जैसे सर्दियों के मौसम में ज़्यादा ठण्ड पड़ने से सड़को में फोग यानि कोहरा बढ़ जाता है और हमे कुछ दिखाई नहीं देता,ऐसा ही कुछ होता है ब्रेन फ्रॉग भी। कई बार जब हम डिजिटली ज़्यादा एक्टिव हो जाते है यानि अपने फ़ोन या लैपटॉप पर ज़्यादा व्यस्त रहने लगते है तो हमारे दिमाग में भी फोग छा जाता है,जिसे मेडिकल टर्म्स में ब्रेन फोग कहा जाता है।
इसकी वजह से ब्रेन की फंक्शनिंग बिगड़ जाती है और यादाश्त भी कमजोर होने लगती है। जिसकी वजह से कई बार इंसान को आँखों के सामने राखी चीज़ भी दिखाई नहीं देती है। मनोचिकित्सक के अनुसार हर महीने उनके पास इस समस्या के 10 से 15 मरीज़ आते है।
इसके लक्षण
डॉक्टरों के अनुसार इस समस्या के ग्रसित लोग हमेशा थके हुए,चिड़चिड़े रहते है। उन्हें नींद नहीं आती है,और छोटी छोटी बाटे याद रखना मुश्किल हो जाता है। इससे बचने के लिए लोगों को डिजिटल गैजेट्स का इस्तेमाल कम करना चाहिए और मैडिटेशन के साथ पर्याप्त नींद लेनी चाहिए।
इस वक़्त जनरेशन Z और मिलेनियल्स अपना ज़्यादा समय सोशल मीडिया और टेक्नोलॉजी के साथ बिताते है। यहाँ तक की रात में भी फ़ोन चलाते चलाते ही सो जाते है । जिससे मष्तिष्क को नुकसान पहुँचता है और मेलाटोनिन होर्मोनेस को इफ़ेक्ट करता है।
ब्रेन फोग की वजह
चिकित्सकों के मुताबिक ब्रेन फॉग, भ्रम, भूलने की बीमारी, ध्यान और मानसिक स्पष्टता की कमी है। जो ज़्यादा काम करने, नींद की कमी, तनाव और कंप्यूटर पर अधिक समय बिताने के कारण हो सकता है। ब्रेन फॉग उच्च स्तर की सूजन और हार्मोन में परिवर्तन के कारण माना जाता है, जो मूड, ऊर्जा और फोकस को निर्धारित करते हैं। हार्मोन का असंतुलित स्तर पूरे सिस्टम को अस्त-व्यस्त कर देता है। इसके अलावा ब्रेन फॉग सिंड्रोम मोटापे, असामान्य मासिक धर्म और मधुमेह जैसी कई बीमारियों का भी कारण हो सकता है।