Thursday, February 26, 2026

महंगाई के खिलाफ सड़कों पर ईरान, Gen Z के प्रदर्शन से हिला शासन

महंगाई के खिलाफ सड़कों पर ईरान: ईरान की राजधानी तेहरान में 30 दिसंबर 2025 से मौजूदा शासन के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन जारी हैं।

देश में बेकाबू होती महंगाई और गिरती अर्थव्यवस्था ने आम जनता का गुस्सा सड़कों पर ला दिया है।

शुरुआत में यह विरोध व्यापारियों तक सीमित था, लेकिन अब इसमें ईरान की युवा पीढ़ी, खासतौर पर Gen Z, खुलकर शामिल हो चुकी है।

हालात ऐसे बन गए हैं कि यह आंदोलन सिर्फ आर्थिक असंतोष नहीं, बल्कि सत्ता के खिलाफ व्यापक जनाक्रोश का रूप लेता जा रहा है।

ईरान की करेंसी रियाल अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुकी है।

मौजूदा समय में करीब 42,125 ईरानी रियाल एक अमेरिकी डॉलर के बराबर है।

इसका सीधा असर आम लोगों की क्रय शक्ति पर पड़ा है और रोजमर्रा की जरूरतें आम नागरिक की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं।

सड़क से यूनिवर्सिटी तक फैला आंदोलन

तेहरान के प्रमुख बाजारों में व्यापारियों के विरोध के बाद धीरे-धीरे इस आंदोलन में छात्र और युवा जुड़ते चले गए। अब हालात यह हैं कि ईरान के कई विश्वविद्यालयों में भी विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

यह आंदोलन केवल राजधानी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिराज, हामेदान, इस्फहान जैसे बड़े शहरों तक फैल चुका है।

कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच आमने-सामने की स्थिति बन गई। पुलिस ने भीड़ को काबू में करने के लिए हल्का बल प्रयोग किया, जिसके बाद हालात और तनावपूर्ण हो गए।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई हिंसक झड़पों में अब तक करीब 5 लोगों की मौत हो चुकी है।

बल प्रयोग से प्रदर्शनकारियों का गुस्सा और भड़क गया है, जिससे हालात लगातार बिगड़ते नजर आ रहे हैं।

ट्रंप की चेतावनी से अंतरराष्ट्रीय राजनीति गरमाई

ईरान में चल रहे इन विरोध प्रदर्शनों पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया भी सामने आने लगी है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक बयान जारी करते हुए कहा कि अगर ईरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाता है या उन्हें नुकसान पहुंचाता है, तो अमेरिका उनके समर्थन में खड़ा होगा।

ट्रंप के इस बयान को ईरान के सुप्रीम लीडर के लिए सीधी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

अमेरिका की इस प्रतिक्रिया के बाद अब सबकी नजरें चीन और रूस जैसे देशों पर टिकी हैं कि वे ईरान के मौजूदा हालात पर क्या रुख अपनाते हैं।

खबर लिखे जाने तक भारत की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

सरकार की सफाई, लेकिन गुस्सा बरकरार

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने प्रदर्शनकारियों को शांत करने की कोशिश करते हुए कहा है कि सरकार जनता की समस्याओं को सुनने के लिए तैयार है।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि अवाम की रोजी-रोटी उनकी प्राथमिक चिंता है और सरकार लोगों की क्रय शक्ति बढ़ाने के लिए काम कर रही है।

इसके साथ ही बैंकिंग सिस्टम में सुधार और गृहमंत्री को प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

हालांकि इन बयानों के बावजूद जनता का गुस्सा कम होता नहीं दिख रहा। खबरें यह भी हैं कि ईरान के केंद्रीय बैंक के गवर्नर का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है,

लेकिन इसके बाद भी प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहे। 2022 के बाद यह ईरान का अब तक का सबसे बड़ा जन आंदोलन माना जा रहा है।

ईरान इस समय 40 प्रतिशत से अधिक महंगाई, पश्चिमी देशों के आर्थिक प्रतिबंधों और बीते साल हुए इजराइली एयरस्ट्राइक के आर्थिक असर से जूझ रहा है।

ऐसे में अब यह देखना अहम होगा कि सरकार बातचीत के जरिए हालात संभाल पाती है या फिर Gen Z की अगुवाई में यह आंदोलन और तेज होता है।

पूरी दुनिया की नजरें इस वक्त ईरान के बदलते राजनीतिक और सामाजिक हालात पर टिकी हुई हैं।

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Madhuri
Madhurihttps://reportbharathindi.com/
पत्रकारिता में 6 वर्षों का अनुभव है। पिछले 3 वर्षों से Report Bharat से जुड़ी हुई हैं। इससे पहले Raftaar Media में कंटेंट राइटर और वॉइस ओवर आर्टिस्ट के रूप में कार्य किया। Daily Hunt के साथ रिपोर्टर रहीं और ETV Bharat में एक वर्ष तक कंटेंट एडिटर के तौर पर काम किया। लाइफस्टाइल, इंटरनेशनल और एंटरटेनमेंट न्यूज पर मजबूत पकड़ है।
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