राज्यसभा सांसद डॉक्टर राधामोहन दास अग्रवाल:
नो मोर नो, हमें बैठा दें नहीं जा रहा। आप बोले माननीय उपसभापति महोदय। बहुत ध्यान से मैं नासिर साहब को सुन रहा था। वो किसी शायर ने कहा है:
“तू इधर-उधर की ना बात कर, तू बता कि कारवां कहां लूटा?”
मैं बताऊंगा इन्हें कारवां कहां लूटा है। जरा मेरा भाषण समाप्त होने दीजिए। मैं ठीक से इन्हें एक्सपोज कर दूं। जी प्लीज, माननीय उपसभापति महोदय, अच्छा डिस्कशन आप चलने दें। मैं इनकी बातों को सुन रहा था और मैं इस सदन के संज्ञान में लाना चाहूंगा।
राधामोहन दास अग्रवाल: माननीय सदस्य सैयद नासिर हुसैन जब इस पारी राज्यसभा में चुने गए, जब इनके जीत की घोषणा हुई, मैं उस समय कर्नाटक के बोर में था। कर्नाटक की विधानसभा में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए गए थे। भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने विरोध किया, उनको पकड़ कर जेल में भेज दिया गया। भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता, जो इस पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे का विरोध कर रहे थे, उन्हें जेल में भेज दिया गया और इन्हें प्रसिद्ध किया गया।
(शोर-गुल के बीच) ये लोग बैठाइए इनको, इन्हें बैठाइए, ये बोल नहीं सकते। बैठ जाओ। आपस में बात नहीं, प्लीज। आप बैठो, बैठो, प्लीज। नहीं, प्लीज आपस में बात नहीं। आप चेयर को संबोधित करें। नहीं, चेयर को संबोधित करें। सभापति महोदय, प्लीज आप चेयर को संबोधित करें।
राधामोहन दास अग्रवाल: सभापति महोदय, आज देश के लिए गौरव का दिन है। देश के आम मुसलमान के लिए, देश के गरीब मुसलमान के लिए, देश के पसमंद…(संगीत) बीच में टोकाटोकी नहीं होगी, तो ये दोनों के लिए होना चाहिए। फिर प्लीज-प्लीज नसीर जी, प्लीज-प्लीज झूठ-बकवास शब्द उपसभापति महोदय नहीं जा रहा आप रिकॉर्ड पे नहीं। जरा बैठ जाइए।
राधामोहन दास अग्रवाल: उपसभापति महोदय, आज का दिन गरीब मुसलमानों के लिए, पसमंदा मुसलमानों के लिए, तलाकशुदा महिला बहनों के लिए, विधवा महिला बहनों के लिए, अनाथ बच्चों के लिए आज ऐतिहासिक दिन है। एक क्रांतिकारी परिवर्तन लाने जा रहा है। पूरी की पूरी इस गरीब मुस्लिम समाज की आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था में यह वक्फ अधिनियम क्रांतिकारी परिवर्तन लाने जा रहा है। मैं आभारी हूं माननीय मोदी जी का, जिन्होंने इस महान विधेयक को इस सदन में लाने का काम किया है।
राधामोहन दास अग्रवाल: अध्यक्ष महोदय, हम हिंदू हैं। हम लगातार अपने समाज में परिवर्तन की बात करते हैं। हमने लगातार अपने समाज की बुराइयों के विरुद्ध संघर्ष किया है। इतिहास हमारा गवाह है। हमारे यहां सती प्रथा होती थी, हमने सती प्रथा निषेध अधिनियम लाया। हमारे यहां बाल विवाह होता था, हमने बाल विवाह निषेध अधिनियम लाए। हमारे यहां विधवा विवाह नहीं होते थे, हमने विधवा विवाह अधिनियम लाया।
