जम्मू-कश्मीर के जम्मू क्षेत्र में आतंक के खिलाफ चल रही लड़ाई में सुरक्षाबलों को एक बड़ी और निर्णायक सफलता हाथ लगी है।
किश्तवाड़ जिले के त्राशी इलाके में की गई सटीक और योजनाबद्ध कार्रवाई में जैश-ए-मोहम्मद के तीन शीर्ष आतंकियों को मार गिराया गया है।
इस ऑपरेशन के साथ ही पिछले तीन वर्षों से सक्रिय संगठन का एक पूरा नेटवर्क जमींदोज कर दिया गया।
खुफिया एजेंसियों से मिली पुख्ता जानकारी के आधार पर भारतीय सेना ने इस अभियान को अंजाम दिया।
मारे गए आतंकियों की पहचान जैश के सीनियर कमांडर सैफुल्लाह बलूच, फरमान अली और बाशा उर्फ हुरैरा के रूप में हुई है।
इन तीनों पर किश्तवाड़ पुलिस द्वारा पाँच-पाँच लाख रुपये का इनाम घोषित था और ये लंबे समय से सुरक्षाबलों को चकमा देने में सफल हो रहे थे।
महीनों से जारी था शिकंजा
सेना बीते वर्ष दिसंबर से कठुआ, डोडा और किश्तवाड़ जिलों में लगातार सर्च और कॉर्डन ऑपरेशन चला रही थी।
इसी क्रम में जनवरी में बिलावर क्षेत्र में पाकिस्तान के मुल्तान निवासी आतंकी जुबैर अली को ढेर किया गया।
इसके बाद फरवरी की शुरुआत में उधमपुर के बसंतगढ़ क्षेत्र के घने जंगलों में जैश के अन्य बड़े नाम—उस्मान अख्तर उर्फ निक्कू और लुकमान बशीर उर्फ अबू माविया—भी मारे गए।
4 फरवरी को ही खुफिया एजेंसियों को सूचना मिली कि सैफुल्लाह का गिरोह त्राशी के जंगलों में छिपा हुआ है।
सेना ने इलाके को घेर लिया, जिसमें एक मुठभेड़ के दौरान खैबर पख्तूनख्वाह के कोहाट निवासी आतंकी स्वरुद्दीन उर्फ आदिल खान मारा गया, हालांकि उस समय सैफुल्लाह और उसके दो साथी भागने में सफल हो गए थे।
इंटेलिजेंस और सेना का संयुक्त ऑपरेशन
भारतीय सेना और इंटेलिजेंस ब्यूरो ने लगातार नेटवर्क पर नजर बनाए रखी।
शनिवार शाम आतंकियों की सटीक लोकेशन ट्रेस की गई।
रविवार सुबह लगभग 11 बजे सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने संयुक्त रूप से उस क्षेत्र को सील कर दिया, जहां आतंकी एक लकड़ी के अस्थायी घर में छिपे थे।
आतंकियों की मौजूदगी की पुष्टि के लिए प्रशिक्षित डॉग स्क्वॉड ‘टायसन’ को आगे बढ़ाया गया।
जैसे ही डॉग ने संकेत दिया, भीतर से अंधाधुंध फायरिंग शुरू हो गई। इसके बाद सेना ने स्थिति को देखते हुए रॉकेट लॉन्चर का प्रयोग कर उस ढांचे को पूरी तरह नष्ट कर दिया।
एक घंटे में ऑपरेशन समाप्त
करीब एक घंटे बाद जब किसी प्रकार की जवाबी गोलीबारी नहीं हुई, तो जवान मलबे के पास पहुंचे।
वहां सबसे पहले सैफुल्लाह बलूच और बाशा के जले हुए शव मिले।
सैफुल्लाह की पहचान संभव हो सकी, जबकि बाशा का शव बुरी तरह क्षत-विक्षत था।
बाद में मलबा हटाने पर तीसरा शव मिला, जिसकी पुष्टि पाकिस्तानी आतंकी फरमान अली के रूप में हुई।
इस तरह केवल 30 दिनों के भीतर सुरक्षाबलों ने जैश-ए-मोहम्मद के उधमपुर-कठुआ और डोडा-किश्तवाड़ मॉड्यूल के कुल सात आतंकियों को ढेर कर पूरे नेटवर्क को समाप्त कर दिया।
2019 से 2026 तक: जैश की बदली रणनीति और अंत
साल 2019 में भारतीय सेना ने एक बड़े हवाई अभियान के तहत जैश के बालाकोट स्थित प्रशिक्षण केंद्र को नष्ट किया था।
इसके बाद संगठन ने पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वाह प्रांत में नया ट्रेनिंग ढांचा खड़ा किया, जहां से आतंकियों को प्रशिक्षित कर 2023 में जम्मू क्षेत्र में भेजा गया।
इन्हीं आतंकियों के एक समूह ने जुलाई 2024 में डोडा में सेना के काफिले पर हमला किया था, जिसमें कैप्टन बृजेश थापा समेत चार जवान शहीद हुए थे।
इसके बाद सेना ने आतंकियों के खिलाफ व्यापक और आक्रामक रणनीति अपनाई।
सैफुल्लाह का समूह लगभग 17 बार घेराबंदी से बच निकलने में सफल रहा, लेकिन इस बार सभी संभावित रास्तों को एक साथ बंद कर दिया गया।
अंततः 23 मिनट के भीतर चले इस अंतिम एनकाउंटर में सैफुल्लाह, फरमान और बाशा का अंत हो गया।
जम्मू क्षेत्र में जैश लगभग खत्म
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक जम्मू क्षेत्र में जैश-ए-मोहम्मद की कमर पूरी तरह टूट चुकी है।
अब केवल कुछ बचे हुए आतंकी—वली हसन और बिजली भाई उर्फ सादिक—कश्मीर क्षेत्र में छिपे होने की सूचना है, जिनकी तलाश के लिए अभियान जारी है।
यह कार्रवाई न केवल एक आतंकी नेटवर्क के अंत का संकेत है, बल्कि यह भी दिखाती है कि भारतीय सेना और खुफिया एजेंसियों की समन्वित रणनीति अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है।

