Saturday, March 28, 2026

नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी बायोग्राफी : शक्ल पर ताने और 12 साल की गुमनामी, कैसे एक साधारण चेहरे ने बदल दी बॉलीवुड की परिभाषा

नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी बायोग्राफी : क्या एक ऐसा इंसान, जिसके पास न तो फिल्म स्टार जैसे लुक्स थे और न ही कोई गॉडफादर, बॉलीवुड के ऊंचे बुर्जों को हिला सकता है? उत्तर प्रदेश के एक छोटे से कस्बे बुढ़ाना के किसान परिवार से निकला वह शख्स,

जिसने दिल्ली में वॉचमैन की नौकरी की और मुंबई की सड़कों पर 12 सालों तक गुमनामी के अंधेरे में एक-एक सीन के लिए तरसा, आज विश्व सिनेमा का एक बड़ा नाम है।

जिस कलाकार को कभी रंग और कद की वजह से नकारा गया, उसी ने अपनी आँखों की चमक और बेजोड़ अभिनय से कान्स (Cannes) जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तिरंगा फहराया।

12 साल के लंबे संघर्ष के बाद, भीड़ का एक मामूली हिस्सा रहने वाला वह चेहरा आज भारतीय सिनेमा की सबसे दमदार पहचान बन चुका है। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं नवाजुद्दीन सिद्दीकी की।

व्यक्तिगत परिचय

श्रेणीविवरण
पूरा नामनवाज़ुद्दीन सिद्दीकी
जन्म तिथि19 मई 1974
जन्म स्थानबुढ़ाना, मुज़फ्फरनगर, उत्तर प्रदेश, भारत
उम्र (2025 में)लगभग 51 वर्ष
राष्ट्रीयताभारतीय
पेशाअभिनेता
शिक्षागुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार (B.Sc. केमिस्ट्री)
अभिनय प्रशिक्षणनेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD), दिल्ली
वैवाहिक स्थितिविवाहित
पत्नीआलिया सिद्दीकी
बच्चे2
धर्मइस्लाम
डेब्यू फिल्मसरफरोश (1999, छोटा रोल)
प्रसिद्ध फिल्मेंगैंग्स ऑफ वासेपुर, द लंचबॉक्स, मंटो, रमन राघव 2.0
अवॉर्ड्सराष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (स्पेशल ज्यूरी), फिल्मफेयर अवॉर्ड्स
नेट वर्थ (अनुमान)लगभग $15 मिलियन
विशेष पहचानयथार्थवादी अभिनय और अलग किरदारों के लिए प्रसिद्ध

शुरुआती जीवन

नवाजुद्दीन सिद्दीकी का शुरुआती जीवन किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। उनका जन्म 19 मई 1974 को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के एक छोटे से कस्बे बुढ़ाना में हुआ था।

किसान परिवार: नवाज एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखते थे। उनके पिता किसान थे और नवाज अपने 8 भाई-बहनों में सबसे बड़े थे।

पढ़ाई-लिखाई: उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव में की और फिर हरिद्वार के गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय से केमिस्ट्री (Chemistry) में ग्रेजुएशन किया।

केमिस्ट की नौकरी: पढ़ाई पूरी करने के बाद, उन्होंने वडोदरा (गुजरात) में एक साल तक केमिस्ट के तौर पर नौकरी की, लेकिन उनका मन रसायनों में नहीं लगा।

दिल्ली का सफर और वॉचमैन की नौकरी: अभिनय का शौक उन्हें दिल्ली ले आया। यहाँ गुजारा करने के लिए उन्होंने लगभग डेढ़ साल तक एक ऑफिस में वॉचमैन (चौकीदार) की नौकरी की।

NSD में दाखिला: दिल्ली में थिएटर देखते-देखते उनका रुझान अभिनय की तरफ बढ़ा। उन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) में एडमिशन लिया और 1996 में वहां से एक्टिंग की बारीकियां सीखकर बाहर निकले।

शिक्षा

नवाजुद्दीन सिद्दीकी की शिक्षा काफी दिलचस्प है। उन्होंने एक छोटे से कस्बे से निकलकर बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता बनने तक का सफर तय किया है। उनकी शुरुआती स्कूली शिक्षा उनके गाँव के ही एक स्थानीय स्कूल से हुई।

डिग्री: बैचलर ऑफ साइंस (B.Sc.)