राधामोहन दास अग्रवाल: आश्चर्य की बात होती है, जब इस समाज की चर्चा होती है। आश्चर्य की बात होती है कि इन 75 सालों के अंदर एक बार भी मुस्लिम समाज के संशोधन को लेकर, सुधार को लेकर, एक गरीब मुसलमान की जीवन की बेहतरी को लेकर एक बार भी किसी प्रकार के सुधार आंदोलन को इस सदन में लाने का काम नहीं किया गया। आज यह पहली बार है और हमें गर्व है अपने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर, जिन्होंने इस मुस्लिम समाज के सुधार के एक ऐतिहासिक विधेयक को लाने का काम किया है।
राधामोहन दास अग्रवाल: 2014 में माननीय प्रधानमंत्री बने थे, उनके दृष्टि में कभी हिंदू और मुसलमान नहीं होता था। उनका सिर्फ एक नजरिया होता था, गरीब और अमीर। आप गौर कीजिएगा, यह सदन गौर करेगा। हम जनधन योजना लेकर के आए, 42% लाभार्थी मुस्लिम थे। हम प्रधानमंत्री आवास योजना लेकर के आए, 31% लाभार्थी मुस्लिम थे। हम उज्ज्वला योजना लेकर के आए, 37% लाभार्थी मुस्लिम थे। हम मुद्रा योजना लेकर के आए, 36% लाभार्थी मुस्लिम थे। हम स्किल इंडिया लेकर के आए, 22.7% लाभार्थी मुस्लिम थे। हमने प्रधानमंत्री एंप्लॉयमेंट गारंटी प्रोग्राम चलाया, अध्यक्ष महोदय, 70% अधिक मुसलमानों ने उस योजना का इस देश में लाभ लिया।
राधामोहन दास अग्रवाल: मेरे पार्टी की बैठक है, मुझे बताना नहीं चाहिए, लेकिन मैं कहूंगा। माननीय प्रधानमंत्री इसी बाल योगी सभागार में हम सारे सांसदों की बैठक ले रहे थे। उन्होंने क्या कहा हमसे, उन्होंने कहा—लोग कहते हैं कि मुसलमान भाजपा को वोट नहीं देते। आपको याद होगा मित्रों, बिल्कुल याद है। उन्होंने कहा, नहीं ये गलत है, देते हैं। और अगर मान लिया जाए कि नहीं देते हैं, तो इसका मतलब क्या है? क्या वो देश के नागरिक नहीं हैं? क्या उनके काम नहीं होने चाहिए? क्या उनका विकास का काम नहीं होना चाहिए?
राधामोहन दास अग्रवाल: उन्होंने सारे सांसदों को मीटिंग में कहा, अपने काम को करते समय कभी हिंदू और मुसलमान ना करना। विकास की धारा सारे समाज पर समान रूप से पहुंचाने की बात कही। उन्होंने दूसरी बात कही कि मैं पूरे देश को 2047 में विकसित भारत का सपना दिखाता हूं। क्या 20% मुसलमान अगर देश में पिछड़ा रह जाएगा, तो क्या भारत का विकास का सपना पूरा होगा? नहीं। भारत के विकास का मतलब है 20% मुसलमान के विकास की भी योजना बनानी है। यह कल्पना माननीय प्रधानमंत्री ही कर सकते हैं। आजादी के 75 सालों के अंदर इस कल्पना को लेकर इस देश में कोई नहीं आया था।
राधामोहन दास अग्रवाल: और तीसरी बात उन्होंने कही कि सरकार के स्तर पर, सरकार जो कुछ भी कर सकती है मुसलमानों के जीवन की बेहतरी के लिए, हम करने का प्रयास करेंगे। लेकिन मुस्लिम सामाजिक संस्थाओं की भी भूमिका होनी चाहिए। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की भूमिका होनी चाहिए। जमात उलेमा की भूमिका होनी चाहिए। वक्फ कमेटियों की संपत्तियां जो पड़ी हुई हैं, उनकी भी मुसलमानों की जिंदगी को बेहतर करने में भूमिका होनी चाहिए।
