Thursday, January 29, 2026

15 August: जब भारत और पाकिस्तान एक ही दिन आजाद हुए तो इनके स्वंतंत्रता दिवस अलग क्यों है? जानें इसके पीछे की वजह

15 August: भारत और पकिस्तान आजादी से पहले एक हुआ करते थे अगर सीधी भाषा में कहें तो अंग्रेजों के गुलाम हुआ करते थे। इस गुलामी से निजात पाने के लिए एक कड़ा संघर्ष करना पड़ा है। लेकिन जैसे ही अंग्रेजों की गुलामी से आजादी मिली भारत के साथ पाकिस्तान का भी जन्म हुआ। लेकिन सवाल ये है कि दोनों देश आधिकारिक तौर पर 15 अगस्त, 1947 में आजाद हुए फिर भी इनके स्वंत्रता दिवस अलग क्यों है। आइये जानते हैं।

भारत और पाकिस्तान को आजाद हुए 78 साल पूरे हो गए हैं। पाकिस्तान आज यानि 14 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस मना रहा है वहीं भारत कल यानी 15 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाएगा। अगस्त, 1947 में ब्रिटिश शासकों ने भारत को दो स्वतंत्र देश भारत और पाकिस्तान में बंटवारा किया था। 18 जुलाई, 1947 में स्वतंत्रता अधिनियम के तहत भारत और पाकिस्तान नाम के दो देशों को जन्म दिया। इस बिल में कहा गया कि 15 अगस्त को भारत में दो इंडिपेंडेंट डोमिनियन स्थापित किए जाएंगे, जिनको भारत और पाकिस्तान के नाम से पूरी दुनिया में जाना जायेगा। ऐसे में ध्यान देने वाली बात ये है कि जब दोनों देशों के स्थापना एक साथ हुई तो इनके स्वंत्रता दिवस अलग-अलग दिन क्यों आते हैं।

आधिकारिक तौर पर दोनों देशों का स्वंत्रता दिवस 15 अगस्त ही होना चाहिए

एक रिपोर्ट में बताया गया है कि 1947 में तो भारत और पाकिस्तान दोनों ही देशों का स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त ही था। लेकिन पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना ने पाकिस्तान की स्थापना होने के बाद अपने ऐतिहासिक रेडियो शो में कहा था कि 15 अगस्त स्वतंत्र स्टेट पाकिस्तान का जन्मदिन है। पाकिस्तान के अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट में भी बताया गया है कि जिन्ना और पाकिस्तान कैबिनेट ने 15 अगस्त, 1947 के दिन ही शपथ ली थी। जुलाई, 1948 पाकिस्तान का पहला स्मारक डाक टिकट जारी किया गया। उस डाक टिकट में भी 15 अगस्त 1947 को देश के स्वतंत्रता दिवस के रूप में लिखवाया गया था। पाकिस्तान के पीएम रहे चौधरी मुहम्मद अली ने अपनी किताब द इमर्जेंस ऑफ पाकिस्तान में 15 अगस्त को ही पाकिस्तान की स्वतंत्रता का दिन लिखा था।

ऐसे हुए भारत-पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस अलग

दरअसल हुआ ये था कि वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन को 15 अगस्त की आधी रात को भारत और पाकिस्तान दोनों की सत्ता को हस्तांतरित करना था लेकिन उनके लिए एक ही समय पर दिल्ली और कराची दोनों जगह रहना संभव नहीं था। इसलिए पहले माउंटबेटन ने 14 अगस्त को कराची में पाकिस्तान को सत्ता हस्तांतरित की और फिर उसके बाद वो नई दिल्ली पहुंचे। पाकिस्तानी इतिहासकार खुर्शीद कमाल अजीज अपनी किताब मर्डर ऑफ हिस्ट्री में लिखते हैं कि वायसराय को व्यक्तिगत रूप से नए देशों में सत्ता हस्तांतरित करनी पड़ी क्योंकि वह भारत में ब्रिटिश राज के अकेले प्रतिनिधि थे। लेकिन इसका मतलब यह तो नहीं है कि पाकिस्तान को 14 अगस्त को आजादी मिली थी। स्वतंत्रता अधिनियम में दो तारीखों का किसी भी तरह का कोई प्रावधान नहीं था। अगर आधिकारिक तौर पर देखा जाए तो पाकिस्तान को भी 15 अगस्त को ही अपनी आजादी का जश्न मानना चाहिए था लेकिन आजादी के एक साल बाद ही पाकिस्तान ने अपनी हिसाब से तारीख को 15 कि जगह 14 अगस्त कर दिया।

पाकिस्तान को अपनी एक अलग आइडेंटिटी बनानी थी

जिन्ना: मिथ एंड रियलिटी के लेखक यासर लतीफ हमदानी ने 2013 में पीटीआई को एक साक्षात्कार के दौरान बताया था कि जिन्ना स्वतंत्रता दिवस की तारीख नहीं बदल सकते थे क्योंकि वह अगस्त 1948 तक अपनी मृत्यु के बहुत करीब थे। लेकिन हमदानी ने ये माना कि पाकिस्तान एक नया राष्ट्र है तो उसे अपनी पहचान के लिए स्वतंत्रता की एक अलग तारीख चाहिए थे। ऐसे में इसे 14 तारीख को मनाने का फैसला लिया गया और 1948 से पाकिस्तान अब 14 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाता है।

 

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Muskaan Gupta
Muskaan Guptahttps://reportbharathindi.com/
मुस्कान डिजिटल जर्नलिस्ट / कंटेंट क्रिएटर मुस्कान एक डिजिटल जर्नलिस्ट और कंटेंट क्रिएटर हैं, जो न्यूज़ और करंट अफेयर्स की रिपोर्टिंग में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 2 साल का अनुभव है। इस दौरान उन्होंने राजनीति, सामाजिक मुद्दे, प्रशासन, क्राइम, धर्म, फैक्ट चेक और रिसर्च बेस्ड स्टोरीज़ पर लगातार काम किया है। मुस्कान ने जमीनी रिपोर्टिंग के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए प्रभावशाली कंटेंट तैयार किया है। उन्होंने दिल्ली विधानसभा चुनाव और अन्य राजनीतिक घटनाक्रमों की कवरेज की है और जनता की राय को प्राथमिकता देते हुए रिपोर्टिंग की है। वर्तमान में वह डिजिटल मीडिया के लिए न्यूज़ स्टोरीज़, वीडियो स्क्रिप्ट्स और विश्लेषणात्मक कंटेंट पर काम कर रही हैं। इसके साथ ही वे इंटरव्यू, फील्ड रिपोर्टिंग और सोशल मीडिया जर्नलिज़्म में भी दक्ष हैं। मुस्कान का फोकस तथ्यात्मक, प्रभावशाली और जनहित से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने लाने पर रहता है।
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