विषय: केमिस्ट्री (Chemistry)

यूनिवर्सिटी: उन्होंने उत्तराखंड की गुरुकुल कांगड़ी यूनिवर्सिटी (हरिद्वार) से अपनी ग्रेजुएशन पूरी की।

पहली नौकरी :

पढ़ाई पूरी करने के बाद, उन्होंने कुछ समय तक वडोदरा (गुजरात) में एक केमिस्ट के रूप में काम किया। हालांकि, उनका मन हमेशा से अभिनय (Acting) में था।

एक्टिंग की पढ़ाई :

अभिनय सीखने के लिए वह दिल्ली आ गए और वहां के सबसे मशहूर संस्थान में दाखिला लिया

संस्थान: नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD), दिल्ली।

यहाँ से उन्होंने एक्टिंग की बारीकियां सीखीं और 1996 में अपनी ग्रेजुएशन पूरी की।

संघर्ष का दौर

नवाजुद्दीन सिद्दीकी का संघर्ष किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। उन्होंने करीब 12 से 15 साल तक छोटे-मोटे रोल किए और गरीबी का सामना किया।

  1. दिल्ली में चौकीदार की नौकरी :

नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) में जाने के लिए उन्हें थियेटर का अनुभव चाहिए था। उस दौरान पैसों की बहुत तंगी थी, इसलिए उन्होंने दिल्ली में एक ऑफिस में चौकीदार (Watchman) के रूप में काम किया ताकि वह अपना गुजारा कर सकें और एक्टिंग भी सीख सकें।

  1. मुंबई का शुरुआती दौर (1999 – 2004) :

जब वह मुंबई आए, तो उन्हें कई दिनों तक भूखे पेट रहना पड़ा। उनके पास रहने के लिए जगह नहीं थी, इसलिए वह अपने एक सीनियर के साथ इस शर्त पर रहे कि वह उनके लिए खाना बनाएंगे।

  1. छोटे और अनजान रोल : नवाजुद्दीन ने कई सालों तक ऐसे रोल किए जिन्हें लोग नोटिस भी नहीं करते थे:

सरफरोश (1999): इसमें उन्होंने एक छोटा सा रोल किया था जिसमें पुलिस उन्हें पकड़कर ले जाती है।

मुन्ना भाई MBBS: इसमें उन्होंने एक जेबकतरे (Pocket-mar) का किरदार निभाया था।

उन्हें अक्सर भीड़ का हिस्सा बनाया जाता था या बस एक-दो डायलॉग वाले रोल मिलते थे।

  1. रिजेक्शन का सामना :

उन्हें अक्सर उनके लुक्स (रंग और कद) की वजह से रिजेक्ट कर दिया जाता था। लोग कहते थे कि वह एक “हीरो” जैसे नहीं दिखते। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपनी एक्टिंग पर भरोसा रखा।

  1. पहचान दिलाने वाली फिल्में :

सालों की मेहनत के बाद, 2012 उनके लिए “टर्निंग पॉइंट” साबित हुआ:

गैंग्स ऑफ वासेपुर (Gangs of Wasseypur): इस फिल्म ने उन्हें रातों-रात सुपरस्टार बना दिया।

कहानी (Kahaani): इसमें उनके पुलिस अफसर के किरदार को बहुत पसंद किया गया।

एक्टिंग करियर :

नवाजुद्दीन सिद्दीकी का एक्टिंग करियर कड़ी मेहनत और सब्र की एक मिसाल है। उन्होंने ज़मीन से उठकर आसमान तक का सफ़र तय किया है।

