Jammu and Kashmir: जम्मू-कश्मीर में प्राकृतिक आपदाओं का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीते कुछ दिनों से भारी बारिश, भूस्खलन और बादल फटने जैसी घटनाओं ने पूरे प्रदेश में तबाही मचा दी है। शुक्रवार रात बांदीपुरा जिले के गुरेज सेक्टर के तुलैल इलाके में बादल फटने की घटना हुई।
अचानक भारी बारिश ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी, हालांकि इस हादसे में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। इसके बावजूद लोग अब भी खौफ के साये में जी रहे हैं, क्योंकि मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी बारिश का अलर्ट जारी किया है।
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Jammu and Kashmir: हादसे में 7 लोग लापता
इसी बीच रियासी जिले के माहौर इलाके में एक बड़ा भूस्खलन हुआ, जिसकी चपेट में कई घर आ गए। इस हादसे में सात लोगों के लापता होने की खबर है। वहीं, रामबन जिले के राजगढ़ क्षेत्र में भी भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई, जहां तीन लोगों की मौत हो गई और दो लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
प्रशासन और राहत-बचाव दल मौके पर जुटे हुए हैं और मलबे में दबे लोगों को खोजने का प्रयास लगातार जारी है। हादसे में दो घर और एक स्कूल भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिससे स्थानीय लोगों को भारी नुकसान झेलना पड़ा है।
यातायात प्रभावित
जम्मू संभाग में लगातार हो रही बारिश के चलते रेल यातायात भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। उत्तर रेलवे ने घोषणा की है कि 30 अगस्त को जम्मू, कटरा और उधमपुर रेलवे स्टेशनों से आने-जाने वाली कुल 46 ट्रेनें रद्द रहेंगी। चार दिन पहले आई अचानक बाढ़ और जगह-जगह रेल लाइन टूट जाने के कारण यह निर्णय लिया गया है।
इससे पहले 29 अगस्त को भी 40 ट्रेनें रद्द की गई थीं। रेल सेवा के ठप होने से यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, खासकर उन तीर्थयात्रियों को जो कटरा और जम्मू होकर वैष्णो देवी और अमरनाथ की यात्रा पर निकले थे।
110 से ज्यादा लोगों की गई जान
भारी बारिश और इससे जुड़ी घटनाओं में अब तक 110 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 32 लोग लापता बताए जा रहे हैं। मृतकों में बड़ी संख्या तीर्थयात्रियों की है, जो अलग-अलग इलाकों में प्राकृतिक आपदाओं की चपेट में आ गए।
स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें भी मौके पर मौजूद हैं और सेना को भी सहयोग के लिए तैनात किया गया है।
अमित शाह करेंगे बाढ़ प्रभावित इलाके के दौरा
इसी बीच केंद्र सरकार भी हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह रविवार यानी 31 अगस्त को दो दिवसीय दौरे पर जम्मू आ सकते हैं। अपने दौरे के दौरान वे बारिश और भूस्खलन से प्रभावित इलाकों का जायज़ा लेंगे और राहत-बचाव कार्यों की समीक्षा करेंगे।
यह उनका पिछले तीन महीनों में जम्मू का दूसरा दौरा होगा, जिससे साफ है कि केंद्र सरकार इस आपदा की गंभीरता को लेकर बेहद चिंतित है।
इन घटनाओं ने एक बार फिर से इस सवाल को खड़ा कर दिया है कि आखिर जम्मू-कश्मीर जैसे पहाड़ी और संवेदनशील इलाकों में आपदा प्रबंधन को लेकर और कितनी तैयारियां की ज़रूरत है।
स्थानीय लोग इस आपदा से उबरने के लिए सरकारी मदद की उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन फिलहाल उनकी सबसे बड़ी चुनौती सुरक्षित ठिकाने और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने की है।