Wednesday, January 28, 2026

Siddharth Samvatsar: 2082 होगा सिद्धार्थ संवत्सर, बुद्ध होंगे इसके देवता, ये होगा फल

30 मार्च 2025 से विक्रम संवत् 2082 चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरू हो रहा है। यह संवत्सर 30 मार्च 2025 से 19 मार्च 2026 तक रहेगा। यह कलियुगाब्द 5126 होगा। संवत् 2082 का नाम ‘सिद्धार्थ‘ होगा। यह जानकारी जयपुर के जयादित्य पंचांग द्वारा दी गई है:-

Siddharth Samvatsar: सिद्धार्थ संवत्सर का स्वरूप

समुद्रतीरेसन्ध्यायां स्नात्वासूर्यसंमुखः ।
तिष्ठन् ध्यायन् जपन् वर्णाश्वतः सिद्धार्थिवत्सरः ।।

Siddharth Samvatsar: सन्ध्या के समय समुद्र के तट पर स्नान करके श्वेत वस्त्र धारण किए हुए सिद्धार्थ सम्वत्सर सूर्य के सम्मुख बैठकर ध्यानावस्था में जप करता है।

सिद्धार्थ सम्वत्सर के अधिष्ठातृ देव भगवान् बुद्ध होंगे जिनका रूप ऐसा होगा

सिद्धार्थिकृतनामानं बुद्धाकृतिमहं भजे।
नग्नं विरूपवपुषं स्त्रीप्रधर्षण कारणम् ।।

Siddharth Samvatsar: मैं सिद्धार्थ नाम धारण करने वाले बुद्ध की वंदना करता हूँ, जो अपनी साधना के परिणामस्वरूप सांसारिक वस्त्र-आभूषणों से मुक्त दिगम्बर अवस्था और अवधूत स्वरूप होने के कारण स्त्रियों के प्रधर्षण का कारण बनते हैं।

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सिद्धार्थ संवत्सर का फल

सिद्धार्थवत्सरे भूपा ज्ञानवैराग्यभागिनः। सन्त्यथापि च सस्यानि प्रचुराणि तथा गदाः ।।
सुघातलमखिलं यद्बहुविध धान्यर्घ सम्पूर्णम्। विविधामयसर्पभयं वर्षे सिद्धार्थसंज्ञे च ।।

Siddharth Samvatsar: सिद्धार्थ संवत्सर में राजा तथा प्रजा दोनों में ज्ञान वैराग्य का प्रकाश दिखाई देता है। सारी पृथ्वी विशेष अन्न से पूर्ण होकर सुंदर दिखती है। सिद्धार्थ संवत्सर में कृषियोग्य वर्षा होगी। धनधान्य से पृथ्वी परिपूर्ण रहेगी। जनता में प्रसन्नता होगी। पर अनेक प्रकार के रोग से लोग पीड़ित होंगे।

इस साल सिद्धार्थ संवत्सर में पैदा बच्चों में होंगे ये गुण

उदारचेता विलसत्प्रसादो रणांगणप्राप्तयशाः सुखी स्यात् ।
नरेन्द्रमंत्री बहुपूजितार्थः सिद्धार्थिजातो मनुजः समर्थः ।।
वेदशास्त्रप्रभावज्ञः शुद्धचित्तश्च कोमलः ।
सुकुमारो नृपैः पूज्यः कविः सिद्धार्थिजो नरः ।।

Siddharth Samvatsar: सिद्धार्थ संवत्सर में जन्म लेने वाला जातक उदार हृदय, प्रसन्नता और अनुग्रह से युक्त होता है, वह रणभूमि में यश प्राप्त करता है और सुखी होता है। वह राजा या मंत्री होता है, बहुत लोगों द्वारा पूजनीय और सर्वसमर्थ होता है। वह वेद और शास्त्रों के तत्त्व को जाननेवाला, शुद्ध हृदय, मृदु स्वभाव, सुकुमार शरीर, राजाओं से आदर पानेवाला और कवि होता है।

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Mudit
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लेखक 'भारतीय ज्ञान परंपरा' के अध्येता हैं। वे पिछले एक दशक से सार्वजनिक विमर्श पर विश्लेषणात्मक लेखन कर रहे हैं। सांस्कृतिक सन्दर्भ में समाज, राजनीति, विचारधारा, शिक्षा, धर्म और इतिहास के प्रमुख प्रश्नों के रिसर्च बेस्ड प्रस्तुतिकरण और समाधान में वे पारंगत हैं। वे 'द पैम्फलेट' में दो वर्ष कार्य कर चुके हैं। वे विषयों को केवल घटना के स्तर पर नहीं, बल्कि उनके ऐतिहासिक आधार, वैचारिक पृष्ठभूमि और दीर्घकालीन प्रभाव के स्तर पर परखते हैं। इसी कारण उनके राष्ट्रवादी लेख पाठक को नई दृष्टि और वैचारिक स्पष्टता भी देते हैं। इतिहास, धर्म और संस्कृति पर उनकी पकड़ व्यापक है। उनके प्रामाणिक लेख अनेक मौकों पर राष्ट्रीय विमर्श की दिशा में परिवर्तनकारी सिद्ध हुए हैं। उनका शोधपरक लेखन सार्वजनिक संवाद को अधिक तथ्यपरक और अर्थपूर्ण बनाने पर केंद्रित है।
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