  1. डेब्यू ( शुरुआत) :

फिल्म: ‘सरफरोश’ (Sarfarosh, 1999)

किरदार: उन्होंने इस फिल्म में एक बहुत छोटा सा रोल निभाया था। वह एक अपराधी/मुखबिर बने थे जिससे आमिर खान पूछताछ करते हैं। इसके बाद उन्होंने ‘शूल’ और ‘मुन्ना भाई MBBS’ जैसी फिल्मों में भी छोटे-छोटे कैमियो किए।

  1. ब्रेकथ्रू ( बड़ी पहचान) :

नवाज़ को असली पहचान मिलने में लगभग 12-13 साल लग गए। उनके करियर के टर्निंग पॉइंट ये रहे:

ब्लैक फ्राइडे (2007): अनुराग कश्यप की इस फिल्म में उनके काम को समीक्षकों ने नोटिस किया।

पीपली लाइव (2010): एक न्यूज़ रिपोर्टर के रोल में उन्हें आम दर्शकों के बीच पहचान मिली।

गैंग्स ऑफ वासेपुर (2012): इस फिल्म में ‘फैजल खान’ के किरदार ने उन्हें रातों-रात सुपरस्टार बना दिया। इसी साल आई ‘कहानी’ (Kahaani) फिल्म ने भी उन्हें घर-घर में मशहूर कर दिया।

करियर ग्रोथ ( तरक्की) :

ब्रेकथ्रू के बाद नवाज़ ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और अपनी रेंज साबित की:

वर्सेटिलिटी: उन्होंने ‘बजरंगी भाईजान’ में एक मजाकिया पत्रकार (चाँद नवाब) का रोल किया, तो ‘रमन राघव 2.0’ में एक डरावने सीरियल किलर का।

लीड रोल्स: ‘मांझी: द माउंटेन मैन’, ‘मंटो’ और ‘ठाकरे’ जैसी फिल्मों से उन्होंने साबित किया कि वह पूरी फिल्म अपने दम पर खींच सकते हैं।

OTT की दुनिया: ‘सेक्रेड गेम्स’ (Sacred Games) के ‘गणेश गायतोंडे’ के किरदार ने उन्हें इंटरनेशनल स्टार बना दिया।

हालिया काम (2024-2026) :

नवाज़ अब भी अपनी एक्टिंग के साथ नए प्रयोग कर रहे हैं:

रौतू का राज (2024): इसमें उन्होंने एक शांत पुलिस ऑफिसर की भूमिका निभाई।

सैंधव (2024): इस तेलुगु फिल्म के जरिए उन्होंने साउथ इंडस्ट्री में भी अपनी छाप छोड़ी।

हड्डी (Haddi): इसमें उन्होंने एक ट्रांसजेंडर का चुनौतीपूर्ण किरदार निभाकर सबको चौंका दिया।

आगामी फिल्में (2025-26): आने वाले समय में वह ‘तुंबाड 2’ (Tumbbad 2) जैसी बड़ी फिल्मों और ‘सेक्शन 108’ जैसे प्रोजेक्ट्स में नज़र
आएंगे।

सबसे मशहूर फिल्में :

गैंग्स ऑफ वासेपुर (Gangs of Wasseypur, 2012): इस फिल्म में ‘फैजल खान’ का किरदार उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ था। “बाप का, दादा का, भाई का… सबका बदला लेगा रे तेरा फैजल” उनका यह डायलॉग आज भी घर-घर में मशहूर है।

मांझी: द माउंटेन मैन (Manjhi: The Mountain Man, 2015): इसमें उन्होंने दशरथ मांझी का किरदार निभाया, जिन्होंने अकेले पहाड़ काटकर रास्ता बनाया था। उनका डायलॉग, “भगवान के भरोसे मत बैठिए, क्या पता भगवान हमारे भरोसे बैठा हो”, काफी प्रेरणादायक रहा।

