Saturday, January 31, 2026

लोह मंदिर फिर आया सुर्खियों में, जानें भगवान राम से ताल्लुक

लोह मंदिर फिर आया सुर्खियों में: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की राजधानी लाहौर में स्थित ऐतिहासिक लाहौर किले के भीतर मौजूद लोह मंदिर एक बार फिर चर्चा में है।

भगवान श्रीराम के बड़े पुत्र लव (लोह) को समर्पित इस प्राचीन मंदिर का हाल ही में पूर्ण रूप से जीर्णोद्धार कर इसे आम पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है।

यह कदम न केवल ऐतिहासिक संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि उपमहाद्वीप की साझा सांस्कृतिक विरासत को समझने का अवसर भी प्रदान करता है।

लव से जुड़ा लाहौर का संबंध

हिंदू मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम के पुत्र लव को लाहौर का संस्थापक माना जाता है। कहा जाता है कि “लव” या “लोह” के नाम पर ही इस नगर का नाम लाहौर पड़ा।

इसी परंपरा को जीवित रखते हुए लाहौर किले के भीतर लोह मंदिर की स्थापना की गई थी।

यह मंदिर खुले प्रांगण में स्थित है और इसके साथ एक स्मारक स्थल भी मौजूद है, जो इसकी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता को और गहराता है।

तीनों स्मारकों का एक साथ पुनर्निर्माण

इस मंदिर के संरक्षण और पुनर्स्थापन का कार्य World City Lahore Authority (WCLA) द्वारा किया गया, जिसमें कल्चरल सर्विस पाकिस्तान का सहयोग भी शामिल रहा।

लोह मंदिर के साथ-साथ सिख काल के हमाम और महाराजा रणजीत सिंह के अथदरा मंडप का जीर्णोद्धार भी इसी परियोजना के अंतर्गत पूरा किया गया।

इन तीनों स्मारकों का एक साथ पुनर्निर्माण लाहौर किले की बहुस्तरीय ऐतिहासिक पहचान को सामने लाता है।

2018 में लोह मंदिर का आंशिक जीर्णोद्धार

डब्ल्यूसीएलए की प्रवक्ता तानिया कुरैशी के अनुसार, इस पूरी संरक्षण प्रक्रिया में अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है।

संरचना की मूल पहचान को बनाए रखते हुए उसकी मजबूती और दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित की गई है।

इससे पहले वर्ष 2018 में लोह मंदिर का आंशिक जीर्णोद्धार हुआ था, लेकिन अब इसे पूरी तरह संरक्षित कर पर्यटकों के लिए तैयार किया गया है।

सिख और हिंदू विरासत का केंद्र

लाहौर किला केवल मुगल या इस्लामी स्थापत्य का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह सिख और हिंदू इतिहास से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।

लगभग पचास वर्षों तक यह किला सिख साम्राज्य की सत्ता का केंद्र रहा। महाराजा रणजीत सिंह का शासनकाल इस किले के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय है।

इसी कारण यह स्थल सिख समुदाय के लिए भावनात्मक और ऐतिहासिक दोनों दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

बहु-सांस्कृतिक की पहचान

लोह मंदिर का जीर्णोद्धार केवल एक धार्मिक स्थल को संरक्षित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लाहौर किले की बहु-सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की एक गंभीर कोशिश है।

यह पहल दर्शाती है कि इतिहास किसी एक समुदाय की धरोहर नहीं होता, बल्कि वह सभ्यताओं के साझा अनुभवों का परिणाम होता है।

पर्यटन और संवाद का नया अवसर

अब जब लोह मंदिर पर्यटकों के लिए खुल चुका है, तो यह भारत-पाकिस्तान के साझा इतिहास को समझने का एक नया मंच बन सकता है।

यह स्मारक आने वाली पीढ़ियों को यह याद दिलाने का काम करेगा कि सीमाओं से परे भी एक साझा सांस्कृतिक विरासत मौजूद है, जिसे समझना और संरक्षित करना हम सभी की जिम्मेदारी है।

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Madhuri
Madhurihttps://reportbharathindi.com/
पत्रकारिता में 6 वर्षों का अनुभव है। पिछले 3 वर्षों से Report Bharat से जुड़ी हुई हैं। इससे पहले Raftaar Media में कंटेंट राइटर और वॉइस ओवर आर्टिस्ट के रूप में कार्य किया। Daily Hunt के साथ रिपोर्टर रहीं और ETV Bharat में एक वर्ष तक कंटेंट एडिटर के तौर पर काम किया। लाइफस्टाइल, इंटरनेशनल और एंटरटेनमेंट न्यूज पर मजबूत पकड़ है।
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