Thursday, February 12, 2026

जापान में पीएम मोदी को मिली अनोखी भेंट, चौंका चीन

प्रधानमंत्री मोदी को मिली दारुमा गुड़िया

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जापान की दो दिवसीय यात्रा के दौरान एक अनोखा उपहार मिला। यह उपहार था दारुमा गुड़िया, जिसे शोरिनजान दारुमा मंदिर के मुख्य पुजारी ने उन्हें भेंट किया।

खास बात यह है कि इस गुड़िया की ऐतिहासिक जड़ें भारत से जुड़ी हुई हैं।

दारुमा गुड़िया का भारतीय संबंध

दारुमा गुड़िया की प्रेरणा दक्षिण भारत के तमिलनाडु के कांचीपुरम में जन्मे बौद्ध भिक्षु बोधिधर्म से जुड़ी है। 440 ईस्वी में जन्मे बोधिधर्म ने नौ साल तक गहन ध्यान साधना की।

माना जाता है कि इस दौरान उन्होंने शरीर के अंगों का उपयोग नहीं किया, जिससे अंगहीन गुड़िया की परंपरा शुरू हुई।

बोधिधर्म से मूर्ति तक का सफर

शोरिनजान दारुमा मंदिर के संस्थापक पहले बोधिधर्म का चित्र बनाते थे और अनुयायी उसे दुर्भाग्य से बचने के लिए अपने पास रखते थे।

धीरे-धीरे यह चित्रण मूर्ति का रूप लेने लगा और आज यह जापान में दारुमा गुड़िया के रूप में लोकप्रिय है, जिसे सौभाग्य और दृढ़ संकल्प का प्रतीक माना जाता है।

आंखों से जुड़ी खास परंपरा

दारुमा गुड़िया की सबसे खास बात इसकी खाली आंखें हैं। परंपरा के अनुसार, जब कोई व्यक्ति इसे खरीदता है तो अपनी मनोकामना या लक्ष्य तय करके बाईं आंख में काली स्याही भरता है।

जैसे ही उसकी मनोकामना पूरी होती है, दाहिनी आंख को भी रंग दिया जाता है। इस प्रकार यह गुड़िया लक्ष्य-पूर्ति और सफलता का प्रतीक मानी जाती है।

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Samudra
Samudra
लेखक 'भारतीय ज्ञान परंपरा' के अध्येता हैं। वे पिछले एक दशक से सार्वजनिक विमर्श पर विश्लेषणात्मक लेखन कर रहे हैं। सांस्कृतिक सन्दर्भ में समाज, राजनीति, विचारधारा, शिक्षा, धर्म और इतिहास के प्रमुख प्रश्नों के रिसर्च बेस्ड प्रस्तुतिकरण और समाधान में वे पारंगत हैं। वे 'द पैम्फलेट' में दो वर्ष कार्य कर चुके हैं। वे विषयों को उनके ऐतिहासिक आधार, वैचारिक पृष्ठभूमि और दीर्घकालीन प्रभाव के स्तर पर परखते हैं। इसी कारण उनके राष्ट्रवादी लेख पाठक को नई दृष्टि और वैचारिक स्पष्टता भी देते हैं। उनके शोधपरक लेख अनेक मौकों पर राष्ट्रीय विमर्श की दिशा में परिवर्तनकारी सिद्ध हुए हैं।
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