बजरंगी भाईजान (Bajrangi Bhaijaan, 2015): सलमान खान की इस फिल्म में उन्होंने पाकिस्तानी पत्रकार ‘चाँद नवाब’ का रोल किया। उनकी कॉमेडी और सादगी ने दर्शकों का दिल जीत लिया।

मंटो (Manto, 2018): मशहूर लेखक सआदत हसन मंटो के जीवन पर आधारित इस फिल्म में नवाज ने अपनी बेहतरीन अदाकारी से सबको चौंका दिया।

बदलापुर (Badlapur, 2015): इस फिल्म में उन्होंने ‘लायक’ नाम के विलेन का किरदार निभाया, जो मुख्य हीरो पर भी भारी पड़ा।

वेब सीरीज :

सेक्रेट गेम्स (Sacred Games, 2018-2019): नेटफ्लिक्स की इस सीरीज में ‘गणेश गायतोंडे’ के रोल ने उन्हें इंटरनेशनल पहचान दिलाई। उनका डायलॉग “कभी-कभी लगता है कि अपुन ही भगवान है” इंटरनेट पर छा गया था।

सीरियस मेन (Serious Men, 2020): इस फिल्म के लिए उन्हें ‘इंटरनेशनल एमी अवार्ड्स’ में बेस्ट एक्टर के लिए नॉमिनेट किया गया था।

हालिया और आने वाले प्रोजेक्ट्स :

नवाजुद्दीन आज भी अलग-अलग तरह के किरदारों के साथ प्रयोग कर रहे हैं

हड्डी (Haddi, 2023): इसमें उन्होंने एक ट्रांसजेंडर का किरदार निभाया, जिसके लिए उनके लुक की बहुत चर्चा हुई।

रौतू का राज (Rautu Ka Raaz, 2024): एक मर्डर मिस्ट्री जिसमें उन्होंने एक शांत और चतुर पुलिस अफसर का रोल किया।

थम्मा (Thamma, 2025): आयुष्मान खुराना और रश्मिका मंदाना के साथ इस हॉरर-कॉमेडी में वह एक दिलचस्प भूमिका में नजर आएंगे।

तुंबाड 2 (Tumbbad 2, 2026): हालिया खबरों के अनुसार, वह इस कल्ट क्लासिक फिल्म के सीक्वल में एक अहम और रहस्यमयी किरदार निभा रहे हैं।

नवाज के मशहूर डायलॉग्स :

“मौत को छू के टक से वापस आ सकता हूँ।” (किक)

“तुमसे ना हो पाएगा।” (गैंग्स ऑफ वासेपुर)

“अपुन की डिक्शनरी में ‘हार’ नाम का शब्द ही नहीं है।” (सेक्रेट गेम्स)

एक्टिंग स्टाइल और स्किल्स :

नवाजुद्दीन सिद्दीकी को आज के दौर का “एक्टिंग स्कूल” माना जाता है। उनकी एक्टिंग की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वह पर्दे पर एक्टिंग करते हुए नहीं, बल्कि उस किरदार को जीते हुए लगते हैं।

  1. स्वाभाविकता (Natural Acting) :

नवाज़ की सबसे बड़ी खूबी उनका ‘नेचुरल’ होना है। वह चिल्लाकर या बढ़ा-चढ़ाकर एक्टिंग करने के बजाय बहुत ही शांति से अपनी बात कहते हैं। उनके चेहरे के हाव-भाव (Expressions) इतने असली होते हैं कि दर्शक उनसे तुरंत जुड़ जाते हैं।

  1. आँखों से बात करना (Acting with Eyes) :

नवाजुद्दीन अपनी आँखों का इस्तेमाल बहुत प्रभावी ढंग से करते हैं। चाहे ‘रमन राघव’ में एक सनकी कातिल की डरावनी आँखें हों या ‘मंटो’ में एक भावुक लेखक की गहराई, उनकी आँखें बिना बोले बहुत कुछ कह देती हैं।

