Thursday, January 29, 2026

बढ़ता खतरा: एंटीबायोटिक का गलत इस्तेमाल और हमारी जिम्मेदारी

बढ़ता खतरा: पिछले कुछ वर्षों में बीमारियों के बढ़ते मामलों के साथ एंटीबायोटिक का इस्तेमाल भी तेज़ी से बढ़ा है।

हल्का बुखार हो या गले में खराश—कई लोग तुरंत गोली खा लेते हैं। लेकिन यही जल्दबाज़ी अब एक बड़े खतरे का रूप ले रही है।

विशेषज्ञ लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि एंटीबायोटिक का गलत इस्तेमाल हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर रहा है और आम इंफेक्शन को भी जटिल बना रहा है।

बढ़ता खतरा: क्यों कम हो रही है एंटीबायोटिक्स की ताकत?

बढ़ता खतरा: दुनिया भर के डॉक्टर मान रहे हैं कि एंटीबायोटिक अब पहले जितनी असरदार नहीं रहीं।

विशेषज्ञ के अनुसार, एंटीबायोटिक्स को शुरू में “चमत्कारिक दवाएं” माना जाता था, लेकिन इनके बेवजह उपयोग ने बैक्टीरिया को खुद को बदलने का मौका दे दिया।

यही कारण है कि आज साधारण इंफेक्शन भी बेसिक दवाओं से ठीक नहीं हो पा रहे।

खुद से दवा लेना, अधूरा कोर्स छोड़ देना और गलत एंटीबायोटिक का इस्तेमाल—ये सभी कारण बैक्टीरिया को और ज्यादा शक्तिशाली बना रहे हैं।

एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस: WHO की गंभीर चेतावनी

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस को दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में शामिल किया है।

भारत में स्थिति और भी चिंताजनक है क्योंकि यहां बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं आसानी से मिल जाती हैं, और लोग अक्सर खुद ही इलाज करने लगते हैं।

यह सिर्फ एक व्यक्ति की समस्या नहीं, बल्कि पूरी कम्युनिटी के लिए खतरा है, क्योंकि दवा-रोधी बैक्टीरिया तेजी से फैलते हैं और रोक पाना मुश्किल हो जाता है।

कैसे बचें इस बढ़ते खतरे से?

खुद से एंटीबायोटिक लेना बंद करें

घर में बची हुई दवाओं का इस्तेमाल फायदेमंद नहीं, बल्कि नुकसानदायक है। साधारण वायरल बुखार, सर्दी या खांसी में अक्सर एंटीबायोटिक की जरूरत ही नहीं होती।

दवा का पूरा कोर्स पूरा करें

अधूरा कोर्स छोड़ना सबसे बड़ी गलती है। इससे बैक्टीरिया और मजबूत बन जाते हैं और आगे चलकर दवाएं उन पर असर नहीं करतीं।

डॉक्टर पर भरोसा करें, दवा की जिद न करें

बढ़ता खतरा: डॉक्टर यह जानते हैं कि किस स्थिति में एंटीबायोटिक जरूरी है।

यदि वे दवा नहीं दे रहे, तो उनकी सलाह को मानें। अनावश्यक एंटीबायोटिक लेने से फायदा नहीं, बल्कि भविष्य का जोखिम बढ़ता है।

यह बढ़ता हुआ एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि समाज की समस्या है।

समझदारी भरे छोटे कदम आने वाले बड़े संकट को रोक सकते हैं।

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Karnika Pandey
Karnika Pandeyhttps://reportbharathindi.com/
“This is Karnika Pandey, a Senior Journalist with over 3 years of experience in the media industry. She covers politics, lifestyle, entertainment, and compelling life stories with clarity and depth. Known for sharp analysis and impactful storytelling, she brings credibility, balance, and a strong editorial voice to every piece she writes.”
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