ईरानी डॉक्टर का दावा: ईरान में सरकार के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन अब बहुत बड़े आंदोलन में बदल चुके हैं। राजधानी तेहरान सहित देश के सभी 31 प्रांतों में लोग सड़कों पर उतर आए हैं।
प्रदर्शनकारी इस्लामी शासन को हटाने की मांग कर रहे हैं और “आजादी चाहिए” और “तानाशाह मुर्दाबाद” जैसे नारे लगा रहे हैं। हालात दिन-ब-दिन और गंभीर होते जा रहे हैं।
ईरानी डॉक्टर का दावा: 217 प्रदर्शनकारियों की मौत
तेहरान के एक डॉक्टर ने अपनी पहचान छिपाकर टाइम मैगजीन को बताया कि राजधानी के सिर्फ छह अस्पतालों में अब तक कम से कम 217 प्रदर्शनकारियों की मौत दर्ज की गई है।
डॉक्टर के अनुसार इनमें से ज्यादातर लोगों की मौत गोली लगने से हुई है। अस्पतालों में घायल लोगों की संख्या भी बहुत ज्यादा है, लेकिन सरकार कोई सही जानकारी सामने नहीं ला रही है।
प्रदर्शन शुरू होने के बाद से ईरानी सरकार ने पूरे देश में इंटरनेट और मोबाइल कॉल सेवाएं बंद कर दी हैं।
इससे लोग आपस में संपर्क नहीं कर पा रहे हैं और बाहर की दुनिया तक सही खबरें नहीं पहुंच पा रही हैं। सोशल मीडिया पर भी सख्त रोक लगा दी गई है।
सरकार का मकसद है कि प्रदर्शनकारियों की आवाज दबाई जा सके।
30 प्रदर्शनकारियों को गोली लगी
अमेरिका में रह रहे निर्वासित नेता किंग रजा पहलवी ने हाल ही में ईरानी जनता से अपील की थी कि वे इस्लामी शासन के खिलाफ एकजुट हों।
उनकी अपील के बाद प्रदर्शनों में और तेजी आ गई है। कई शहरों में हजारों लोग सड़कों पर उतरे और सरकारी इमारतों के सामने विरोध जताया।
तेहरान के उत्तरी इलाके में एक पुलिस स्टेशन के बाहर सुरक्षाबलों ने मशीनगन से फायरिंग की।
इस घटना में कम से कम 30 प्रदर्शनकारियों को गोली लगी, जिनमें कई लोगों की मौत हो गई। शुक्रवार को अस्पतालों से शव हटाए गए, जिससे पूरे शहर में डर का माहौल बन गया।
कुछ प्रदर्शनकारियों ने तेहरान की अल-रसूल मस्जिद में आग लगाने की कोशिश भी की।
सरकार ने इसे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कदम बताया है। वहीं प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे किसी धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि सरकार के खिलाफ विरोध कर रहे हैं।
तेहरान के सरकारी वकील ने चेतावनी दी
मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज एजेंसी के अनुसार अब तक कम से कम 63 लोगों की मौत हुई है, जिनमें 49 आम नागरिक हैं।
मानवाधिकार संगठनों द्वारा बताए गए आंकड़े डॉक्टर के दावे से कम हैं। इसका कारण यह बताया जा रहा है कि सरकार मीडिया को नियंत्रित कर रही है और विदेशी पत्रकारों को देश में काम करने की इजाजत नहीं है।
तेहरान के सरकारी वकील ने चेतावनी दी है कि प्रदर्शन करने वालों को मौत की सजा तक दी जा सकती है।
वहीं इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के एक अधिकारी ने माता-पिता से कहा है कि वे अपने बच्चों को प्रदर्शनों से दूर रखें, ताकि उन्हें नुकसान न पहुंचे।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ईरान पर दबाव बढ़ रहा है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर प्रदर्शनकारियों की हत्या जारी रही तो ईरान को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
फिलहाल ईरान में हालात बेहद तनावपूर्ण हैं। लोग बदलाव चाहते हैं, जबकि सरकार किसी भी तरह सत्ता बनाए रखना चाहती है।
आने वाले दिनों में यह आंदोलन क्या रूप लेगा, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।