  1. ऑब्जर्वेशन स्किल (Observation – गौर से देखना) :

नवाज़ असल जिंदगी के लोगों को बहुत गौर से देखते हैं। वह कहते हैं कि वह बस स्टॉप, रेलवे स्टेशन या सड़कों पर आम लोगों को देखते हैं और उनके चलने, बोलने और बैठने के तरीके को सीखकर अपने किरदारों में डालते हैं।

उदाहरण: ‘बजरंगी भाईजान’ के चाँद नवाब का किरदार उन्होंने एक असली पाकिस्तानी रिपोर्टर के वीडियो को देखकर तैयार किया था।

  1. मेथड एक्टिंग (Method Acting) :

वह किसी भी रोल में पूरी तरह डूब जाते हैं।

मिसाल के तौर पर: फिल्म ‘हड्डी’ (Haddi) के लिए उन्होंने घंटों तक मेकअप कराया और हफ्तों तक किन्नरों के बीच रहकर उनके व्यवहार को समझा।

मांझी फिल्म के लिए वह पहाड़ों पर रहे ताकि उस कठोर जीवन को महसूस कर सकें।

आवाज़ और भाषा पर पकड़ (Voice & Diction) :

नवाज़ की आवाज़ बहुत साफ़ और प्रभावशाली है। वह अपनी आवाज़ की टोन (Tone) को किरदार के हिसाब से बदल लेते हैं। चाहे ठेठ यूपी की भाषा हो (गैंग्स ऑफ वासेपुर) या शुद्ध उर्दू (मंटो), वह हर भाषा को बहुत खूबसूरती से बोलते हैं।

पुरस्कारों और उपलब्धियां :

  1. राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (National Film Awards) :

यह भारत का सबसे प्रतिष्ठित फिल्म पुरस्कार है।

Special Jury Award (2012): उन्हें एक साथ चार फिल्मों, ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’, ‘कहानी’, ‘तलाश’ और ‘देख इंडियन सर्कस’ में उनके बेहतरीन अभिनय के लिए यह सम्मान मिला।

  1. फिल्मफेयर और अन्य बड़े भारतीय पुरस्कार :

Filmfare Award: फिल्म ‘द लंचबॉक्स’ (2013) के लिए उन्हें ‘बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर’ का अवॉर्ड मिला।

Filmfare OTT Awards: उन्होंने लगातार दो साल ओटीटी पर धमाल मचाया:

2020: ‘रात अकेली है’ के लिए बेस्ट एक्टर।

2021: ‘सीरियस मेन’ के लिए बेस्ट एक्टर।

IIFA Award: फिल्म ‘मॉम’ (2018) के लिए उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का पुरस्कार मिला।

Zee Cine Awards: ‘बजरंगी भाईजान’ (कॉमेडी रोल) और ‘बदलापुर’ (विलेन रोल) के लिए उन्हें सम्मानित किया गया।

अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियां (International Recognition) :

नवाज दुनिया के उन गिने-चुने भारतीय अभिनेताओं में से हैं जिनकी पहचान सात समंदर पार भी है

कान्स फिल्म फेस्टिवल (Cannes): वह दुनिया के इकलौते अभिनेता हैं जिनकी 8 फिल्में कान्स में दिखाई जा चुकी हैं। साल 2022 में उन्हें कान्स में ‘Excellence in Cinema’ अवॉर्ड से नवाजा गया।

International Emmy Nomination: वेब सीरीज ‘सीरियस मेन’ के लिए उन्हें दुनिया के सबसे बड़े टीवी/वेब अवॉर्ड ‘एम्मी’ में बेस्ट एक्टर के लिए नॉमिनेट किया गया था।

Asia Pacific Screen Awards: उन्हें फिल्म ‘मंटो’ (2018) और ‘रमन राघव 2.0’ के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड मिला।

निजी ज़िन्दगी :

