BLA के आगे पाकिस्तान ने टेके घुटने: बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने बलूचों की आज़ादी को लेकर पाकिस्तान के खिलाफ अपनी जंग और तेज़ कर दी है। BLA ने पाकिस्तानी सेना के खिलाफ ऑपरेशन हरोफ 2.0 की शुरुआत की है।
इस ऑपरेशन के तहत अब तक पाकिस्तान के 200 से ज्यादा सैनिकों के मारे जा चुके हैं।
हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ को संसद में यह स्वीकार करना पड़ा कि बलूचिस्तान के मोर्चे पर पाकिस्तानी सेना की स्थिति बेहद कमजोर है।
उन्होंने माना कि बलूच लड़ाकों के पास आधुनिक और एडवांस हथियार हैं, जिनके सामने पाकिस्तानी सेना टिक नहीं पा रही है।
काले बाजारों से मिलते है हथियार
BLA के आगे पाकिस्तान ने टेके घुटने: सबसे दिलचस्प और चौंकाने वाली बात यह है कि जो पाकिस्तानी सेना बलूचों के आधुनिक हथियारों का सामना करने में खुद को असमर्थ बता रही है।
वही सेना अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के राफेल जैसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमान को मार गिराने के दावे करती रही है।
यह विरोधाभास पाकिस्तान की सैन्य तैयारियों और उसके दावों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर बलूच लड़ाकों को इतने आधुनिक हथियार मिल कहां से रहे हैं? मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बलूचों को हथियारों की आपूर्ति ईरान और अफगानिस्तान से जुड़े काले बाजारों के जरिए होती है।
खास तौर पर वर्ष 2021 में जब अमेरिकी सेना अफगानिस्तान से पीछे हटी, तब वहां बड़ी मात्रा में अत्याधुनिक हथियार छोड़ दिए गए थे। इन्हीं हथियारों को आज बलूच विद्रोही अपना मुख्य स्रोत मान रहे हैं।
BLA के पास एडवांस वेपन
रिपोर्ट्स के अनुसार BLA के पास अमेरिकी और रूसी मूल के कई घातक हथियार मौजूद हैं।
इनमें M16A4 असॉल्ट राइफल, M240B मशीन गन और RPG-7 लॉन्चर जैसे हथियार शामिल हैं।
ये हथियार न सिर्फ उनकी लड़ाकू क्षमता को बढ़ाते हैं, बल्कि पाकिस्तानी सेना के लिए बड़ी चुनौती भी बने हुए हैं।
बता दें कि बलूचिस्तान पाकिस्तान का वही हिस्सा है, जो भारत के कई हिस्सों को छीनकर बनाए गए देश में शामिल किया गया था,
लेकिन बलूच लोगों ने कभी भी पाकिस्तान के साथ पूरी तरह खुद को नहीं जोड़ा।
भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के समय से ही बलूच समुदाय पाकिस्तान से आज़ादी की लड़ाई लड़ता आ रहा है।
यहां रहने वाले लोग खुद को एक अलग पहचान और अलग राष्ट्र के रूप में देखना चाहते हैं।
कब मिली थी आजादी
बलूचिस्तान को वर्ष 1947 में कुछ समय के लिए आज़ादी भी मिली थी, लेकिन बाद में पाकिस्तान ने सैन्य ताकत के बल पर उस पर दोबारा कब्जा कर लिया।
तभी से बलूचिस्तान में विद्रोह और असंतोष की आग लगातार सुलग रही है।
दशकों से चले आ रहे इस संघर्ष ने अब एक बार फिर पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है और पाकिस्तान के लिए यह सबसे बड़ी आंतरिक चुनौती बनता जा रहा है।

