पीएम मोदी ने लेक्स फ्रिडमैन के पॉडकास्ट में की लंबी बातचीत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी कंप्यूटर वैज्ञानिक और पॉडकास्टर लेक्स फ्रिडमैन के साथ एक विस्तृत साक्षात्कार में भाग लिया। इस बातचीत में उन्होंने अपने बचपन से लेकर आरएसएस के साथ अपने संबंध और लोकतंत्र एवं आलोचना पर अपने विचारों सहित कई विषयों पर चर्चा की।
आलोचना और लोकतंत्र पर पीएम मोदी के विचार
फ्रिडमैन द्वारा आलोचनाओं के बारे में पूछे जाने पर, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वे इसका स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा, “मेरा दृढ़ विश्वास है कि आलोचना लोकतंत्र की आत्मा है। अगर लोकतंत्र वास्तव में आपकी रगों में बहता है, तो आपको इसे अपनाना चाहिए।”
उन्होंने आगे कहा, “हमें अधिक आलोचना करनी चाहिए, और यह तीखी और सुविचारित होनी चाहिए। हमारे शास्त्रों में कहा गया है अपने आलोचकों को हमेशा अपने पास रखें। आलोचकों को आपका सबसे करीबी साथी होना चाहिए क्योंकि वास्तविक आलोचना के माध्यम से आप जल्दी सुधार कर सकते हैं, और बेहतर अंतर्दृष्टि के साथ लोकतान्त्रिक तरीके से काम कर सकते हैं।”
हालांकि, उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि आजकल की अधिकांश आलोचना वास्तविक नहीं है और एक मजबूत लोकतंत्र के लिए वास्तविक आलोचना आवश्यक है।
संघ के बारे में पीएम मोदी

संघ से अपने जुड़ाव पर बात करते हुए, पीएम मोदी ने कहा, “मैं खुद को सौभाग्यशाली मानता हूं कि मैंने आरएसएस जैसे प्रतिष्ठित संगठन से जीवन का सार और मूल्य सीखा। मुझे उद्देश्यपूर्ण जीवन मिला।”
उन्होंने आरएसएस की 100 साल की यात्रा पर प्रकाश डाला और कहा कि, “बचपन में आरएसएस की सभाओं में जाना हमेशा अच्छा लगता था। मेरे मन में हमेशा एक ही लक्ष्य रहता था, देश के काम आना। यही संघ ने मुझे सिखाया। संघ इस साल 100 साल पूरे कर रहा है। आरएसएस से बड़ा कोई स्वयंसेवी संघ दुनिया में नहीं है।
आरएसएस को समझना आसान काम नहीं है, इसके कामकाज को समझना होगा। यह अपने सदस्यों को जीवन का उद्देश्य देता है। यह सिखाता है कि राष्ट्र ही सब कुछ है और समाज सेवा ही ईश्वर की सेवा है। हमारे वैदिक संतों और स्वामी विवेकानंद ने जो सिखाया है, संघ भी यही सिखाता है।
आरएसएस के कुछ सदस्यों ने शिक्षा में क्रांति लाने के लिए विद्या भारती नामक संगठन की शुरुआत की। उनके देश भर में करीब 25 हजार स्कूल चलते हैं, एक समय में 30 लाख छात्र इन स्कूलों में पढ़ते हैं। वामपंथियों द्वारा प्रचारित श्रमिक आंदोलन दुनिया के मजदूरों, एक हो जाओ! का नारा लगाते हैं, जबकि आरएसएस का श्रमिक संगठन मजदूरों, दुनिया को एक करो! का नारा लगाता है।”
बचपन की यादें
