शरीफ उस्मान हाड़ी: जुम्मे की नमाज़ के बाद हुआ खौफनाक हमला
बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार को हटाने में प्रमुख भूमिका निभाने वाले जिहादी इस्लामिक युवा नेता शरीफ उस्मान हाड़ी पर शुक्रवार दोपहर जानलेवा हमला किया गया।
जुम्मे की नमाज़ अदा कर लौट रहे शरीफ उस्मान हाड़ी को अज्ञात हमलावरों ने बेहद नजदीक से गोली मार दी, जिससे देश की राजनीति में हड़कंप मच गया।
इंकलाब मोंचो और सत्ता परिवर्तन में निर्णायक भूमिका
शरीफ उस्मान हाड़ी इंकलाब मोंचो का राष्ट्रीय प्रवक्ता है और जुलाई महीने में शेख हसीना सरकार को गिराने की पूरी रणनीति में उसकी भूमिका निर्णायक मानी जाती रही है।
सत्ता परिवर्तन के बाद से वह लगातार कट्टर इस्लामी एजेंडे को आगे बढ़ाता रहा।
भारत और हिंदुओं के खिलाफ खुली जिहादी आक्रामकता
सरकार गिरने के बाद शरीफ उस्मान हाड़ी भारत और हिंदुओं के खिलाफ लगातार हमलावर रहा। उसने कई बार भारत का नक्शा गलत तरीके से प्रस्तुत किया, कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा दिखाया और ग्रेटर बांग्लादेश की जिहादी योजना को बढ़ावा देता रहा।
आम चुनाव और ढाका से राजनीतिक दावेदारी
फरवरी में आम चुनावों की घोषणा के बाद शरीफ उस्मान ने ढाका के विजयनगर क्षेत्र से अपनी मजबूत दावेदारी पेश की थी।
जिहादी नेटवर्क में उसकी पकड़ और हालिया राजनीतिक महत्वाकांक्षा ने उसे कट्टरपंथी राजनीति का बड़ा चेहरा बना दिया था।
दिनदहाड़े बाइक सवार हमलावरों का हमला
शुक्रवार दोपहर करीब ढाई बजे बाइक पर सवार तीन अज्ञात हमलावरों ने रिक्शे से जा रहे शरीफ उस्मान को निशाना बनाया। बेहद नजदीक से कई गोलियां दागी गईं, जिनमें से एक दो गोलियां उसके दिमाग में फंस गईं, जिससे उसकी हालत नाजुक हो गई।
सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे, कोई सुराग नहीं
हमले के बाद आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज के जरिए अज्ञात हमलावरों की पहचान की जा रही है। हालांकि अब तक किसी भी आरोपी का कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा है। बांग्लादेश पुलिस जांच में जुटी हुई है।
ढाका मेडिकल कॉलेज में जिंदगी और मौत की जंग
गंभीर रूप से घायल शरीफ उस्मान हाड़ी को ढाका मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने सीपीआर देकर किसी तरह उसे रिवाइव किया।
उसके जबड़े से गोली निकाल ली गई है, लेकिन दिमाग में गोली अब भी फंसी हुई है और हालत बेहद गंभीर बनी हुई है।
ढाका विश्वविद्यालय और अस्पताल परिसर में तनाव
घटना के बाद ढाका विश्वविद्यालय परिसर में माहौल एक बार फिर गरमा गया। बड़ी संख्या में लोग अस्पताल परिसर में इकट्ठा हो गए। समर्थकों और जिहादी गुटों के बीच बेचैनी स्पष्ट देखी गई, जिसके चलते सुरक्षा बढ़ा दी गई।
पाकिस्तानी सोशल मीडिया का भारत विरोधी प्रोपेगेंडा
पाकिस्तान के कई सोशल मीडिया प्रोपेगेंडा चैनलों ने इस हमले को भारत से जोड़ने की कोशिश की। उन्होंने दावा किया कि यह वही पैटर्न है जैसा पाकिस्तान में पहले भारत पर आरोप लगाए जाते रहे हैं, जहां बाइक सवार हमलावर दिनदहाड़े हमला कर फरार हो जाते हैं।
पहले से था जान के खतरे का अंदेशा
शरीफ उस्मान हाड़ी काफी समय से तथाकथित जुलाई वारियर को सुरक्षा देने की बात सार्वजनिक मंचों से करता रहा था। इससे यह स्पष्ट होता है कि उसे पहले से अपनी जान पर खतरे का अंदाजा था और वह संभावित हमले को लेकर आशंकित था।
चुनाव से पहले जिहादी खेमे में डर और अनिश्चितता
यह अभी स्पष्ट नहीं है कि शरीफ उस्मान हाड़ी जीवित बचेगा या नहीं। लेकिन इस हमले ने चुनाव से पहले बांग्लादेश के जिहादी क्रांतिकारियों के मन में डर जरूर पैदा कर दिया है और कट्टरपंथी राजनीति की दिशा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

