Manoj Kumar: बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर और देश भक्त नेता मनोज कुमार का शुक्रवार की सुबह मुंबई के कोकिलाबेन अस्पलाल में 87 साल की उम्र में निधन हो गया है। वो लंबे समय से लिवर सिरोसिस नामक बीमारी से पीड़ित थे और स्वास्थ बिगड़ने के कारण उन्हें 21 फरवरी 2025 को अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
उनके बेटे कुणाल गोस्वामी ने बताया कि पिता की तबीयत लंबे समय से खराब चल रही थी, लेकिन अंतिम समय में उन्हें ज्यादा तकलीफ नहीं हुई और उन्होंने शांतिपूर्वक इस दुनिया को अलविदा कह दिया। उनका अंतिम संस्कार शनिवार को होगा।
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Manoj Kumar: ‘फैशन’ फिल्म से की करियर की शुरुआत
मनोज कुमार का असली नाम हरिकिशन गिरी गोस्वामी था, लेकिन फिल्मी दुनिया में वे ‘मनोज कुमार’ के नाम से मशहूर हुए। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1957 में फिल्म ‘फैशन’ से की थी। हालांकि उन्हें असली पहचान 1960 के दशक में मिली। जब उन्होंने देशभक्ति से प्रेरित फिल्मों की एक नई धारा शुरू की।
उनकी फिल्मों ‘उपकार’, ‘पूरब-पश्चिम’, ‘क्रांति’ और ‘रोटी कपड़ा और मकान’ ने उन्हें दर्शकों के बीच खास मुकाम दिलाया। इन फिल्मों की वजह से वे ‘भारत कुमार’ के नाम से लोकप्रिय हो गए। उनकी फिल्में न केवल मनोरंजन का साधन थीं, बल्कि उनमें राष्ट्रभक्ति, सामाजिक जिम्मेदारी और आम आदमी की समस्याओं को भी गहराई से दर्शाया गया था।
दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से नवाजा गया
मनोज कुमार सिर्फ अभिनेता ही नहीं, बल्कि एक संवेदनशील लेखक और कुशल निर्देशक भी थे। उनकी फिल्म ‘उपकार’ (1968) ने चार प्रमुख फिल्मफेयर पुरस्कार जीते—सर्वश्रेष्ठ फिल्म, सर्वश्रेष्ठ निर्देशक, सर्वश्रेष्ठ कहानी और सर्वश्रेष्ठ संवाद। अपने पूरे करियर में उन्होंने कुल सात फिल्मफेयर अवॉर्ड अपने नाम किए।
उनके सिनेमाई योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने 1992 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया। इसके बाद 2016 में उन्हें भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान ‘दादा साहेब फाल्के पुरस्कार’ भी प्रदान किया गया। ये सम्मान उनके सिनेमा के प्रति समर्पण और देशभक्ति की भावना को दर्शाते हैं।
फिल्मों से किया समाज की कमियों को उजागर
मनोज कुमार ने हिंदी सिनेमा को एक नया दृष्टिकोण दिया। उनकी फिल्मों में मनोरंजन के साथ-साथ सामाजिक संदेशों को भी प्रमुखता दी गई। वे अपनी कहानियों के जरिए समाज की कमियों को उजागर करते थे थे और दर्शकों को सोचने पर मजबूर करते थे।
उनकी फिल्मों ने न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर सफलता हासिल की, बल्कि लोगों के दिलों में भी जगह बनाई। उनकी देशभक्ति की भावना और सिनेमा के प्रति लगन आज भी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
मनोज कुमार का निधन भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के लिए अपूरणीय क्षति है। वे अपने कार्यों और आदर्शों के जरिए हमेशा याद किए जाएंगे। उनका जीवन और उनकी फिल्में आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी। उनकी विरासत हिंदी सिनेमा में एक सुनहरा अध्याय है, जो कभी मिट नहीं सकता।
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