नवाजुद्दीन सिद्दीकी की निजी जिंदगी (Personal Life) काफी उतार-चढ़ाव भरी रही है। एक छोटे से गाँव से निकलकर मायानगरी मुंबई के बड़े स्टार बनने तक

  1. परिवार और पृष्ठभूमि :

जन्म: नवाजुद्दीन का जन्म 19 मई, 1974 को उत्तर प्रदेश के बुढाना (मुजफ्फरनगर) के एक जमींदार परिवार में हुआ था।

भाई-बहन: वह अपने 8 भाई-बहनों में सबसे बड़े हैं। उनके पिता एक किसान थे।

साधारण जीवन: आज इतने बड़े स्टार होने के बावजूद, नवाज़ जब भी अपने गाँव जाते हैं, तो वह खेत में काम करना और ज़मीन पर बैठकर खाना पसंद करते हैं।

  1. वैवाहिक जीवन :

पत्नी: नवाज़ की शादी आलिया सिद्दीकी (जिन्हें अंजलि के नाम से भी जाना जाता है) से हुई थी।

बच्चे: उनके दो बच्चे हैं, एक बेटी (शोरा) और एक बेटा (यानी)। वह अपनी बेटी शोरा के बहुत करीब हैं और अक्सर उसके साथ अपनी तस्वीरें शेयर करते हैं।

विवाद: पिछले कुछ सालों में नवाज़ और उनकी पत्नी आलिया के बीच कानूनी विवाद और अनबन की खबरें मीडिया में काफी रहीं, जिससे उनकी निजी जिंदगी चर्चा का विषय बनी रही।

घर और शौक :

सपनों का महल: उन्होंने मुंबई में अपना एक आलीशान बंगला बनाया है, जिसका नाम उन्होंने अपने पिता की याद में ‘नवाब’ रखा है। इस घर का डिज़ाइन उन्होंने खुद तय किया था, जो उनके गाँव के घर की याद दिलाता है।

सादा रहन-सहन: उन्हें दिखावे वाली पार्टियाँ पसंद नहीं हैं। वह खाली समय में किताबें पढ़ना, वर्ल्ड सिनेमा देखना और अपने पुराने दोस्तों के साथ वक्त बिताना पसंद करते हैं।

विवाद :

  1. बायोग्राफी विवाद (An Ordinary Life, 2017) :

नवाजुद्दीन ने 2017 में अपनी आत्मकथा ‘An Ordinary Life’ रिलीज की थी, लेकिन इसे हफ्ते भर में ही वापस लेना पड़ा।

कारण: उन्होंने किताब में अपनी पूर्व प्रेमिकाओं (जैसे निहारिका सिंह और सुनीता रजवार) के साथ अपने रिश्तों का विस्तार से जिक्र किया था।

विवाद: उन महिलाओं ने नवाज पर आरोप लगाया कि उन्होंने उनकी अनुमति के बिना और मनगढ़ंत बातें लिखकर उनकी छवि खराब की है। भारी विरोध के बाद नवाज ने माफी मांगी और किताब को मार्केट से हटवा दिया।

  1. पत्नी आलिया सिद्दीकी के साथ विवाद (2020-2024) :

उनकी निजी जिंदगी का सबसे बड़ा विवाद उनकी पत्नी आलिया के साथ रहा:

तलाक और आरोप: आलिया ने नवाज और उनके परिवार पर गंभीर आरोप लगाए थे। मामला कोर्ट तक पहुँचा और सोशल मीडिया पर दोनों तरफ से काफी बयानबाजी हुई।

ताजा अपडेट (2024-2026): काफी समय तक चले कानूनी झगड़े और बच्चों की कस्टडी की लड़ाई के बाद, 2024 की शुरुआत में दोनों ने बच्चों के भविष्य के लिए अपने मतभेदों को सुलझाने और साथ आने का फैसला किया।

  1. भाई शमास सिद्दीकी के साथ अनबन (2023-2025) :