राधामोहन दास अग्रवाल: यह बात आज की नहीं थी। यह लोकसभा चुनाव के छह महीने पहले की बात है। अध्यक्ष महोदय, उस समय वह कल्पना लेकर चल रहे थे कि अगर हमने मुस्लिम वक्फ की संपत्तियों का बेहतर उपयोग कर लिया, पारदर्शी उपयोग कर लिया, उनकी आय को बढ़ा दिया, उनके ऊपर जो कब्जा करके लोग बैठे हुए हैं, उन कब्जेदारों को हटा दिया, तो स्वाभाविक रूप से जो अकूत संपत्ति पूरे भारत में मुसलमानों के पास आएगी, हम उसका इस्तेमाल गरीब मुसलमानों की शिक्षा के लिए, जीवन की बेहतरी के लिए करेंगे।
मुसलमान महिलाएं दर-दर भीख ना मांगें, अपनी इज्जत का समझौता ना करें, कोई बूढ़ी मुस्लिम औरत रात को खाली पेट सोने के लिए मजबूर ना हो, हम उसके लिए व्यवस्था करके लाएंगे।
राधामोहन दास अग्रवाल: अध्यक्ष महोदय, वक्फ अधिनियम की जो ही माननीय गृह मंत्री ने घोषणा की, पूरे देश में तूफान आ गया। आश्चर्य होता है, कानून की घोषणा भी नहीं हुई, कानून सामने भी नहीं आया, विरोध शुरू हो गया—तुम्हारी मस्जिदें कब्जा कर ली जाएंगी, तुम्हारे दरगाह कब्जा कर लिए जाएंगे, तुम्हारे कब्रिस्तान कब्जा कर लिए जाएंगे, तुम्हारे मदरसे कब्जा कर लिए जाएंगे।
राधामोहन दास अग्रवाल: मैं एक पत्रक लेकर के आया हूं अध्यक्ष महोदय। केरल और कर्नाटक की एक आतंकवादी संस्था है पीएफआई, माननीय गृह मंत्री को आभार प्रकट करता हूं कि उन्होंने इसे बैन किया। पीएफआई की एक दूसरी संस्था है एसडीपीआई। आज एसडीपीआई पूरे देश में पर्चे बांट रही है, मेरे पास राजस्थान के पर्चे आए हैं, जहां एसडीपीआई सबसे कमजोर है। पूरे देश में पर्चे बांटे जा रहे हैं, बताया जा रहा है कि ये वक्फ कानून अगर आ गया तो मस्जिदों पर भाजपा सरकार कब्जा कर लेगी।
आखिर क्यों? लेकिन ये लोग भूल गए कि नरेंद्र मोदी किसी और मिट्टी के बने हुए हैं। आपके विरोध से वो डरने वाले नहीं थे। आप चाहे जितना भी विरोध करते, वो मजबूती के साथ एक आम गरीब मुसलमान, एक दलित, एक पिछड़ी महिला, एक अनाथ महिला, एक तलाकशुदा महिला, अनाथ बच्चों के साथ खड़े होने वाले थे। और इसीलिए वो मजबूती से विधेयक लेकर के आए।
राधामोहन दास अग्रवाल: अध्यक्ष महोदय, ये चर्चा कर रहे थे “वक्फ बाय यूजर” क्या होता है। हजरत मोहम्मद साहब ने क्या कहा था? आपके पास अपनी कोई संपत्ति हो, तो दूसरों के भले के लिए दान करो। हदीसों ने क्या लिखा था? यदि किसी व्यक्ति के पास अपनी संपत्ति है, उसका एक हिस्सा वह दान कर सकता है, उसके लिए मुतवल्ली बना सकता है, उसकी आय के साधन लिख सकता है, आय से होने वाली आय किस वर्ग के उपयोग में आएगी, निर्देश दे सकता है।
राधामोहन दास अग्रवाल: व्हाट इज़ दिस “वक्फ बाय यूजर”? किसने आपको संपत्ति दी, किसने आपको संपत्ति दान की? किसके मन में मंशा थी कि अल्लाह को दे दिया जाए? एक भी आदमी ने वक्फ बाय यूजर की संपत्ति वक्फ के अधिनियम के तहत नहीं दी।
राधामोहन दास अग्रवाल: जैसे फिल्मों में गुंडे हुआ करते थे, जिस औरत पर हाथ रख दिया वो औरत उनकी हो गई। इसी प्रकार इन वक्फ बोर्डों ने भू-माफियाओं की तरह काम किया। जिस जमीन पर हाथ रख दिया, इन्होंने वह जमीन अपनी कर ली। आज इसी मानसिकता से यह काम करते हैं।
