Pamban Bridge: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी 6 अप्रैल को राम नवमी के अवसर पर रामेश्वरम में पंबन पुल का उद्घाटन करेंगे और इसे जनता को समर्पित करेंगे। यह नया पुल पुराने पुल की जगह बनाया गया है। जो 2.5 किलोमीटर से ज्यादा लंबा है। इसे रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) ने 535 करोड़ रुपये की लागत से बनाया है।
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Pamban Bridge: हाई स्पीड ट्रेनों के लिए किया गया डिजाइन
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा है कि इस पुल को हाई स्पीड ट्रेनों और ज्यादा ट्रैफिक संभालने के लिए डिजाइन किया गया है। ये नया ब्रिज न सिर्फ काम का बल्कि तरक्की का भी प्रतीक है। इसी के साथ ही मार्डन इंजीनियरिंग से लोगों और जगहों को जोड़ने का काम कर रहा है।
एक घुमाव की वजह से कम हुई स्पीड
Pamban Bridge: नए पंबन पुल के सारे परीक्षण पूरे हो चुके हैं और इसे सुरक्षा प्रमाणपत्र भी मिल गए हैं। सोशल मीडिया पर चल रही खबरों के मुताबिक रेलवे सुरक्षा आयुक्त (CRS) ने कहा था कि पुल के लिए 75 किमी प्रति घंटे की गति सीमा को मंजूरी दी गई है। हालांकि यह नियम पुल के बीच वाले हिस्से पर लागू नहीं होगा, जो ऊपर उठने वाला है। नए पुल को 80 किमी प्रति घंटे की गति के लिए बनाया गया है, लेकिन एक घुमाव की वजह से CRS ने 75 किमी प्रति घंटे की सीमा तय की है।
इलेक्ट्रोमैकेनिकल से चलेगा पुल
Pamban Bridge: लिफ्ट वाले हिस्से के लिए 50 किमी प्रति घंटे की गति की अनुमति दी गई है। इस पुल को इलेक्ट्रोमैकेनिकल सिस्टम से चलाया जाएगा, जिससे समुद्र से जहाजों का आवागमन आसान होगा। इसी के साथ ही जब जहाज के आने का समय होगा, तो पुल को उठा दिया जाएगा। इसे उठाने में सिर्फ 5 मिनट लगेंगे और केवल एक व्यक्ति इसे संचालित कर सकता है। इससे ज्यादा लोगों की जरूरत नहीं पड़ेगी।
तेज हवाएं पुल के लिए चुनौती
Pamban Bridge: हालांकि इस पुल को लेकर सबसे बड़ी चुनौती तेज रफ्तार हवा को बतायी जा रही है। समुद्र में जब हवा की गति 58 किमी प्रति घंटे या उससे ज्यादा की होगी, तो पुल को उठाने वाला सिस्टम काम नहीं करेगा। यह स्थिति अक्सर अक्टूबर से फरवरी के बीच देखने को मिलती है, जब तेज हवाएं चलती हैं। बता दें कि रामेश्वरम से धनुषकोडी जाने का एकमात्र रास्ता पंबन ब्रिज था।
रेल कनेक्टिविटी होगी बेहतर
Pamban Bridge: 1914 में बने इस पुल के बाद 1988 में इसके बगल में एक सड़क पुल बनाया गया। तब जाकर लोगों को दूसरा ऑप्शन मिला। 1988 तक मंडपम और रामेश्वरम द्वीप के बीच ट्रेन ही एकमात्र साधन थी। यह नया पुल न केवल रेल कनेक्टिविटी को बेहतर करेगा, बल्कि क्षेत्र के विकास में भी योगदान देगा। यह आधुनिक तकनीक और इंजीनियरिंग का शानदार नमूना है, जो भारत के विकास को दर्शाता है।
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