Friday, February 6, 2026

न्यू लेबर कोड: अब महिलाओं को ओवर टाइम के मिलेंगे पैसे, नाइट शिफ्ट को लेकर हुआ बदलाव

न्यू लेबर कोड: मोदी सरकार ने श्रम सुधारों की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए पुराने 29 श्रम कानूनों को समाप्त कर दिए हैं और 21 नवंबर से पूरे देश में चार नए लेबर कोड लागू कर दिए गए हैं।

सरकार का दावा है कि यह बदलाव आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर ले जाने वाला सबसे बड़ा श्रम सुधार है। इससे पहली बार देश के 40 करोड़ से अधिक कामगारों को व्यापक सामाजिक सुरक्षा मिली है।

न्यू लेबर कोड: आधुनिक कार्यसंस्कृति के अनुरूप कानूनी ढांचा

देश में कई श्रम कानून 1930–1950 के दशक में बने थे, जो आज की डिजिटल और प्लेटफॉर्म-आधारित अर्थव्यवस्था के अनुकूल नहीं थे।

नए लेबर कोड गिग वर्कर्स, प्लेटफॉर्म वर्कर्स, प्रवासी श्रमिक और असंगठित क्षेत्र के कामगारों को कानूनी पहचान और सुरक्षा प्रदान करते हैं। इससे आधुनिक कार्यशैली को सशक्त आधार मिलता है।

पारदर्शी रोजगार व्यवस्था

अब हर कर्मचारी को नियुक्ति पत्र देना अनिवार्य होगा। पूरे देश में न्यूनतम वेतन लागू होगा और समय पर वेतन भुगतान कानूनी जिम्मेदारी होगी।

इससे रोजगार में पारदर्शिता बढ़ेगी और कर्मचारियों की सुरक्षा मजबूत होगी। वेतन संबंधी विवादों में भी कमी आएगी।

कर्मचारियों के लिए मुफ्त हेल्थ चेकअप

40 वर्ष से अधिक आयु वाले सभी कर्मचारियों को साल में एक बार मुफ्त स्वास्थ्य जांच दी जाएगी।

खनन, केमिकल, कंस्ट्रक्शन और अन्य खतरनाक उद्योगों के कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य और सुरक्षा मानकों को कड़ा किया गया है। इससे कामगारों की कार्यस्थल सुरक्षा बेहतर होगी।

सिर्फ एक साल की नौकरी पर ग्रेच्युटी का लाभ

पहले ग्रेच्युटी पाने के लिए कम से कम पांच वर्षों की सेवा अनिवार्य थी, लेकिन नए कोड में यह अवधि घटाकर सिर्फ एक वर्ष कर दी गई है।

यह प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के लिए एक बड़ा और लाभकारी सुधार है। इससे कर्मचारियों का आर्थिक संरक्षण बढ़ेगा।

ट्रांसजेंडर कर्मचारियों के लिए नई सुविधाएं

नए लेबर कोड कार्यस्थल पर लैंगिक समानता को बढ़ावा देते हैं।

महिलाओं को उनकी सहमति और सुरक्षा प्रबंधों के साथ नाइट शिफ्ट में काम करने की अनुमति दी गई है।

समान वेतन और सुरक्षित कार्यस्थल की गारंटी की गई है।

ट्रांसजेंडर कर्मचारियों को पहली बार श्रम कानूनों में समान अधिकार प्रदान किए गए हैं।

यह सब मिलकर कार्यस्थलों को अधिक समावेशी और सुरक्षित बनाते हैं।

प्लेटफॉर्म वर्कर्स को पहली बार सामाजिक सुरक्षा

ओला-उबर ड्राइवर, स्विगी–जोमैटो डिलीवरी पार्टनर और अन्य ऐप आधारित वर्कर्स को पहली बार कानूनी सुरक्षा और सामाजिक लाभ मिलेंगे।

एग्रीगेटर्स को अपने टर्नओवर का 1–2% इन कामगारों की सुरक्षा योजनाओं में देना होगा।

UAN लिंक होने से राज्य बदलने पर भी लाभ जारी रहेगा। यह डिजिटल अर्थव्यवस्था के श्रमिकों के लिए बड़ा कदम है।

ओवरटाइम का डबल रेट

ओवरटाइम भुगतान को स्पष्ट और पारदर्शी बनाते हुए इसे डबल रेट पर अनिवार्य कर दिया गया है। इससे कर्मचारियों के ओवरटाइम शोषण पर रोक लगेगी।

कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स को भी स्थाई कर्मचारियों जैसी सुविधाएं न्यूनतम वेतन,

सामाजिक सुरक्षा और काम की गारंटी- मिलेंगी। प्रवासी श्रमिकों और असंगठित क्षेत्र के कामगारों को भी मजबूत सुरक्षा ढांचा दिया गया है।

उद्योगों के लिए आसान कम्प्लायंस

सिंगल लाइसेंस और सिंगल रिटर्न सिस्टम जैसी सुविधाओं से कंपनियों का अनुपालन बोझ कम होगा।

इससे उद्योगों को लालफीताशाही से राहत मिलेगी और कारोबार करना आसान होगा।

श्रमिक- कंपनी विवादों का तेज समाधान

नई प्रणाली में “इंस्पेक्टर-कम-फैसिलिटेटर” मॉडल लागू किया गया है, जहां अधिकारी दंडात्मक कार्रवाई की बजाय मार्गदर्शन पर जोर देंगे।

दो-सदस्यीय ट्राइब्यूनल बनेंगे, जिसमें कर्मचारी सीधे शिकायत दर्ज कर सकेंगे। इससे विवाद समाधान तेज़ और पारदर्शी होगा।

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Madhuri
Madhurihttps://reportbharathindi.com/
पत्रकारिता में 6 वर्षों का अनुभव है। पिछले 3 वर्षों से Report Bharat से जुड़ी हुई हैं। इससे पहले Raftaar Media में कंटेंट राइटर और वॉइस ओवर आर्टिस्ट के रूप में कार्य किया। Daily Hunt के साथ रिपोर्टर रहीं और ETV Bharat में एक वर्ष तक कंटेंट एडिटर के तौर पर काम किया। लाइफस्टाइल, इंटरनेशनल और एंटरटेनमेंट न्यूज पर मजबूत पकड़ है।
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