वर्ष 2026 भारत-जर्मनी संबंधों के इतिहास में एक नई ऊँचाई लेकर आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के बीच हुई उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक ने दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा दी।
यह मुलाकात केवल औपचारिक कूटनीति तक सीमित नहीं रही, बल्कि वैश्विक राजनीति, आर्थिक सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का सशक्त प्रतीक बनकर उभरी।
बदलते अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में भारत और जर्मनी ने साझा मूल्यों और दीर्घकालिक सहयोग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से दोहराया।
भारत-जर्मनी के 75 वर्षों का स्वर्णिम अध्याय
मोदी-मर्ज की ‘काइट डिप्लोमेसी’: मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मर्ज का यह दौरा भारत-जर्मनी के बीच गहरे होते संबंधों का प्रतीक है, दोनों देश इस साल राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष और रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पुरे होने का जश्न मना रहे है।
प्रधानमंत्री मोदी और चांसलर मर्ज की बैठक में रक्षा सहयोग, स्वच्छ ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, उन्नत तकनीक, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और इंडो-पैसिफिक रणनीति जैसे अहम मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई।
दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि भारत-जर्मनी संबंध केवल व्यापारिक साझेदारी नहीं, बल्कि लोकतंत्र, शांति, नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था और सतत विकास के साझा विजन पर आधारित हैं।
यह संवाद इस संकेत के रूप में देखा जा रहा है कि भारत और जर्मनी आने वाले वर्षों में वैश्विक नेतृत्व की भूमिका को मिलकर आकार देंगे।
अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव-2026 का किया उद्द्घाटन
इस ऐतिहासिक दौरे का सबसे आकर्षक दृश्य गुजरात के साबरमती रिवरफ्रंट पर देखने को मिला, जहां प्रधानमंत्री मोदी और जर्मन चांसलर ने अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव-2026 का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया।
रंग-बिरंगी पतंगों से सजा आसमान भारत की सांस्कृतिक विविधता और ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना को जीवंत करता नजर आया।
यह आयोजन भारत की सॉफ्ट पावर और सांस्कृतिक कूटनीति का ऐसा प्रदर्शन था, जिसने दुनिया को एक सकारात्मक और समावेशी संदेश दिया।
साबरमती आश्रम में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को अर्पित की श्रद्धांजलि
मोदी-मर्ज की ‘काइट डिप्लोमेसी’: पतंग महोत्सव से पहले प्रधानमंत्री मोदी और चांसलर मर्ज ने साबरमती आश्रम जाकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
यह क्षण भारत के स्वतंत्रता संग्राम, अहिंसा और वैश्विक शांति के मूल्यों की याद दिलाने वाला था।
इसके बाद दोनों नेता साबरमती रिवरफ्रंट पहुंचे, जहां उन्होंने महिला कारीगरों से बातचीत की, पतंग निर्माण की प्रक्रिया को समझा और खुले वाहन में सवार होकर उत्सव का आनंद लिया।
उद्योगपतियों की मौजूदगी में हुई व्यवसाय निवेश पर चर्चा
मोदी-मर्ज की ‘काइट डिप्लोमेसी’: जर्मन चांसलर के साथ भारत पहुंचे दर्जनों शीर्ष उद्योगपतियों ने इस दौरे को आर्थिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण बना दिया।
ऑटोमोबाइल, ग्रीन हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टर, इंफ्रास्ट्रक्चर और स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में संभावित निवेश पर गहन चर्चा हुई।
यह ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियानों के लिए अंतरराष्ट्रीय विश्वास और समर्थन का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव में कई देशों ने लिया हिस्सा
गुजरात सरकार के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव-2026 में 50 देशों के 135 पतंगबाज और भारत से लगभग 1,000 पतंग प्रेमी भाग ले रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, भारत के 13 राज्यों के 65 और गुजरात के 16 जिलों से कुल 871 पतंग प्रेमी भी इस आयोजन में पहुँचे हैं।
पिछले दिनों इन प्रतिभागियों ने राजकोट, सूरत, धोलावीरा और ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ जैसे प्रमुख स्थलों का दौरा कर पर्यटकों को मंत्रमुग्ध किया।
अहमदाबाद में यह महोत्सव 14 जनवरी तक चलेगा। अनुमान है कि इस वर्ष पांच लाख से अधिक पर्यटक गुजरात पहुंचेंगे, जिससे पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।
पतंगों के साथ भारत के आत्मविश्वास को भी मिली नई उड़ान
पतंग महोत्सव के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और चांसलर मर्ज की सहज और आत्मीय मौजूदगी ने यह साबित कर दिया कि प्रभावी कूटनीति केवल बंद कमरों में नहीं, बल्कि जनता, संस्कृति और परंपराओं से जुड़कर भी मजबूत होती है।
साबरमती की हवा में उड़ती पतंगें भारत-जर्मनी के विश्वास, सहयोग और उज्ज्वल भविष्य की प्रतीक बन गईं।
यह पूरा आयोजन इस बात का प्रमाण है कि भारत अब वैश्विक मंच पर केवल उभरती शक्ति नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार और प्रभावशाली नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित हो चुका है।
जर्मनी जैसी तकनीकी और औद्योगिक महाशक्ति के साथ भारत की गहरी साझेदारी आने वाले वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था, राजनीति और नवाचार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।
साबरमती रिवरफ्रंट से उठी यह पतंग केवल उत्सव की नहीं, बल्कि भारत के आत्मविश्वास, विकास और वैश्विक नेतृत्व की उड़ान है जो 2026 में भारत की नई पहचान को दुनिया के सामने मजबूती से स्थापित करती है।

