6 राज्यों में SIR की डेडलाइन बढ़ाई: चुनाव आयोग ने छह राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की समयसीमा बढ़ाने का फैसला किया है।
इस विस्तार के तहत अब कई राज्यों में फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथियों में बदलाव किया गया है।
दिलचस्प बात यह है कि इस सूची में पश्चिम बंगाल शामिल नहीं है, जबकि वहां SIR को लेकर विपक्ष सबसे अधिक आक्रामक है।
आयोग का यह निर्णय राज्यों में जारी मतदाता सूची पुनरीक्षण को और सटीक बनाने के उद्देश्य से लिया गया है।
किन राज्यों में कितनी बढ़ी समयसीमा?
6 राज्यों में SIR की डेडलाइन बढ़ाई: चुनाव आयोग के अपडेट के अनुसार कई राज्यों में नई तारीखें इस प्रकार हैं—
तमिलनाडु और गुजरात
दोनों राज्यों में फॉर्म भरने की अंतिम तिथि अब 14 दिसंबर कर दी गई है। यहां ड्राफ्ट मतदाता सूची 19 दिसंबर को जारी होगी। आयोग ने कहा कि फील्ड वेरिफिकेशन अभी जारी है और विस्तारित तारीख राज्यों की मांग के बाद दी गई है।
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़
6 राज्यों में SIR की डेडलाइन बढ़ाई: इन राज्यों में SIR की अंतिम तिथि 18 दिसंबर तक रखी गई है। ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 23 दिसंबर को प्रकाशित होगी। दोनों राज्यों में ब्लॉक स्तर पर गहन सत्यापन अभी जारी है।
उत्तर प्रदेश
6 राज्यों में SIR की डेडलाइन बढ़ाई: देश के सबसे बड़े राज्य यूपी में चुनाव आयोग ने समयसीमा बढ़ाकर 26 दिसंबर कर दी है। ड्राफ्ट रोल 31 दिसंबर को पब्लिश किया जाएगा। यूपी में मतदाता संख्या अधिक होने के कारण पुनरीक्षण प्रक्रिया बड़े पैमाने पर चल रही है।
किन राज्यों में आज ही खत्म हो रही है SIR की समयसीमा?
कुछ राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में समयसीमा 11 दिसंबर 2025 यानी आज ही समाप्त हो रही है। इनमें शामिल हैं—
- गोवा
- गुजरात
- लक्षद्वीप
- राजस्थान
- पश्चिम बंगाल
इन सभी राज्यों में ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल 16 दिसंबर 2025 को जारी किया जाएगा।
उधर, केरल में SIR का शेड्यूल पहले ही बदला जा चुका है। यहां प्रक्रिया 18 दिसंबर तक चलेगी और ड्राफ्ट सूची 23 दिसंबर को पब्लिश होगी।
ECI का नया निर्देश: ASD लिस्ट राजनीतिक दलों से साझा होगी
6 राज्यों में SIR की डेडलाइन बढ़ाई: चुनाव आयोग ने 10 दिसंबर को सभी 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। आयोग ने कहा है कि बूथ स्तर पर तैयार होने वाली ASD (Absent, Shifted, Dead/Duplicate) सूची अब राजनीतिक दलों के बूथ स्तर एजेंटों को भी दी जाएगी।
ECI ने स्पष्ट किया कि जिन मतदाताओं से 3 या उससे ज्यादा बार संपर्क नहीं हो पाया, या जिनका स्थानांतरण, मृत्यु या डुप्लीकेशन संदिग्ध है, उन्हें ASD श्रेणी में रखा गया है। इनकी स्थिति की पुन: पुष्टि आवश्यक है ताकि अंतिम मतदाता सूची जारी होने से पहले त्रुटियों को सुधारा जा सके।
बूथ स्तर पर अलग-अलग एजेंसियों की संयुक्त बैठकें
ECI के निर्देश के बाद अब हर बूथ पर BLO (Booth Level Officers) राजनीतिक दलों के बूथ एजेंटों के साथ बैठक करेंगे। इन बैठकों में—
- ASD लिस्ट की एंट्रीज़ की जांच,
- घर-घर सत्यापन,
- और त्रुटियों के सुधार की प्रक्रिया तेज की जाएगी।
चुनाव आयोग ने बताया कि इस प्रक्रिया में करीब 5 लाख BLO और 12 लाख से अधिक बूथ एजेंट भाग लेंगे। यह देशभर में SIR के दौरान अब तक की सबसे बड़ी समन्वित कार्रवाई मानी जा रही है।
क्यों जरूरी है यह पूरा पुनरीक्षण?
6 राज्यों में SIR की डेडलाइन बढ़ाई: मतदाता सूचियों की शुद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए SIR प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण है। कई राज्यों में—
- पलायन अधिक है,
- शहरी क्षेत्रों में एड्रेस बदलने की घटनाएँ ज्यादा हैं,
- और कुछ जगहों पर राजनीतिक दल मतदाता सूची पर लगातार सवाल उठाते रहे हैं।
ऐसे में ASD जैसी श्रेणियों का पुन: सत्यापन लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता को मजबूत करता है। चुनाव आयोग का मानना है कि यदि यह कदम अभी न उठाया गया तो ड्राफ्ट और फाइनल रोल में भारी त्रुटियाँ रह सकती हैं।
6 राज्यों में SIR की डेडलाइन बढ़ाई: चुनाव आयोग का यह फैसला समयबद्ध चुनाव की तैयारी और सटीक मतदाता सूची बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
SIR की समयसीमा बढ़ने से लाखों लोग फॉर्म जमा कर पाएंगे और राज्यों को भी सत्यापन का अतिरिक्त समय मिल जाएगा।
बूथ स्तर पर ASD लिस्ट राजनीतिक दलों के साथ साझा करने का निर्णय भी पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में अहम है।