नवाजुद्दीन का अपने सगे भाई शमास के साथ भी गहरा विवाद रहा

धोखाधड़ी के आरोप: नवाज ने अपने भाई और पूर्व पत्नी पर ₹100 करोड़ का मानहानि (Defamation) का मुकदमा किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके भाई ने उनके मैनेजर रहते हुए उनके पैसों और प्रॉपर्टी का गलत इस्तेमाल किया।

कोर्ट का फैसला (2025): बॉम्बे हाई कोर्ट ने अक्टूबर 2025 में नवाज के इस ₹100 करोड़ के केस को खारिज कर दिया क्योंकि इस पर सही समय पर कार्यवाही (non-prosecution) नहीं हो पाई थी।

  1. विज्ञापनों और बयानों से जुड़े विवाद :

महाराष्ट्र पुलिस विज्ञापन (2024): अक्टूबर 2024 में नवाज एक ऑनलाइन पोकर गेम के विज्ञापन को लेकर विवादों में आए। उन पर आरोप लगा कि उन्होंने पुलिस की वर्दी पहनकर जुए (Gambling) को बढ़ावा दिया, जिससे पुलिस की छवि खराब हुई।

डिप्रेशन पर बयान (2023): उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि “गाँव में डिप्रेशन जैसी कोई चीज नहीं होती, यह शहरों की बीमारी है।” उनके इस बयान की सोशल मीडिया पर काफी आलोचना हुई और लोगों ने इसे मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनहीन बताया।

कुल संपत्ति :

नवाजुद्दीन सिद्दीकी का नेटवर्थ (Net Worth) और उनकी कमाई आज के समय में उनकी कड़ी मेहनत और सफलता का प्रमाण है।

  1. कुल संपत्ति (Net Worth 2026) :

अनुमानित संपत्ति: नवाजुद्दीन सिद्दीकी की कुल संपत्ति लगभग ₹160 करोड़ से ₹200 करोड़ के बीच है।

बढ़ोतरी: पिछले कुछ वर्षों में उनकी संपत्ति में काफी तेजी आई है, क्योंकि उन्होंने फिल्मों के साथ-साथ विज्ञापन और ब्रांड एंडोर्समेंट में भी अपनी जगह बनाई है।

  1. प्रति फिल्म फीस (Income Per Movie) :

फिल्म फीस: नवाज एक मुख्य भूमिका वाली फिल्म के लिए लगभग ₹6 करोड़ से ₹10 करोड़ तक चार्ज करते हैं।

सिद्धांत: उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि वह कुछ बड़ी फिल्में केवल पैसों के लिए करते हैं ताकि वह ‘मंटो’ जैसी फिल्में बिना फीस लिए या बहुत कम पैसों में कर सकें। उन्होंने यह भी साफ किया है कि अब वह ₹25 करोड़ मिलने पर भी छोटे रोल नहीं करेंगे।

  1. ब्रांड एंडोर्समेंट (Brand Endorsements) :

वह कई बड़े ब्रांड्स जैसे Tata Sky, Hyundai, Titan, और BigCash के चेहरे रहे हैं।

एक विज्ञापन (Ad) के लिए वह लगभग ₹1 करोड़ से ₹2 करोड़ तक की फीस लेते हैं।

  1. महंगी संपत्तियाँ (Major Assets)

‘नवाब’ बंगला (मुंबई): मुंबई के वर्सोवा (यारी रोड) में उनका अपना शानदार बंगला है, जिसका नाम उन्होंने अपने पिता की याद में ‘नवाब’ रखा है। इसकी कीमत ₹12.8 करोड़ से भी अधिक है। यह बंगला उनके गाँव के घर की याद दिलाता है।

खेती की ज़मीन (गाँव): मार्च 2026 में नवाज ने अपने पैतृक गाँव बुढाना में 55 बीघा (लगभग 14 एकड़) खेती की ज़मीन ₹6 करोड़ में खरीदी है। वह वहाँ ऑर्गेनिक फार्मिंग (जैविक खेती) को बढ़ावा दे रहे हैं।

