Sunday, March 1, 2026

Iran-Israel War Impact: युद्ध बढ़ा तो पेट्रोल-डीजल होंगे महंगे, जानें भारत पर होगा क्या असर?

Iran-Israel War Impact: ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हालिया हमलों ने पूरी दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की दहलीज पर खड़ा कर दिया है।

यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था चरमरा सकती है। विशेष रूप से भारत जैसे देश के लिए, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, यह स्थिति किसी आर्थिक सुनामी से कम नहीं होगी।

कच्चे तेल के बाजार में वार प्रीमियम का असर । Crude Oil Price Surge

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आग लगनी शुरू हो गई है।

विश्लेषकों का मानना है कि ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतें जो फिलहाल $73 के आसपास हैं, युद्ध के वार प्रीमियम के कारण 15% तक और उछल सकती हैं।

फरवरी 2026 में ही कच्चे तेल में 8% की बढ़ोतरी देखी जा चुकी है। अगर युद्ध का दायरा बढ़ा, तो विशेषज्ञों का अनुमान है कि कच्चा तेल $100 से $120 प्रति बैरल के स्तर को आसानी से पार कर जाएगा।

होर्मुज जलडमरूमध्य: दुनिया की लाइफलाइन पर संकट । Strait of Hormuz Blockage

बताया जा रहा है कि दुनिया के कुल तेल परिवहन का लगभग 20% हिस्सा ईरान के पास स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरता है। यह फारस की खाड़ी का एकमात्र समुद्री मार्ग है।

यहां से रोजाना 2.1 करोड़ बैरल कच्चा तेल और 8 करोड़ टन नेचुरल गैस की आवाजाही होती है।

यदि ईरान इस 39 किलोमीटर लंबे मार्ग को एक दिन के लिए भी बाधित करता है, तो कच्चे तेल की कीमतें $150 प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। इससे वैश्विक सप्लाई चेन पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा और रूस का विकल्प । India Energy Security

जानकारी के अनुसार, भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 86-89% हिस्सा आयात करता है। भारत के कुल आयात का लगभग 45-50% हिस्सा सऊदी अरब, कुवैत और यूएई जैसे खाड़ी देशों से आता है।

अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण रूस से आयात जो कभी 40% था, अब घटकर 22-23% रह गया है। लेकिन मौजूदा संकट को देखते हुए भारत सरकार एक बार फिर रूस और अफ्रीकी देशों से तेल की खरीद बढ़ाने पर विचार कर रही है।

भारत ने पहले ही खाड़ी देशों पर निर्भरता कम करने के लिए अपनी रणनीति बदली है, लेकिन अचानक आई इस युद्ध की स्थिति ने विकल्पों को सीमित कर दिया है।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में ₹15 तक की तेजी की आशंका । Petrol Diesel Prices in India

भारत में पिछले तीन सालों से पेट्रोल-डीजल की कीमतें लगभग स्थिर रही हैं। दिल्ली में पेट्रोल फिलहाल ₹94.72 और डीजल ₹87.62 प्रति लीटर है।

यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल $10-$20 प्रति बैरल भी महंगा होता है, तो घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹5 से ₹15 प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है।

इससे सरकार पर सब्सिडी का बोझ बढ़ेगा और राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) गहरा सकता है।

सोना और चांदी बनेगा सेफ हेवन । Gold and Silver Price Prediction

जब भी युद्ध की स्थिति बनती है, निवेशक शेयर बाजार से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश यानी सोने (Gold) में लगाते हैं।

अजय केडिया (कमोडिटी एक्सपर्ट) के अनुसार, सोमवार को बाजार खुलते ही सोने में 5% और चांदी में 7-8% की तेजी देखी जा सकती है।

यदि तनाव कम नहीं हुआ, तो 10 ग्राम सोना ₹1.90 लाख के रिकॉर्ड स्तर तक पहुँच सकता है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी $110 के पार जा सकती है।

भारतीय अर्थव्यवस्था पर चौतरफा मार । Impact on Indian Economy

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का मतलब है महंगा परिवहन और बढ़ती महंगाई। आयात बिल बढ़ने से डॉलर की मांग बढ़ेगी, जिससे रुपया कमजोर हो सकता है।

तेल के लिए ज्यादा डॉलर खर्च करने से भारत का व्यापार संतुलन बिगड़ सकता है। अनिश्चितता के माहौल में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) भारतीय बाजार से पैसा निकाल सकते हैं।

ईरान-इजरायल संघर्ष केवल दो देशों की जंग नहीं, बल्कि एक वैश्विक आर्थिक संकट की आहट है। भारत सरकार स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए है और वैकल्पिक रास्तों व स्त्रोतों की तलाश जारी है।

हालांकि, आम आदमी के लिए आने वाले दिन महंगाई के मोर्चे पर चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।

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