Malaysia: मलेशिया में 130 साल पुराने मंदिर पर संकट नजर आ रहा है। मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में ऐतिहासिक मंदिर को जल्द तोड़कर दूसरी जगह भेजने की तैयारी चल रही है। ऐसा कहा जा रहा है कि जिस जमीन पर यह मंदिर बना हुआ है। उसे टेक्सटाइल कंपनी ने खरीद लिया है और अब यहां पर मस्जिद बनाना चाहती है। 27 मार्च को इसका शिलान्यास प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम करेंगे।
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Malaysia: मंदिर को किया जाएगा शिफ्ट
130 साल पुराना यह मंदिर देवी श्री पत्रा कालीअम्मा का है। यह मंदिर कई लोगों के आस्था का केंद्र रहा है। मंदिर प्रबंधन समिति के अनुसार जाकेल कंपनी पहले से ही मंदिर को दूसरी जगह स्थानांतरित करने के लिए बातचीत कर रही थी और उसने इस प्रक्रिया का पूरा खर्च उठाने की भी पेशकश की थी। 2021 में कंपनी को इस जमीन पर मस्जिद बनाने की अनुमति मिल गई थी, लेकिन जब तक मंदिर को शिफ्ट नहीं किया जाता है तब तक मस्जिद का निर्माण कार्य को रोका जाएगा।
मस्जिद का होने जा रहा शिलान्यास
अब जब मस्जिद का शिलान्यास होने जा रहा है, तो कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर इतनी जल्दी क्यों की जा रही है? ‘लॉयर्स फॉर लिबर्टी’ नामक संगठन के कार्यकारी निदेशक ज़ैद मलिक ने भी इस फैसले पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि नगर पालिका के बीच अभी भी बातचीत जारी है, फिर इतनी जल्दी मंदिर को हटाने की क्यों पड़ रही है? उन्होंने प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम पर भी मंदिर हटाने की जल्दबाजी करने का आरोप लगाया।
सरकार धार्मिक स्थलों के लिए उठाये कदम
यह मामला मलेशिया में धार्मिक समानता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों से जुड़ी पुरानी बहस को फिर से तेज कर रहा है। हिंदू समुदाय का मानना है कि सरकार को उनके धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिए कदम उठाने चाहिए। वहीं कई संगठनों का कहना है कि किसी भी धार्मिक स्थल को इस तरह से हटाना लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने जैसा है।
इस पूरे विवाद को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। कई लोग इसे धार्मिक भेदभाव बता रहे हैं, तो कुछ का मानना है कि सरकार को दोनों समुदायों के बीच संतुलन बनाकर कोई हल निकालना चाहिए। मंदिर हटाने और मस्जिद बनाने का मुद्दा अब राजनीतिक रूप भी ले सकता है, क्योंकि मलेशिया में धार्मिक मामलों को लेकर पहले भी विवाद होते रहे हैं।
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