  1. कार कलेक्शन (Car Collection) :

उनके पास कुछ बेहतरीन लग्जरी गाड़ियाँ हैं

Mercedes-Benz Maybach GLS: जिसकी कीमत लगभग ₹1.14 करोड़ है।

BMW और Audi: उनके पास इन ब्रांड्स की भी प्रीमियम कारें हैं।

Ford Endeavor: वह अक्सर अपनी इस सफ़ेद गाड़ी में सफर करना पसंद करते हैं।

5 बेहद दिलचस्प बातें :

  1. रणवीर सिंह को दी थी एक्टिंग ट्रेनिंग :

बहुत कम लोग जानते हैं कि जब रणवीर सिंह अपनी पहली फिल्म ‘बैंड बाजा बारात’ की तैयारी कर रहे थे, तब उन्हें एक्टिंग की बारीकियां सिखाने के लिए नवाजुद्दीन सिद्दीकी को बतौर ‘एक्टिंग कोच’ हायर किया गया था। आज दोनों ही इंडस्ट्री के बड़े सितारे हैं।

  1. कान्स (Cannes) में सालों तक एक ही सूट पहना :

नवाज दुनिया के इकलौते ऐसे अभिनेता हैं जिनकी 8 फिल्में कान्स फिल्म फेस्टिवल में दिखाई गई हैं। एक समय उनके पास इतने पैसे नहीं थे कि वह नए कपड़े खरीद सकें, इसलिए उन्होंने कई सालों तक कान्स के रेड कार्पेट पर अपना वही एक पुराना सूट पहनकर शिरकत की, जिसे उन्होंने स्थानीय दर्जी से सिलवाया था।

  1. ‘सरफरोश’ का रोल किस्मत से मिला :

उनकी पहली फिल्म ‘सरफरोश’ (1999) का रोल दरअसल उनके एक दोस्त को मिला था। लेकिन वह दोस्त शूटिंग पर नहीं पहुँच पाया और ऐन वक्त पर नवाज को वह छोटा सा रोल दे दिया गया। उस 40 सेकंड के सीन ने उनकी किस्मत का दरवाजा खोल दिया।

  1. रहने के बदले ‘खाना बनाने’ की शर्त :

संघर्ष के दिनों में उनके पास रहने के लिए घर नहीं था। वह अपने एक सीनियर के अपार्टमेंट में इस शर्त पर रहने लगे थे कि वह उनके लिए रोज़ाना खाना बनाएंगे। वह अपनी मेहनत के साथ-साथ अपनी कुकिंग स्किल्स के दम पर भी मुंबई में टिके रहे।

  1. 12 साल बाद बदले ‘घूरे’ के दिन :

नवाज अक्सर अपनी मां की एक बात याद करते हैं। जब वह संघर्ष से थक जाते थे, तो उनकी मां कहती थी, “बेटा, 12 साल में तो घूरे (कचरे के ढेर) के दिन भी बदल जाते हैं, तू तो इंसान है।” इत्तेफाक से, नवाज को अपनी बड़ी पहचान ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ (2012) से मिली, जो उनके करियर के ठीक 12 साल बाद आई थी।

लेखिका – आरुषि शर्मा

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Madhuri
Madhurihttps://reportbharathindi.com/
पत्रकारिता में 6 वर्षों का अनुभव है। पिछले 3 वर्षों से Report Bharat से जुड़ी हुई हैं। इससे पहले Raftaar Media में कंटेंट राइटर और वॉइस ओवर आर्टिस्ट के रूप में कार्य किया। Daily Hunt के साथ रिपोर्टर रहीं और ETV Bharat में एक वर्ष तक कंटेंट एडिटर के तौर पर काम किया। लाइफस्टाइल, इंटरनेशनल और एंटरटेनमेंट न्यूज पर मजबूत पकड़ है।
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