Thursday, January 29, 2026

मोटापा: बदलती जीवनशैली से पैदा हुआ साइलेंट किलर, ऐसे करें बचाव

मोटापा: आज पूरी दुनिया एक ऐसी स्वास्थ्य चुनौती का सामना कर रही है, जिसे अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है, लेकिन इसके परिणाम बेहद घातक हैं।

मोटापा अब केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं रह गया, बल्कि यह एक वैश्विक महामारी का रूप ले चुका है।

ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि दुनिया भर में करीब 31 प्रतिशत वयस्क लोग न्यूनतम जरूरी शारीरिक गतिविधि भी नहीं कर पा रहे हैं।

इसका मतलब है कि लगभग 1.8 अरब लोग ऐसी जीवनशैली जी रहे हैं, जो भविष्य में गंभीर बीमारियों को न्योता दे सकती है।

मोटापा: हार्ट अटैक, डायबिटीज, स्ट्रोक के बढ़ते मामले

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह आंकड़ा सिर्फ एक प्रतिशत नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों में हार्ट अटैक, डायबिटीज, स्ट्रोक और कैंसर जैसी बीमारियों के बढ़ते मामलों की चेतावनी है।

चिंताजनक बात यह है कि साल 2010 से 2022 के बीच शारीरिक निष्क्रियता में करीब 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

अगर यही ट्रेंड जारी रहा, तो 2030 तक दुनिया की 35 प्रतिशत आबादी शारीरिक रूप से अनएक्टिव हो सकती है।

फिजिकल एक्टिविटी जरूरी

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) का कहना है कि एक स्वस्थ वयस्क को हर हफ्ते कम से कम 150 मिनट की मध्यम स्तर की या 75 मिनट की तेज शारीरिक गतिविधि करनी चाहिए,

लेकिन हकीकत यह है कि दुनिया की बड़ी आबादी इस मानक से काफी पीछे है। नतीजतन, हार्ट डिजीज, टाइप-2 डायबिटीज, डिमेंशिया, स्ट्रोक और ब्रेस्ट व कोलन कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।

तेजी से बढ़ रही मोटापे की समस्या

भारत में स्थिति और भी ज्यादा गंभीर नजर आती है। बीते दो दशकों में देश में मोटापे की समस्या तेज़ी से बढ़ी है, लेकिन इस पर सार्वजनिक बहस और जागरूकता अपेक्षाकृत कम रही है।

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 के आंकड़े बताते हैं कि भारत में लगभग हर चौथा वयस्क मोटापे या अधिक वजन की समस्या से जूझ रहा है। यह समस्या अब शहरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि गांवों में भी तेजी से फैल रही है।

राज्यवार आंकड़ों पर नजर डालें तो कहीं मोटापे की दर 8 प्रतिशत है, तो कहीं यह 50 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।

पुरुषों के साथ-साथ महिलाएं भी इसकी चपेट में हैं। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, देश में करोड़ों लोग पेट के मोटापे, सामान्य मोटापे, हाई कोलेस्ट्रॉल और मेटाबॉलिक डिसऑर्डर जैसी समस्याओं से पीड़ित हैं।

आंकड़े और भी डराने वाले हैं। पिछले 15 वर्षों में भारत में ओवरवेट और मोटे लोगों की संख्या दोगुनी हो चुकी है, जबकि बीते 30 सालों में यह लगभग तीन गुना बढ़ गई है।

सबसे गंभीर चिंता बच्चों को लेकर है। देश में 1.44 करोड़ से ज्यादा बच्चे मोटापे का शिकार हैं, जो आने वाले समय में बड़े स्वास्थ्य संकट की ओर इशारा करता है।

बीमारियों की वजह मोटापा

विशेषज्ञों का कहना है कि मोटापा केवल वजन बढ़ने का मामला नहीं है। यह डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, स्लीप एपनिया और कई प्रकार के कैंसर का जोखिम बढ़ा देता है।

खासतौर पर पेट के आसपास जमा चर्बी को सबसे खतरनाक माना जाता है।

इसके पीछे तेजी से बदलती जीवनशैली, शहरीकरण, लंबे समय तक बैठकर काम करना, शारीरिक मेहनत की कमी और प्रोसेस्ड व फास्ट फूड का बढ़ता चलन बड़ी वजह है।

फिजिकल एक्टिविटी घटी

WHO के मुताबिक, भारत की लगभग आधी आबादी पर्याप्त एक्सरसाइज नहीं करती। कोविड-19 महामारी के दौरान यह समस्या और गहरी हो गई,

जब लोगों की फिजिकल एक्टिविटी घट गई और स्क्रीन टाइम कई गुना बढ़ गया। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया,

तो मोटापा आने वाले वर्षों में भारत और दुनिया के लिए सबसे बड़ा ‘साइलेंट किलर’ साबित हो सकता है।

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Madhuri
Madhurihttps://reportbharathindi.com/
पत्रकारिता में 6 वर्षों का अनुभव है। पिछले 3 वर्षों से Report Bharat से जुड़ी हुई हैं। इससे पहले Raftaar Media में कंटेंट राइटर और वॉइस ओवर आर्टिस्ट के रूप में कार्य किया। Daily Hunt के साथ रिपोर्टर रहीं और ETV Bharat में एक वर्ष तक कंटेंट एडिटर के तौर पर काम किया। लाइफस्टाइल, इंटरनेशनल और एंटरटेनमेंट न्यूज पर मजबूत पकड़ है।
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