राधामोहन दास अग्रवाल: अध्यक्ष महोदय, इसी सदन में माननीय सदस्य झूठ बोल रहे थे, असत्य बोल रहे थे। 1995 का यह एक्ट है, धारा 40, “द बोर्ड मे इटसेल्फ कलेक्ट इंफॉर्मेशन”। बोर्ड स्वतः इस बात की सूचना इकट्ठी कर सकता है यदि उसे कोई कारण महसूस होता है कि यह वक्फ की प्रॉपर्टी है।
राधामोहन दास अग्रवाल: आगे क्या करेगा? “एंड इफ एनी क्वेश्चन अराइज़ वेदर ए पर्टिकुलर प्रॉपर्टी इज़ अ वक्फ प्रॉपर्टी और नॉट, वेदर अ वक्फ इज़ अ सुन्नी और शिया, बोर्ड आफ्टर मेकिंग सच इंक्वायरी एज़ इट डीम फिट डिसाइड्स द क्वेश्चन।” किसी संपत्ति पर हाथ रख दो, किसी भी संपत्ति को वक्फ बोर्ड की संपत्ति कह दो, और वक्फ बोर्ड खुद ही तय कर लेगा कि वह संपत्ति वक्फ की है कि नहीं है। जिस बेचारे की संपत्ति ले ली जाएगी, उसको पता ही नहीं चलेगा।
राधामोहन दास अग्रवाल: और अगला वाक्य क्या है? “द डिसीजन ऑफ द बोर्ड ऑन द क्वेश्चन अंडर सेक्शन वन, शैल अनलेस रिवोक्ड बाय ट्रिब्यूनल, बी फाइनल।” ट्रिब्यूनल ने अगर उस निर्णय को बदला नहीं तो वह डिसीजन फाइनल होगा। उसी एक्ट का दूसरा हिस्सा है अध्यक्ष महोदय, “नो अपील शैल लाई अगेंस्ट एनी डिसीजन और ऑर्डर, वेदर इंटरिम एंड अदरवाइज़ गिवेन और मेड बाय ट्रिब्यूनल।” ट्रिब्यूनल के द्वारा दिया गया कोई भी आदेश के खिलाफ किसी प्रकार की अपील नहीं होगी।
राधामोहन दास अग्रवाल: एक अपार्टमेंट में कोई परिवार किराए पर मकान ले ले और अपने चार मित्रों को बुला ले और नमाज पढ़ ले। पांचवें दिन वो कह देगा, हमने इस स्थान पर नमाज पढ़ी है, यह वक्फ बाय यूजर है। अब इसे वक्फ घोषित कर दो। और घोषित हो गई हो गई। अध्यक्ष महोदय, आपके पास एक बड़ी जमीन खाली पड़ी है। बगल में कुछ मुस्लिम परिवार रहते हैं, उन्हें नमाज पढ़ने के लिए कहीं जाना होता है। वो उस जमीन पर नमाज पढ़ ले।
राधामोहन दास अग्रवाल: आप हिंदू हैं, आप मना नहीं करते। पांच दिन-सात दिन नमाज पढ़ने के बाद वो लिख के दे देंगे कि हम लोग इस जमीन पर नमाज पढ़ते थे। अब यह वक्फ बाय यूजर हो गई। अब इस जमीन पर किसी का कोई अधिकार नहीं रहेगा।
राधामोहन दास अग्रवाल: माननीय संसदीय कार्य मंत्री तमिलनाडु की घटना का उल्लेख कर रहे थे। तमिलनाडु में एक रामचंद्र नाम का आदमी था, अध्यक्ष महोदय। वह व्यक्ति अपनी लड़की की शादी के लिए अपनी जमीन बेचना चाहता था। जब जमीन बेचने के लिए रजिस्ट्रार ऑफिस गया तो पता चला वह जमीन उसके नाम पर ही नहीं है, वह जमीन वक्फ को दे दी गई।
राधामोहन दास अग्रवाल: जब गांव के लोग रजिस्ट्रार ऑफिस गए तो पता चला कि उन दोनों गांवों की सारी जमीन वक्फ को दे दी गई। 1500 साल पुराना मंदिर भी वक्फ के हवाले कर दिया गया। यह होता है इन लोगों का “वक्फ बाय यूजर”।
राधामोहन दास अग्रवाल: मैंने कुरआन पढ़ी है
