Saturday, February 28, 2026

यूपी में सीएम योगी का न्याय मॉडल: माफिया नेटवर्क का हुआ ख़ात्मा, तुष्टिकरण से मुक्त होती न्याय व्यवस्था की कहानी

यूपी में सीएम योगी का न्याय मॉडल: सत्ता अपने आप में न तो अच्छी होती है और न बुरी। वह सिर्फ एक साधन है। उसका इस्तेमाल किस दिशा में होगा, यह पूरी तरह उस व्यक्ति की सोच पर निर्भर करता है जो कुर्सी पर बैठा है।

कानून वही रहता है, सिस्टम वही रहता है, संविधान वही रहता है लेकिन फैसले बदल जाते हैं। उत्तर प्रदेश इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जहाँ सत्ता के दो दौरों ने दो बिल्कुल अलग तस्वीरें पेश की हैं।

एक दौर वह था जब MY समीकरण राजनीति का केंद्र था और फैसले तुष्टिकरण के चश्मे से लिए जाते थे।

दूसरा दौर वह है जब वही कुर्सी योगी आदित्यनाथ के हाथों में आई और प्राथमिकता कानून-व्यवस्था, न्याय और राज्य की संप्रभुता बन गई।

आतंकी और राजनीति का खतरनाक खेल

यूपी में सीएम योगी का न्याय मॉडल: 2012 में, सत्ता में आते ही समाजवादी पार्टी की असली सोच खुलकर सामने आई। चुनावी घोषणा-पत्र में ही यह कहा गया कि आतंकवाद के मामलों में पकड़े गए “कथित मासूम मुस्लिम युवकों” को छोड़ा जाएगा।

सरकार बनते ही अप्रैल 2012 में 19 आरोपियों की रिहाई की प्रक्रिया शुरू हो गई।

इनमें वलीउल्लाह जैसे नाम शामिल थे, वही आतंकी जिसने 2006 में वाराणसी के संकटमोचन मंदिर में बम धमाका किया था।

जाँच एजेंसियों के अनुसार उसका संबंध बांग्लादेशी आतंकी संगठन HUJI से था। बाद में अदालत ने उसे फाँसी की सजा सुनाई, लेकिन उससे पहले उसे भी “मासूम” मानने की कोशिश की गई।

गोरखपुर सीरियल ब्लास्ट के आरोपी तारिक कासमी और पाकिस्तानी जासूस को शरण देने वाली सितारा बेगम के मामलों में भी यही रवैया दिखा।

हालात इतने बिगड़े कि इलाहाबाद हाईकोर्ट को सरकार को फटकार लगानी पड़ी। कोर्ट ने साफ कहा कि यह तय करना सरकार का काम नहीं कि कौन आतंकी है और कौन मासूम है?

दादरी केस: एक घटना, दो सरकारें, दो दृष्टिकोण

यूपी में सीएम योगी का न्याय मॉडल: साल 2015 में दादरी में अखलाक की भीड़ द्वारा हत्या हुई। उस समय उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की सरकार थी।

नतीजा यह हुआ कि लगभग दो दर्जन हिंदू युवकों को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया। केस वर्षों तक चला, लेकिन आज तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि हत्या किसने की।

बाद में यह तथ्य भी सामने आया कि अखलाक के घर में गौमांस पकाया गया था, इसके बावजूद गिरफ्तार किए गए युवक न्याय के लिए दर-दर भटकते रहे।

इन युवकों की ज़िंदगी पूरी तरह बर्बाद हो गई। किसी ने जमीन बेची, किसी ने घर।

इसी मामले में रवि नाम का एक युवक जेल में ही मर गया। उसकी माँ ने बाद में मीडिया को बताया कि उसके बेटे को जेल में अमानवीय यातनाएँ दी गईं। सवाल यह उठता है कि क्या यह न्याय था?

अब लगभग दस साल बाद, योगी सरकार ने संवैधानिक रास्ता अपनाते हुए 18 हिंदू युवकों पर से मुकदमे हटाने के लिए अदालत में अर्जी दी है।

18 दिसंबर को यानी आज इस पर सुनवाई होनी है। यह कदम दिखाता है कि सत्ता अगर चाहे तो न्याय को सुधार भी सकती है।

योगी युग में सत्ता ने छोड़ा माफिया की ढाल बनना

यूपी में सीएम योगी का न्याय मॉडल: योगी आदित्यनाथ के सत्ता में आने के बाद सबसे बड़ा बदलाव माफिया संस्कृति के खिलाफ दिखा। जिन अपराधियों को पहले राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ था, उनके खिलाफ खुली कार्रवाई शुरू हुई।

अवैध संपत्तियों पर बुलडोज़र चला, गैंगस्टर एक्ट और NSA का सख्त इस्तेमाल हुआ। अतीक अहमद, अशरफ, मुख्तार अंसारी, विकास दुबे, संजीव जीवा, मुकीम काला, और अनिल दुजाना जैसे माफिया नेटवर्क की कमर तोड़ी गई।

पुलिस और प्रशासन को खुली छूट दी गई कि अपराधी चाहे किसी भी जाति या मजहब का हो, कानून से नहीं बचेगा।

वहीं, सीएम योगी ने दावा किया है कि उनके शासन में “एक जिला, एक माफिया” की पुरानी व्यवस्था खत्म होकर अब “एक जिला, एक उत्पाद” का मॉडल लागू हो चूका है। और अब बचे हुए माफिया या तो जेल में हैं या राज्य छोड़कर भाग चुके हैं।

तुष्टिकरण बनाम जिम्मेदार राजनीति

यूपी में सीएम योगी का न्याय मॉडल: जहाँ एक तरफ पहले की सरकारों में बयान आते थे कि “मुसलमान बेटियाँ ही हमारी बेटियाँ हैं”, वहीं योगी सरकार ने बिना भेदभाव के यह दिखाया कि हर नागरिक समान है और कानून सबके लिए बराबर है।

योगी आदित्यनाथ ने सत्ता को वोट बैंक की बंधक बनने से मुक्त किया। उन्होंने यह साबित किया कि राज्य चलाने के लिए मज़बूत कानून व्यवस्था और साफ नीयत सबसे ज्यादा ज़रूरी है।

बदलाव सत्ता का नहीं, सही दिशा का है

यूपी में सीएम योगी का न्याय मॉडल: उत्तर प्रदेश में बदलाव केवल प्रशासनिक नहीं है, यह मानसिकता का बदलाव है। जहाँ पहले डर, तुष्टिकरण और समझौते थे, वहाँ अब कानून, भरोसा और कार्रवाई है।

योगी आदित्यनाथ का शासन इस बात का उदाहरण है कि अगर इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो सत्ता समाज को कमजोर नहीं बल्कि सुरक्षित बना सकती है।

यूपी में आज जो दिख रहा है, वह सिर्फ सरकार का कामकाज नहीं बल्कि सत्ता के सही इस्तेमाल की मिसाल है।

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Karnika Pandey
Karnika Pandeyhttps://reportbharathindi.com/
“This is Karnika Pandey, a Senior Journalist with over 3 years of experience in the media industry. She covers politics, lifestyle, entertainment, and compelling life stories with clarity and depth. Known for sharp analysis and impactful storytelling, she brings credibility, balance, and a strong editorial voice to every piece she writes.”
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