Thursday, March 12, 2026

UP & Uttarakhand: भोले के भक्तों को बेचना है खाना, तो जरूरी है कागज दिखाना! FSSAI का सर्टिफिकेट रखना जरूरी

Supreme Court ban on order to write names of shopkeepers: सुप्रीम कोर्ट में सावन माह के पहले सोमवार (22 जुलाई, 2024) को एक गंभीर मामला गया। मामला सावन में शिव अभिषेक के लिए गंगाजल लाने वाले कांवड़ियों से जुड़ा था। सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने याचिका लगाई थी कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कांवड़ रूट पर दुकानदारों को नाम दिखाने का आदेश ठीक नहीं है। कोर्ट में भी इस मामले को तुरंत सुना गया।

कोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के इस आदेश को रोक दिया जाए, भले ही अंतरिम तौर पर रोका जाए। कोर्ट ने कहा कि यूपी और उत्तराखंड में कांवड़ियों वाले रास्ते पर कोई भी दुकान लगाए, उसका नाम पता नहीं चलना चाहिए। कोर्ट ने अपनी कलम से यह भी लिखा कि पुलिस ऐसा करने के लिए किसी को मजबूर ना करे।

लेना पड़ेगा FSSAI का सर्टिफिकेट लेना

कोर्ट ने बताया कि 2006 में भारत खाद्य सुरक्षा के लिए एक कानून लाया गया था। इसका नाम फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट था। इस कानून में कहा गया कि कोई ढाबा, रेस्टोरेंट या होटल जो खाने के नाम पर कुछ भी बेचता हो, उसे FSSAI से सर्टिफिकेट लेना पड़ेगा। लेने के बाद इसे दुकान पर साफ़ अक्षरों में दिखाना भी पड़ेगा। इस सर्टिफिकेट में दुकानदार का नाम चाहे अब्दुल हो अभिषेक, लिखा होना चाहिए और साथ ही उसका पता और क्या बेचता है, यह सब बताना पड़ेगा।

सरकारें दे सकती हैं कागज दिखाने का आदेश

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि नाम दिखने पर रोक लगाई जा रही है, लेकिन कागज दिखाने पर कोई रोक नहीं है। कोर्ट ने कहा कि सरकारें सभी दुकानदारों को कागज दिखाने का आदेश दे सकती हैं। कोर्ट ने कहा कि पुलिस वाले डंडे के जोर से दुकानदारों को नाम छाती पर लटकाने को ना कहे, लेकिन यूपी सरकार कानून के रास्ते पर चले।

स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट का भी दिया कोर्ट ने हवाला

कोर्ट ने एक और कानून बताया। इसको स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट कहा जाता है। यह कानून 2014 में सरकार लाई थी। इसके तहत रेहड़ी पटरी वालों को एक सर्टिफिकेट दिया जाना था। चाहे कोई फल का ठेला हो या घर-घर जाकर सब्जी बेचने वाले, इन सबको नाम और क्या बेचते हैं ये बताते हुए सर्टिफिकेट में जानकारी देनी होगी। इसको मांगे जाने पर दिखाना भी होगा।
अब यदि कोई भले ही नाम ना बताए, कागज तो दिखाना ही पड़ेगा और जरूर दिखाना पड़ेगा। कांवड़ रूट के होटल-ढाबे पर अगर अब भोले के भक्त किसी से सर्टिफिकेट माँग बैठें तो फिर सिंघवी किस अदालत का रुख करेंगे। सुप्रीम कोर्ट का कर नहीं सकते क्योंकि उसी ने कहा है कि कागज़ तो दिखाना पड़ेगा।

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