संसद हमले की 24वीं बरसी: आज संसद पर हुए आतंकी हमले की 24वीं बरसी है। यह वही दिन है जब देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को चुनौती देने की नापाक कोशिश की गई थी, लेकिन हमारे सुरक्षा बलों के अदम्य साहस और बलिदान ने उस साजिश को नाकाम कर दिया।
इस अवसर पर उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्रियों सहित देश के कई वरिष्ठ नेताओं ने संसद भवन में शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित की।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी और अन्य सांसदों ने भी शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित की।
सोशल मीडिया पोस्ट में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि राष्ट्र उन नायकों के साहस, वीरता और बलिदान को नमन करता है, जिनकी कर्तव्यनिष्ठा भारत की राष्ट्रीय भावना को निरंतर मार्गदर्शन देती है।
आतंकवादियों का अचानक हमला
संसद हमले की 24वीं बरसी: 13 दिसंबर 2001 को सुबह लगभग 11:30 बजे एक सफेद एंबेसडर कार संसद भवन के गेट नंबर 12 से भीतर दाखिल हुई। कार की गतिविधियों पर संदेह होते ही सुरक्षाकर्मी उसके पीछे दौड़े।
इसी बीच वह कार उपराष्ट्रपति की खड़ी गाड़ी से टकरा गई। टक्कर के तुरंत बाद कार में सवार आतंकियों ने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी।
आतंकियों के पास एके-47 समेत कई अत्याधुनिक हथियार थे, जिससे पूरा संसद परिसर गोलियों की गूंज से थर्रा उठा। अचानक हुए इस हमले से संसद भवन में अफरा-तफरी मच गई।
सुरक्षा एजेंसियों ने तत्काल अलर्ट जारी किया और सीआरपीएफ की बटालियन ने मोर्चा संभाल लिया। उस समय संसद भवन के भीतर गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी सहित कई वरिष्ठ नेता, सांसद और पत्रकार मौजूद थे।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सभी को सुरक्षित स्थानों पर रहने के निर्देश दिए गए और पूरे संसद परिसर को पूरी तरह सील कर दिया गया।
लोकतंत्र की रक्षा के लिए 9 जांबाजों ने दी शहादत
संसद हमले की 24वीं बरसी: इस हमले के दौरान एक आतंकी ने गेट नंबर 1 से संसद भवन के भीतर घुसने का प्रयास किया, लेकिन सुरक्षा बलों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उसे वहीं मार गिराया।
इसके बाद चार अन्य आतंकी गेट नंबर 4 की ओर बढ़े, जहां हुई मुठभेड़ में तीन आतंकियों को ढेर कर दिया गया।
अंतिम आतंकी गेट नंबर 5 की ओर भागने की कोशिश कर रहा था, लेकिन वह भी सुरक्षा बलों की गोलियों का शिकार हो गया। यह मुठभेड़ सुबह 11:30 बजे शुरू होकर शाम करीब 4 बजे तक चली।
सुरक्षाकर्मियों की असाधारण बहादुरी और तत्परता के कारण उस दिन संसद भवन के भीतर मौजूद सैकड़ों लोगों की जान बचाई जा सकी।
हालांकि, इस हमले में दिल्ली पुलिस के पांच जांबाज जवान, सीआरपीएफ की एक महिला सुरक्षाकर्मी, राज्यसभा सचिवालय के दो कर्मचारी और एक माली शहीद हो गए।
उनका बलिदान देश की सुरक्षा व्यवस्था के इतिहास में अमिट रूप से दर्ज है।
पीएम मोदी व सीएम योगी ने किया बहादुरों को नमन
संसद हमले की 24वीं बरसी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज के दिन हमारा देश 2001 में संसद पर हुए भयानक हमले में अपने प्राण न्योछावर करने वाले शहीदों को याद करता है।
इस संकटपूर्ण समय में उनका साहस, सतर्कता और कर्तव्यनिष्ठा सराहनीय थी। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा उनके सर्वोच्च बलिदान के लिए आभारी रहेगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक पोस्ट में कहा कि लोकतंत्र के मंदिर, भारतीय संसद भवन ने वर्ष 2001 में ठीक इसी दिन एक कायरतापूर्ण आतंकवादी हमले को देखा, जो राष्ट्र की संप्रभुता, गरिमा और जनता की शक्ति पर एक क्रूर प्रहार था।
संसद और राष्ट्र की गरिमा की रक्षा के लिए इस हृदयविदारक घटना में प्राणों की आहुति देने वाले अमर नायकों को मेरा विनम्र नमन। राष्ट्र सदा उनका कृतज्ञ रहेगा।
देश के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने दी श्रद्धांजलि
संसद हमले की 24वीं बरसी: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि वर्ष 2001 में संसद पर हुए कायराना हमले के दौरान सुरक्षाबलों ने असाधारण वीरता का परिचय देते हुए आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब दिया।
उन्होंने कहा कि जवानों का यह बलिदान आतंकवाद के खिलाफ भारत के अटूट संकल्प का प्रतीक है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शहीद सुरक्षाकर्मियों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने लोकतंत्र की आत्मा की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनका साहस और कर्तव्य के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी संसद हमले में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि देश उनके बलिदान को कभी नहीं भूलेगा और उनसे देशप्रेम की प्रेरणा लेता रहेगा।
संसद हमले की बरसी पर पूरा देश एकजुट होकर उन वीर सपूतों को नमन कर रहा है, जिनकी शहादत ने भारतीय लोकतंत्र को सुरक्षित रखा।
परिवार ने कहा, शहादत पर हमें गर्व है
संसद हमले की 24वीं बरसी: 2001 के संसद हमले की बरसी पर शहीद सुरक्षाकर्मी के परिवार ने देशभक्ति की भावनाएं व्यक्त की हैं।
शहीद के परिवार का कहना है कि उन्हें फोन आया था कि संसद में आतंकवादी हमला हुआ है और उन्हें गोली लगी है, लेकिन उनकी सटीक स्थिति की जानकारी नहीं थी।
परिवार ने कहा कि उन्हें गर्व है कि उन्होंने देश की संसद की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर किए।
आज, 24 वर्षों बाद भी शहीद जवानों की शहादत हमारे दिलों में जीवित है। उनका बलिदान हमें यह याद दिलाता है कि लोकतंत्र की रक्षा केवल संस्थाओं से नहीं, बल्कि उन वीरों से होती है जो देश के लिए अपना सब कुछ न्योछावर करने को तैयार रहते हैं।

