पंजाब बना नशे का अड्डा: पंजाब के अमृतसर में एक पुलिसकर्मी पिता का दर्द पूरे राज्य की नशा समस्या पर बड़ा सवाल बन गया है।
हेड कॉन्सटेबल अशोक कुमार सैनी ने अपने 26 वर्षीय बेटे आकाश सैनी को ड्रग ओवरडोज में खो दिया।
बेटे की मौत के बाद उन्होंने जो बयान दिया, उसने इलाके में फैले नशे के नेटवर्क की गंभीरता उजागर कर दी।
उनका कहना है कि उनके गुरु नानकपुरा इलाके में ड्रग्स इतनी आसानी से मिलती है जैसे Zomato से खाना मंगवाया जाता है।
फोन करो और नशा घर पहुंच जाता है
The Indian Express से बातचीत में अशोक सैनी ने बताया कि उन्होंने बेटे को कई बार नशा मुक्ति केंद्र भेजा, लेकिन हर बार बाहर आते ही वह फिर उसी दलदल में फंस जाता था।
वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि इलाके में ड्रग सप्लाई का नेटवर्क इतना सक्रिय है कि सिर्फ कॉल करने पर नशा सड़कों तक पहुंचा दिया जाता है।
उनका कहना है कि किसी भी पिता के लिए 24 घंटे बेटे पर नजर रखना संभव नहीं होता।
आखिरी मुलाकात की दर्दनाक याद
पिता ने भावुक होकर बताया कि जब आकाश कुछ दिनों तक साफ रहने के बाद घर लौटा था तो उन्हें लगा कि अब सब ठीक हो जाएगा।
उसी दिन बेटे ने उनसे कहा कि वह दस मिनट में वापस आ जाएगा। पिता ने उसे जाने दिया क्योंकि उन्हें शक नहीं था कि वह सीधे जाकर नशा करेगा,
लेकिन वही दस मिनट उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा पछतावा बन गए। एक इंजेक्शन ने बेटे की जान ले ली और परिवार की दुनिया उजड़ गई।
बेहतर भविष्य के लिए आया था शहर
मूल रूप से गुरदासपुर के रहने वाले अशोक सैनी बेहतर भविष्य की उम्मीद में अमृतसर आए थे। यहां उन्होंने पहले होमगार्ड के रूप में काम किया और बाद में पंजाब पुलिस में नौकरी मिली।
उन्होंने कहा कि उन्होंने सोचा था कि शहर में बच्चों को बेहतर माहौल मिलेगा, लेकिन अब बेटे के जाने के बाद उन्हें लगता है कि उनका अपना भविष्य ही खत्म हो गया है।
अशोक सैनी ने बताया कि बेटे की लत छुड़ाने के लिए वह अपना घर तक बेचने को तैयार हो गए थे ताकि उसे बेहतर इलाज दिला सकें,
लेकिन इलाके की बदनामी के कारण सही कीमत नहीं मिली, क्योंकि गुरु नानकपुरा क्षेत्र ड्रग गतिविधियों के लिए कुख्यात माना जाता है।
उनका आरोप है कि यहां खुलेआम नशा बिकता है और स्थानीय लोग इस सच्चाई से भलीभांति परिचित हैं।
शव सड़क पर रखकर विरोध
आकाश की मौत के बाद पिता ने बेटे का शव सड़क पर रखकर विरोध प्रदर्शन किया।
उनका कहना था कि यदि माता-पिता अपने बच्चों को बचाना चाहते हैं तो पंजाब छोड़कर उत्तर प्रदेश या बिहार जैसे राज्यों में जाकर बस जाएं।
उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि नशा बेचने वालों पर सख्त कार्रवाई नहीं की जा रही।
आकाश कई सालों से नशे का आदी था और कई बार पुनर्वास केंद्र जा चुका था। 12 फरवरी 2026 को ही पिता उसे एक नशा मुक्ति केंद्र से घर लाए थे,
लेकिन अगले ही दिन वह दोस्त के साथ गया और इंजेक्शन के जरिए ड्रग लिया, जिससे उसकी मौत हो गई।
पिता का आरोप है कि इलाके में घर-घर नशा बिक रहा है और प्रशासन इस पर प्रभावी रोक लगाने में नाकाम है।

