा। इस कदम से भारतीय अर्थव्यवस्था में स्टार्टअप्स और इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा।