Khamenei Death: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) की अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों में मौत की खबर ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है।
जहां एक ओर मध्य-पूर्व (Middle East) में युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ईरान की सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक जश्न का माहौल है।
आखिर क्या वजह है कि 40 साल तक राज करने वाले नेता की मौत पर खुद उसके देश के लोग खुश हैं?
मोर्टिसिया ऐडम्स का वीडियो वायरल । Morticia Ames
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान में दमन के खिलाफ प्रतीक बनी मोर्टिसिया ऐडम्स (छद्म नाम) नाम की महिला एक बार फिर चर्चा में है।
यह वही महिला है जिसने इस साल की शुरुआत में खामेनेई की तस्वीर जलाकर सिगरेट सुलगाई थी। अब खामेनेई की मौत के बाद उसने कनाडा (टोरंटो) में एक रैली के दौरान जश्न मनाते हुए वीडियो साझा किया है।
उसने लिखा कि मैंने कहा था ना कि हम तुम्हारी कब्र पर नाचेंगे? यह संदेश उन लाखों ईरानी शरणार्थियों की भावनाओं को दर्शाता है जो खामेनेई के शासन के दौरान प्रताड़ना सहकर देश छोड़ने पर मजबूर हुए थे।
40 साल का सख्त सत्तावादी शासन । 40 Years of Authoritarian Rule
बताया जा रहा है कि खामेनेई ने लगभग चार दशकों तक ईरान पर लोहे की मुट्ठी से शासन किया। उनके कार्यकाल में विरोध की हर आवाज को कुचल दिया गया।
मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, खामेनेई के आदेश पर हजारों राजनीतिक विरोधियों को जेल में डाला गया, प्रताड़ित किया गया या मौत की सजा दी गई।
आम ईरानी नागरिक इस लंबे दमनकारी दौर के अंत को एक नई सुबह और ताजी हवा के झोंके के रूप में देख रहे हैं।
आर्थिक बदहाली और रिकॉर्ड तोड़ महंगाई । Economic Crisis in Iran
मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि ईरान के लोग केवल राजनीतिक रूप से ही नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से भी टूट चुके थे। रिकॉर्ड तोड़ महंगाई और बेरोजगारी ने आम जनता का कमर तोड़ दी है।
कई लोग खामेनेई की पश्चिम विरोधी नीतियों और परमाणु कार्यक्रमों पर बेतहाशा खर्च को इस बदहाली का जिम्मेदार मानते हैं।
जनता का मानना है कि खामेनेई के टकराव वाले रवैये के कारण अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों ने ईरान की अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर दिया।
प्रदर्शनकारियों का खून और जनता का गुस्सा । Public Outrage
जानकारी के अनुसार, दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 में ईरान में ऐतिहासिक देशव्यापी प्रदर्शन हुए थे। इन प्रदर्शनों को दबाने के लिए खामेनेई ने सेना को खुली छूट दी थी।
मानवाधिकार समूहों का दावा है कि इस कार्रवाई में हजारों मासूम प्रदर्शनकारी मारे गए और हजारों को हिरासत में लेकर टॉर्चर किया गया। इस खूनखराबे ने जनता के मन में खामेनेई के प्रति नफरत को चरम पर पंहुचा दिया था।
युवा पीढ़ी और आजादी की चाहत । Gen-Z and Social Freedom
ईरान की आधुनिक और युवा पीढ़ी धार्मिक कट्टरता के बोझ तले दबी महसूस कर रही थी। सख्त हिजाब कानून, मोरालिटी पुलिस और इंटरनेट सेंसरशिप ने युवाओं का दम घोंट रखा था।
युवाओं के लिए खामेनेई की मृत्यु केवल एक व्यक्ति का जाना नहीं, बल्कि व्यक्तिगत आजादी और लोकतांत्रिक बदलाव का एक सुनहरा अवसर है। उन्हें उम्मीद है कि अब कट्टरपंथी व्यवस्था की दीवारें दरकेंगी।
अब लोगों का कहना है कि खामेनेई के जाने के बाद ईरान एक चौराहे पर खड़ा है। क्या वहां लोकतांत्रिक ताकतें उभरेंगी या फिर सत्ता के लिए नया खूनी संघर्ष शुरू होगा?
फिलहाल, ईरान की सड़कों पर सन्नाटा भले हो, लेकिन सोशल मीडिया पर Woman, Life, Freedom के नारे फिर से गूंज रहे हैं।
यह भी पढ़ें: Iran-Israel War Impact: युद्ध बढ़ा तो पेट्रोल-डीजल होंगे महंगे, जानें भारत पर होगा क्या असर?

