टीसीएस कांड
नासिक स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के कार्यालय में पिछले चार वर्षों से महिला कर्मचारियों के लव जिहाद और जबरन मतांतरण का एक संगठित रैकेट सक्रिय था। इस पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ करने में सात महिला पुलिसकर्मियों ने निर्णायक भूमिका निभाई।
इन पुलिसकर्मियों ने अपनी असली पहचान छिपाकर उक्त कंपनी में नौकरी के लिए आवेदन किया और करीब एक सप्ताह तक वहां काम करते हुए सारी गतिविधियों की प्रत्यक्ष जानकारी जुटाई। उनकी इस साहसिक कार्रवाई के बाद अब तक छह मजहबियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
परिवार की सतर्कता से खुला राज
मामला तब सामने आया जब एक महिला कर्मचारी के व्यवहार में अचानक बदलाव देखा गया। जींस और टॉप पहनने वाली उस महिला ने अचानक सलवार सूट पहनना शुरू किया और रमजान के महीने में रोजा रखने लगी, जिससे उसके सनातनी परिवार को संदेह हुआ।

परिवार ने विश्वास में लेकर उससे पूछताछ की तो कार्यालय में चल रही गतिविधियों की परतें खुलने लगीं। परिवार के दबाव में महिला ने नासिक के मुंबई नाका पुलिस थाने में यौन शोषण, मतांतरण के प्रयास और जबरन गोमांस खिलाने की प्राथमिकी दर्ज कराई।
सुबूतों की कमी से जूझ रही थी पुलिस
एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती सुबूत जुटाने की थी। एक बहुराष्ट्रीय आईटी कंपनी के कार्यालय में बिना ठोस आधार के प्रवेश करना संभव नहीं था, इसलिए पुलिस को एक अलग रणनीति अपनानी पड़ी।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के निर्देश पर सात महिला पुलिसकर्मियों की एक विशेष टीम गठित की गई और उन्हें उस कंपनी में नौकरी दिलाने की योजना बनाई गई। कंपनी के टीम लीडर्स को पहले से ही मध्यमवर्गीय जरूरतमंद महिलाओं की तलाश रहती थी।
आसानी से मिली नौकरी, एक सप्ताह तक जुटाए सुबूत
बदली हुई पहचान के साथ नौकरी के लिए आवेदन करने वाली सातों पुलिसकर्मियों को बिना किसी अड़चन के तत्काल नियुक्ति मिल गई। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि कंपनी के भीतर किस प्रकार के लोगों को लक्षित किया जा रहा था।
वहां काम करते हुए इन पुलिसकर्मियों ने करीब एक सप्ताह तक समस्त गतिविधियों पर नजर रखी। कार्यालय में लगे 40 से अधिक सीसीटीवी कैमरों का फुटेज भी एकत्र किया गया, जो बाद में निर्णायक साक्ष्य साबित हुआ।
आठ पीड़ित, छह गिरफ्तार, एक फरार
सात महिला पुलिसकर्मियों की जांच के बाद सात अन्य महिला कर्मचारियों और एक पुरुष कर्मचारी की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई। शिकायत करने वाली आठ महिलाओं में से छह अविवाहित और दो विवाहित हैं।
अब तक छह आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें से पांच को न्यायिक हिरासत में और एक को 13 अप्रैल तक पुलिस हिरासत में भेजा गया है। एक महिला आरोपित अभी भी फरार बताई जा रही है।
दुष्कर्म से लेकर जबरन धर्म परिवर्तन तक के आरोप
एक पीड़िता ने बताया कि दो से अधिक मजहबी आरोपितों ने उसे कार्यालय के बाहर ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। अन्य महिला कर्मचारियों ने बैठकों के दौरान अथवा कार्यालय के सुनसान स्थानों पर अश्लील इशारों और छेड़छाड़ के आरोप लगाए हैं।
सभी आरोपित मजहबी हैं। उन पर हिंदू देवी-देवताओं के प्रति अपमानजनक टिप्पणियां करने के भी आरोप हैं। महिला कर्मचारियों को जबरन गोमांस खिलाने और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने के भी मामले सामने आए हैं। रमजान में हिन्दू लड़कियों को निशाना बना रहे थे।
एचआर मैनेजर का जवाब: “सभी कंपनियों में ऐसा ही चलता है”
पीड़िताओं ने अपने बयान में बताया कि जब उन्होंने कंपनी की एचआर मैनेजर अश्विनी चनानी को मेल भेजकर और व्यक्तिगत रूप से मिलकर कई बार शिकायत की, तो उन्हें यह कहकर चुप करा दिया गया कि सभी कंपनियों में इस तरह की बातें होती रहती हैं।
पीड़िताओं की शिकायतों को दबाने का यह रवैया अब खुद अश्विनी चनानी पर भारी पड़ गया है। मामले की आंच पहुंचने पर वह अपने घर पुणे भाग गई थी, लेकिन गुरुवार को पुणे से उसे हिरासत में लेकर करीब चार घंटे तक पूछताछ की गई।
भाजयुमो का प्रदर्शन, मुख्यमंत्री ने दिए जांच के आदेश
इस मामले को लेकर शुक्रवार को भारतीय जनता युवा मोर्चा की ओर से कंपनी के बाहर लंबे समय तक प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन में शामिल महिला कार्यकर्ताओं ने सभी आरोपितों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की मांग की।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पूरे प्रकरण का संज्ञान लेते हुए मामले की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं। यह मामला अब केवल एक कंपनी के भीतर की घटना नहीं रहा, बल्कि संगठित षड्यंत्र की आशंकाओं के कारण व्यापक सामाजिक चिंता का विषय बन गया है।

