Thursday, February 5, 2026

शंकराचार्य नहीं हैं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ? माघ मेला विवाद में नया मोड़!

शंकराचार्य कौन ?

प्रयागराज के माघ मेला क्षेत्र में मौनी अमावस्या स्नान पर्व के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की शोभायात्रा पर रोक के बाद उपजा विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। माघ मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी कर उनसे औपचारिक जवाब तलब किया है।

शंकराचार्य उपाधि पर सवाल

माघ मेला प्राधिकरण ने अपने नोटिस में सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन सिविल अपील का हवाला देते हुए पूछा है कि जब इस विषय में अभी तक कोई अंतिम आदेश पारित नहीं हुआ है तो स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने नाम के साथ शंकराचार्य की उपाधि क्यों अंकित की है।

नोटिस में सुप्रीम कोर्ट का संदर्भ

प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित होने के कारण वर्तमान समय में कोई भी धर्माचार्य स्वयं को ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य घोषित नहीं कर सकता। इसके बावजूद मेला क्षेत्र में लगाए गए शिविर के बोर्ड पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के नाम के आगे शंकराचार्य लिखा पाया गया।

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शंकराचार्य नहीं हैं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ? माघ मेला विवाद में नया मोड़! 2

चौबीस घंटे में सुधार के निर्देश

माघ मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को चौबीस घंटे के भीतर शिविर बोर्ड से शंकराचार्य शब्द हटाने और उसमें सुधार करने का निर्देश दिया है। साथ ही नोटिस में यह भी पूछा गया है कि यह उपाधि किस आधार पर उपयोग में लाई जा रही है।

शोभायात्रा रोके जाने से बढ़ा विवाद

उल्लेखनीय है कि मौनी अमावस्या के स्नान पर्व पर संगम में शोभायात्रा के साथ स्नान के लिए जा रहे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को पुलिस द्वारा रोके जाने से विवाद गहरा गया था। इस कार्रवाई को लेकर मेला प्रशासन और स्वामी के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है।

धरने पर बैठे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

स्वयं के अपमान और शिष्यों के साथ पुलिस द्वारा किए गए कथित दुर्व्यवहार से आहत स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद मेला प्रशासन के विरोध में धरने पर बैठ गए हैं। उनका कहना है कि धार्मिक आस्था और परंपरा के अनुसार स्नान करने से उन्हें रोका गया।

महास्नान न करने पर सफाई

मौनी अमावस्या के महास्नान पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा डुबकी न लगाए जाने के मामले में सोमवार दोपहर उन्होंने मीडिया से बातचीत की। इसके बाद पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर अपना पक्ष सार्वजनिक रूप से रखा।

प्रशासन का पक्ष

मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को स्नान करने से रोका नहीं गया था बल्कि उनसे केवल आग्रह किया गया था। प्रशासन को आपत्ति केवल पहिया लगी पालकी को लेकर थी जिससे संभावित खतरे की आशंका जताई गई।

भीड़ और सुरक्षा का हवाला

मंडलायुक्त ने बताया कि उस समय संगम नोज पर स्नानार्थियों की अत्यधिक भीड़ थी। यदि स्वामी पहिया लगी पालकी पर सवार होकर घाट तक जाते तो भगदड़ या किसी अन्य अनहोनी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता था।

शोभायात्रा रोकने पर झड़प

रविवार को मौनी अमावस्या के प्रमुख स्नान पर्व पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अपने शिविर से पहिया लगी पालकी पर शिष्यों के साथ संगम की ओर जा रहे थे। पुलिस ने उनकी शोभायात्रा को बीच में ही रोक दिया था।

शिष्यों का आक्रोश और आरोप

शोभायात्रा रोके जाने से नाराज शिष्यों ने पुलिस से झड़प की थी। इस दौरान पुलिस ने कुछ शिष्यों को हिरासत में लिया। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके समर्थकों ने पुलिस पर दुर्व्यवहार और पिटाई के गंभीर आरोप लगाए हैं।

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Mudit
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लेखक 'भारतीय ज्ञान परंपरा' के अध्येता हैं। वे पिछले एक दशक से सार्वजनिक विमर्श पर विश्लेषणात्मक लेखन कर रहे हैं। सांस्कृतिक सन्दर्भ में समाज, राजनीति, विचारधारा, शिक्षा, धर्म और इतिहास के प्रमुख प्रश्नों के रिसर्च बेस्ड प्रस्तुतिकरण और समाधान में वे पारंगत हैं। वे 'द पैम्फलेट' में दो वर्ष कार्य कर चुके हैं। वे विषयों को केवल घटना के स्तर पर नहीं, बल्कि उनके ऐतिहासिक आधार, वैचारिक पृष्ठभूमि और दीर्घकालीन प्रभाव के स्तर पर परखते हैं। इसी कारण उनके राष्ट्रवादी लेख पाठक को नई दृष्टि और वैचारिक स्पष्टता भी देते हैं। इतिहास, धर्म और संस्कृति पर उनकी पकड़ व्यापक है। उनके प्रामाणिक लेख अनेक मौकों पर राष्ट्रीय विमर्श की दिशा में परिवर्तनकारी सिद्ध हुए हैं। उनका शोधपरक लेखन सार्वजनिक संवाद को अधिक तथ्यपरक और अर्थपूर्ण बनाने पर केंद्रित है।
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