राधामोहन दास अग्रवाल: अध्यक्ष महोदय, आश्चर्य होता है। मैं भी जेपीसी का मेंबर हूं, ये भी जेपीसी के मेंबर हैं, ये गवाह हैं इस बात के। मैं लगातार जेपीसी में जितने भी विटनेस आते रहे, इनके बड़े-बड़े धार्मिक मौलवी आते रहे, मैं उनसे कुरान को कोट करके कहता रहा। मैं कुरान पढ़ता हूं। कोई बुराई नहीं है किसी धर्म को पढ़ने में। मैंने कुरान को कोट करके कहा कि मौलवी साहब, ये तो बताओ कि इस कुरान में या किस हदीस में यह लिखा है कि अगर हमने कोई संपत्ति दान नहीं की तो तुम उसको वक्फ बाय यूजर मालिकाना मान लोगे? किसी के पास एक भी मेरे सवाल का जवाब नहीं था।
राधामोहन दास अग्रवाल: इन लोगों ने क्या किया, मालूम है? वो जो ओवैसी साहब वहां बैठते हैं ना, उन्होंने मेरा नाम रख दिया—मौलाना डॉ राधा मोहन अग्रवाल। अब इससे बड़ी मेरी जीत क्या हो सकती है? मैंने इनसे पूछा, इस बात पर बहस होती है कि डीड लिखित गया या नहीं।
मैंने इनसे कहा कि हजरत मोहम्मद साहब ने अपनी आयतों में लिखा है—तीन आयतें हैं, चार आप चाहेंगे तो मैं पेश करूंगा—जहां हजरत मोहम्मद साहब कहते हैं, एक भी पैसा अगर किसी को दो तो उसको लिखो, उसका उदाहरण दो, उसका विटनेस बनाओ ताकि ताकीद रहे कि कल तुम्हारे देने को कोई चुनौती ना दे पाए। एक भी पैसा दो तो लिखित दो। और तुम कहते हो कि तुम्हारे पास ये सारी संपत्तियां हैं जिनका कोई लिखित रिकॉर्ड नहीं है, फिर भी वक्फ है।
राधामोहन दास अग्रवाल: मेरे एक भी सवाल का जवाब—मैं उस कमेटी की बातों को बोलता नहीं लेकिन क्योंकि इन्होंने कमेटी का उल्लेख कर दिया इसलिए मैं इन्हें एक्सपोज कर रहा हूं—मेरे एक भी प्रश्न का जवाब ये लोग नहीं दे पाए। खाली मुझे कहते थे, “कुरान पढ़ते हैं, मौलाना है।” अरे कुरान मैं पढ़ता हूं, तुम तो मुसलमान हो, बचपन से पढ़ते हो ना। मैं पढूं और बताऊं कुरान में क्या लिखा है, मार हो जाएगी। यह हिंदू की बलमन साहत है जो कुरान पढ़ के तुम्हें बताता नहीं है।
राधामोहन दास अग्रवाल: अध्यक्ष महोदय, दूसरी चीज—सरकार इनकी थी। इन्होंने वक्फ को अभयदान दे दिया और क्या नारा दिया—जो जमीन सरकारी है, वो जमीन हमारी है। सरकारी संपत्तियों पर कब्जा करने का ऐतिहासिक काम इन्होंने किया है। उत्तर प्रदेश में 74% वक्फ संपत्तियां सरकारी जमीन पर कब्जा करके बनी हैं। तेलंगाना में 50% की संपत्तियां सरकारी जमीन पर कब्जा करके बनी हैं। पूरा अभयदान इनको मिला था।
राधामोहन दास अग्रवाल: 2006 में सच्चर कमेटी की रिपोर्ट आई। सच्चर कमेटी ने कहा 4500 संपत्ति है और 6 लाख एकड़ जमीन है। आज 2024 में 8 लाख 72 हजार संपत्ति है और 37 लाख 94 हजार एकड़ जमीन है। 2006 से 2023 तक 6 लाख एकड़ से बढ़कर के 37 लाख 94 हजार एकड़ जमीन इनकी हो गई। इन्हें बताना तो पड़ेगा सभापति महोदय कि आखिर यह 31 लाख अतिरिक्त जमीन इन्होंने कहां से पाई। इन्हें उसका उदाहरण देना पड़ेगा।
