वेनेजुएला संकट और वैश्विक तेल बाजार: दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला इस समय अपने इतिहास के सबसे गंभीर राजनीतिक और आर्थिक संकटों में से एक से गुजर रहा है।
दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार रखने वाले इस देश पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ने सिर्फ लैटिन अमेरिका ही नहीं, बल्कि पूरी वैश्विक व्यवस्था को झकझोर दिया है।
इसका असर आने वाले समय में वैश्विक तेल बाजार, भू-राजनीति और भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर साफ तौर पर देखने को मिल सकता है।
अमेरिकी हमले के बाद बदला माहौल
2026 की शुरुआत में वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई अनिश्चितता पैदा कर दी है।
पहले से ही प्रतिबंधों, महंगाई और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहे वेनेजुएला के लिए यह स्थिति और जटिल हो गई है।
अमेरिका की इस कार्रवाई को कई विशेषज्ञ तेल संसाधनों और रणनीतिक नियंत्रण से जोड़कर देख रहे हैं।
ऐसे में सवाल यह है कि अगर वेनेजुएला में सत्ता संतुलन बदलता है, तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर पड़ेगा।
शेयर बाजार में दिखा असर
इस घटनाक्रम का असर भारत के शेयर बाजार में भी तुरंत नजर आया।
उम्मीद जताई जा रही है कि अगर भविष्य में वेनेजुएला दोबारा वैश्विक तेल बाजार में मजबूती से लौटता है और विदेशी निवेश के रास्ते खुलते हैं, तो भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों को फायदा हो सकता है।
इसी उम्मीद के चलते रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर में करीब एक प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह 52 हफ्तों के उच्चतम स्तर 1,611.80 रुपये तक पहुंच गया।
इससे कंपनी का बाजार पूंजीकरण लगभग 22 लाख करोड़ रुपये हो गया।
तेल और गैस सेक्टर में मजबूती
रिलायंस के अलावा तेल एवं गैस क्षेत्र की अन्य कंपनियों में भी तेजी देखी गई। हिंदुस्तान पेट्रोलियम, ओएनजीसी, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन और ऑयल इंडिया जैसे शेयरों में इंट्रा-डे ट्रेडिंग के दौरान मजबूती रही।
यह साफ संकेत है कि बाजार वेनेजुएला संकट को लंबे समय में तेल आपूर्ति के नए अवसर के रूप में देख रहा है।
विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं?
जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी.के. विजयकुमार का मानना है कि वेनेजुएला पर अमेरिकी हमला बड़े भू-राजनीतिक बदलावों का संकेत देता है।
उनके अनुसार, इससे वैश्विक अस्थिरता बढ़ सकती है—ईरान में विरोध प्रदर्शन तेज हो सकते हैं, रूस-यूक्रेन युद्ध लंबा खिंच सकता है और चीन ताइवान को लेकर ज्यादा आक्रामक रुख अपना सकता है।
हालांकि, वे यह भी मानते हैं कि लंबे समय में भारत को तेल कीमतों में राहत मिल सकती है।
वैश्विक राजनीति और तेल की चाल
वरिष्ठ पत्रकार रुमान हाशमी के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जिस तरह रूस से तेल आयात को लेकर भारत पर दबाव बना रहे हैं और अब वेनेजुएला में सीधा हस्तक्षेप कर रहे हैं,
उससे वैश्विक तेल व्यापार की दिशा बदल सकती है। उनका कहना है कि जैसे इराक में सत्ता परिवर्तन के बाद वहां की सरकार अमेरिकी प्रभाव में आ गई थी, वैसा ही परिदृश्य वेनेजुएला में भी बन सकता है।
भारत के लिए क्या मायने?
भारत के लिए वेनेजुएला हमेशा से ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से अहम रहा है। अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते 2021-22 में दोनों देशों के बीच तेल व्यापार में गिरावट आई थी,
लेकिन 2023-24 में इसमें फिर तेजी देखने को मिली। इस दौरान भारत का वेनेजुएला से पेट्रोलियम आयात बढ़कर करीब 1 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया।
दिसंबर 2023 में भारत कुछ समय के लिए वेनेजुएला का सबसे बड़ा कच्चा तेल खरीदार भी बना था, हालांकि फिलहाल चीन इस सूची में शीर्ष पर है।