अपने बचपन की चर्चा करते हुए, पीएम मोदी ने गुजरात में अपने गांव और परिवार के साथ बिताए गए सरल जीवन के बारे में बताया। उन्होंने याद किया कि कैसे एक लड़के के रूप में उन्हें चौक से कैनवास के जूते सफेद करने पड़ते थे और अपने कपड़ों को गर्म पानी से भरे तांबे के बर्तन में प्रेस करना होता था।
उन्होंने कहा, “लेकिन हमें कभी नहीं लगा कि हम गरीब हैं। जो व्यक्ति अच्छे जूते पहनने का आदी है, उसे जब जूते नहीं मिलेंगे तो उसकी कमी खलेगी। लेकिन हमने तो अपने जीवन में कभी जूते नहीं पहने थे, तो हम कैसे जान सकते थे कि जूते पहनना कोई बड़ी बात है? हम तुलना करने की स्थिति में नहीं थे।”
पीएम मोदी और ट्रंप की दोस्ती का किस्सा

ट्रम्प से अपनी दोस्ती पर पीएम मोदी बोले, “जब मैं मंच से बोल रहा था, तब अमेरिका के राष्ट्रपति दर्शकों के बीच बैठे थे। जब मैंने ट्रंप से दर्शकों का अभिवादन करने के लिए खचाखच भरे स्टेडियम का चक्कर लगाने के लिए कहा था और उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के सहमति दे दी तो अमेरिकी सुरक्षा दल में हड़कंप मच गया था। उनका पूरा सुरक्षा दल हैरान रह गया था, लेकिन मेरे लिए वह पल वाकई दिल को छू लेने वाला था।”
‘भारत और चीन के बीच संबंध नए नहीं‘
चीन से सम्बन्धों पर पीएम मोदी बोले, “भारत और चीन के बीच संबंध नए नहीं हैं। दोनों देशों की संस्कृति और सभ्यताएं प्राचीन हैं। आधुनिक दुनिया में भी वे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि आप ऐतिहासिक रिकॉर्ड को देखें, तो सदियों से भारत और चीन ने एक-दूसरे से सीखा है। मेरा मानना है कि गहरे सांस्कृतिक संबंधों के साथ हमारे संबंध बेहद मजबूत रहे हैं। भविष्य में भी यह संबंध मजबूत रहने चाहिए।”
पाकिस्तान से हमेशा धोखा मिला
पाकिस्तान के सवाल पर पीएम मोदी ने कहा, “2014 में अपने शपथ ग्रहण समारोह के लिए पाकिस्तानी समकक्ष नवाज शरीफ को विशेष रूप से आमंत्रित किया था और उन्हें इस बात की उम्मीद थी कि दोनों देश एक नई शुरुआत कर सकते हैं। फिर भी शांति बहाल करने के हर प्रयास के बदले दुश्मनी और विश्वासघात ही मिला। हम ईमानदारी से उम्मीद करते हैं कि उन्हें सद्बुद्धि आए और वे शांति का रास्ता चुनें।”
परीक्षाएं ज्ञान अर्जन का एक छोटा सा हिस्सा
बच्चों के लिए सन्देश दिया, “केवल शैक्षणिक अंक ही किसी छात्र की वास्तविक योग्यता को परिभाषित नहीं कर सकते। परीक्षाएं ज्ञान अर्जन और आत्म-विकास की वृहद यात्रा का एक छोटा सा हिस्सा मात्र हैं। आज समाज में एक अजीब मानसिकता विकसित हो गई है, जिसके तहत स्कूल भी अपनी सफलता छात्रों की रैंकिंग से आंकते हैं।”
भगवान हमेशा मेरे साथ रहते हैं
भगवान के ऊपर बोले पीएम मोदी, “मैं कभी अकेलापन महसूस नहीं करता। मैं ‘वन प्लस वन’ सिद्धांत में विश्वास करता हूं। एक मोदी है और दूसरा ईश्वर। मैं वास्तव में कभी अकेला नहीं होता क्योंकि भगवान हमेशा मेरे साथ रहते हैं। मेरे लिए जन सेवा ही प्रभु सेवा है। मुझे ईश्वर और 140 करोड़ भारतीयों का समर्थन प्राप्त है।”