Thursday, January 29, 2026

25 साल के पीपल पर चली कुल्हाड़ी: पीपल पेड़ कटने पर फूट-फूटकर रोई देवला बाई, दो आरोपी जेल भेजे

आस्था का प्रतीक बना पीपल वृक्ष काटे जाने से गांव में मचा हाहाकार

छत्तीसगढ़ के खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के सर्रागोंदी गांव में 90 वर्षीय देवला बाई ने 25 साल पहले जिस पीपल वृक्ष को अपने हाथों से लगाया था, उसकी अवैध कटाई ने पूरे गांव को झकझोर दिया।

बुजुर्ग महिला उस वृक्ष से गहरा भावनात्मक लगाव रखती थीं। जब उन्होंने पेड़ गिराए जाने की खबर सुनी, तो वे हांफती हुई मौके पर पहुंचीं और पीपल के कटे हुए तने से लिपटकर रो पड़ीं। उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

देवला बाई की पीड़ा ने जगाई संवेदना, ग्रामीणों ने रोपा नया पीपल का पौधा

गांव के लोगों ने बुजुर्ग महिला को सांत्वना दी और कटे हुए वृक्ष की पूजा कर क्षमा मांगी।

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देवला बाई के हाथों से उसी स्थान पर नया पीपल पौधा रोपित किया गया। यह वृक्ष वर्षों से गांव की आस्था का केंद्र था, जहाँ नियमित पूजा-अर्चना होती थी।

गांव में गूंजा विरोध, दो आरोपी गिरफ्तार

पुलिस के अनुसार, खैरागढ़ निवासी इमरान मेमन और उसका साथी प्रकाश कोसरे ने पांच अक्टूबर की सुबह सरकारी भूमि पर स्थित पीपल वृक्ष को काटने का प्रयास किया था।

ग्रामीणों के विरोध के कारण वे उस दिन असफल रहे, पर अगले दिन उन्होंने मौका पाकर पेड़ पूरी तरह काट डाला।

घटना की शिकायत ग्रामवासी प्रमोद पटेल ने थाने में दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

सबूत मिटाने की कोशिश में फेंकी मशीन नदी में

जांच में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने घटना के बाद लकड़ी काटने वाली मशीन को नदी में फेंक दिया था ताकि सबूत न मिलें।

पुलिस अब गोताखोरों की मदद से उस मशीन की तलाश कर रही है। साथ ही एक स्कूटी भी जब्त की गई है।

पुलिस ने अपराध को धारा 298, 3(5) एवं शासकीय संपत्ति विरूपण अधिनियम के तहत दर्ज किया है और आगे धारा 238 जोड़कर जांच जारी है।

धार्मिक भावनाओं को ठेस, ग्रामीणों में उबाल

गांव में इस घटना से गहरा आक्रोश है। लोगों ने कहा कि पीपल वृक्ष केवल पेड़ नहीं था बल्कि उनकी श्रद्धा का केंद्र था।

कटाई ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। ग्रामीणों ने मांग की है कि दोषियों को कड़ी सजा दी जाए ताकि भविष्य में कोई इस तरह का दुस्साहस न करे।

पुलिस का कहना है कि सभी साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं और जांच पूरी होने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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Mudit
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लेखक 'भारतीय ज्ञान परंपरा' के अध्येता हैं। वे पिछले एक दशक से सार्वजनिक विमर्श पर विश्लेषणात्मक लेखन कर रहे हैं। सांस्कृतिक सन्दर्भ में समाज, राजनीति, विचारधारा, शिक्षा, धर्म और इतिहास के प्रमुख प्रश्नों के रिसर्च बेस्ड प्रस्तुतिकरण और समाधान में वे पारंगत हैं। वे 'द पैम्फलेट' में दो वर्ष कार्य कर चुके हैं। वे विषयों को केवल घटना के स्तर पर नहीं, बल्कि उनके ऐतिहासिक आधार, वैचारिक पृष्ठभूमि और दीर्घकालीन प्रभाव के स्तर पर परखते हैं। इसी कारण उनके राष्ट्रवादी लेख पाठक को नई दृष्टि और वैचारिक स्पष्टता भी देते हैं। इतिहास, धर्म और संस्कृति पर उनकी पकड़ व्यापक है। उनके प्रामाणिक लेख अनेक मौकों पर राष्ट्रीय विमर्श की दिशा में परिवर्तनकारी सिद्ध हुए हैं। उनका शोधपरक लेखन सार्वजनिक संवाद को अधिक तथ्यपरक और अर्थपूर्ण बनाने पर केंद्रित है।
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