राधामोहन दास अग्रवाल: अध्यक्ष महोदय, जितना यह कांग्रेस के पहले वक्ता रहे हैं, जितना समय यह बोले हैं, मैं भी उतना ही समय बोलने वाला हूं। यह मेरा अधिकार है। अध्यक्ष महोदय, इन्होंने चर्चा किया—कर्नाटक के हैं ये। मेरे पास यह रिपोर्ट है। यहां बोलने के पहले मैंने इस रिपोर्ट को ऑथेंटिकेट किया है, माननीय उपराष्ट्रपति महोदय के पास इसको लिख के भेजा है। ये सांसद महोदय कर्नाटक के हैं—पाकिस्तान जिंदाबाद वाले—एक शब्द भी इन्होंने इस रिपोर्ट के बारे में नहीं बोला। यह रिपोर्ट जेपीसी में प्रस्तुत हुई है, इसलिए यह ऑफिशियल डॉक्यूमेंट है।
राधामोहन दास अग्रवाल: यह रिपोर्ट मैं पढ़ूंगा, अध्यक्ष महोदय, यह मेरा अधिकार है। मैं आपको बताऊंगा कि कर्नाटक के अंदर किन-किन नेताओं ने वक्फ की कितनी-कितनी संपत्तियों पर कब्जा किया। मैं नाम पढ़ता हूं—कमरुल इस्लाम फॉरेन मिनिस्टर, सूर्यवंशी एक्स एमपी, सीएम इब्राहिम एक्स यूनियन मिनिस्टर, रहमान खान एक्स यूनियन मिनिस्टर, अब्दुल्ला शरीफ व बोर्ड ऑफिशियल, एनए हैरिस एमएलए, एमए खालिद एक्स सीओ, मुमताज अहमद खान चेयरमैन, मोहम्मद सानुल्लाह आईएएस, मिस्टर सिंधु गिरी फार्मर मिनिस्टर, एमएफ पासा आईएमआईपीएस, खनीज फातिमा एमएलए, सीके जाफर शरीफ फॉरेन मिनिस्टर। एक नाम, अध्यक्ष महोदय—सदन की मर्यादा में मैं एक नाम लेने से इंकार करता हूं। वो इस समय सदन में हैं भी नहीं। नाम क्या है, अच्छी तरह से जानते होंगे।
राधामोहन दास अग्रवाल: अध्यक्ष महोदय, मैं अपनी बातें समाप्त करूंगा रामधारी सिंह दिनकर की एक कविता के साथ:
सीमा पर एक सैनिक मर रहा था, मरते हुए सैनिक से एक कवि ने पूछा— हे वीर बंधु, दाई है कौन विपद का? हम दोषी किसको कहें तुम्हारे वध का? मरते हुए सैनिक ने कहा— यह गहन प्रश्न कैसे रहस्य समझाएं, दस-बीस बिकें हो तो हम राम कहां हर कदम कदम पर खड़ा, यहां पातक है हर तरफ लगाए घात बड़ा, घातक है, घातक है, देवता सदस्य दिखता है, पर कमरे में वह गलत हुक्म लिखता है। जिस पापी को गुण नहीं गोत्र प्यारा है, समझो उसने ही हमें आज मारा है।
जो सत्य जानकर भी न सत्य कहता है, या किसी लोभ के विवश चुप रहता है, उस कुटिल राजंत्री कर को धिक्कार है, वह मूक सत्य हंता कम नहीं बधिक है। चोरों के जो हेतु ठगों के बल हैं, जिनके प्रताप से पलते पाप सकल हैं। जो छल-प्रपंच सबको प्रशय देता है, या चाटुकार जन की सेवा लेता है, यह पाप उन्हीं का है। भारत अपने ही घर में हार गया है।
Waqf Law: वक्फ बिल को अजमेर दरगाह व केरल पादरी संगठन का समर्थन; जानें किसने क्या कहा?
Waqf Board: वक्फ पर JPC बैठक में विवाद, 10 विपक्षी सांसद निलंबित
Waqf Board: कर्नाटक के विजयपुरा में किसानों की जमीन रातोंरात की वक्फ बोर्ड के नाम
Amit Shah: गृह मंत्री की दो टूक- ‘शीतकालीन सत्र में पारित होगा वक्फ बिल’
Kerala: केरल वक्फ बोर्ड ने 3 गांवों की 400 एकड़ जमीन पर ठोका दावा, विरोध में उतरा चर्च
वक्फ बिल पर गुमराह करने के लिए रचा जा रहा षड़यंत्र? इसके पीछे किसका हाथ?
Delhi: अल्पसंख्यक आयोग की रिपोर्ट में दावा “वक्फ की जमीन पर बने हैं दिल्ली के 6 मंदिर!”
Waqf Board: क्या है वक्फ बोर्ड जिसकी शक्तियों पर लगाम लगाएगी मोदी सरकार, जानें सब