भारत-फ्रांस राफेल डील: 17 फरवरी 2026 को भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग के इतिहास में एक बड़ी महा-डील पर चर्चा और आधिकारिक घोषणा होने जा रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच मुंबई में होने वाली शिखर वार्ता न केवल दो देशों के रिश्तों को नई ऊंचाई देगी, बल्कि भारतीय वायुसेना (IAF) की ताकत को कई गुना बढ़ा देगी।
₹3.25 लाख करोड़ ($39-40 बिलियन) की यह डील दुनिया के सबसे बड़े रक्षा सौदों में से एक है।
राष्ट्रपति बनने के बाद चौथी बार भारत आए मैक्रों
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, Emmanuel Macron का यह चौथा भारत दौरा है। वे पहली बार मार्च 2018 में भारत आए थे।
इसके बाद सितंबर 2023 में G20 शिखर सम्मेलन और जनवरी 2024 में गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे।
भारत और फ्रांस के बीच 1998 से रणनीतिक साझेदारी है। रक्षा, अंतरिक्ष, ऊर्जा और तकनीकी क्षेत्रों में दोनों देशों का सहयोग लगातार मजबूत हुआ है।
मौजूदा दौरा इसी रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
क्या है राफेल डील?
भारत और फ्रांस के बीच प्रस्तावित इस मेगा रक्षा डील का मुख्य उद्देश्य 114 राफेल लड़ाकू जेट्स खरीदना है, जिनसे भारतीय वायुसेना (IAF) की हवा में मारक क्षमता को अत्याधुनिक स्तर तक पहुंचाया जा सके।
इस डील में कुल 114 राफेल जेट्स की खरीद प्रस्तावित है, जिसकी अनुमानित सौदा राशि,लगभग ₹3.25 लाख करोड़ है।
इसमें यह प्रस्ताव है कि पहले 18 विमान तैयार हालत में फ्रांस से आएंगे और बाकी भारत में ‘मेक इन इंडिया’ अंतर्गत बनाए जाएंगे।
लगभग 90–96 विमान भारत में उत्पादन के लिए तैयार होंगे, जिससे घरेलू एरोस्पेस क्षमता को भी बढ़ावा मिलेगा।
यह डील भारतीय रक्षा इतिहास की सबसे बड़ी रक्षा खरीद में से एक हो सकती है, जिसका लाभ IAF की ताकत को दीर्घकालिक दृष्टिकोण से बढ़ाने में होगा।
114 राफेल में 24 होंगे सुपर राफेल
इस डील की सबसे खास बात यह है कि 114 में से 24 विमान ‘सुपर राफेल’ यानी F-5 वर्जन के होंगे। इन अत्याधुनिक जेट का निर्माण फ्रांस की कंपनी Dassault Aviation कर रही है।
वर्तमान में भारतीय वायुसेना के पास F-3 वेरिएंट के राफेल हैं, जिन्हें 4.5 जेनरेशन फाइटर माना जाता है। नई डील के तहत अधिकांश जेट F-4 वर्जन के होंगे, जिनमें उन्नत एवियोनिक्स, बेहतर सेंसर और अपग्रेडेड टेक्नोलॉजी होगी।
योजना के अनुसार F-4 जेट की डिलीवरी 2028-29 से शुरू होगी, जबकि 2030 के बाद मिलने वाले जेट F-5 यानी ‘सुपर राफेल’ श्रेणी के होंगे।
इस डील के बाद भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल होगा, जिनके पास इतने एडवांस राफेल फाइटर जेट होंगे।
भारत-फ्रांस इनोवेशन ईयर
भारत और फ्रांस ने वर्ष 2026 को ‘भारत-फ्रांस इनोवेशन ईयर’ के रूप में मनाने का फैसला किया है। इस पहल का उद्देश्य नई तकनीक, रिसर्च और इंडस्ट्रियल इनोवेशन में सहयोग को गति देना है।
फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डीपटेक, अंतरिक्ष एवं रक्षा तकनीक और ग्रीन एनर्जी सॉल्यूशंस पर रहेगा। दोनों देश जिम्मेदार और एथिकल AI सिस्टम के लिए साझा रोडमैप पर काम कर रहे हैं।
राष्ट्रपति मैक्रों के साथ 110 से अधिक फ्रांसीसी कंपनियों का बड़ा बिजनेस डेलिगेशन भी भारत आया है, जो मुंबई और बेंगलुरु में भारतीय कंपनियों के साथ निवेश और साझेदारी पर चर्चा करेगा।
फिलहाल भारत में 1,100 से ज्यादा फ्रांसीसी कंपनियां सक्रिय हैं और करीब 3.5 लाख लोगों को रोजगार दे रही हैं। इनोवेशन ईयर का लक्ष्य निवेश, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और इंडस्ट्रियल सहयोग को और मजबूत करना है।
भारत-फ्रांस के बीच यह 3.25 लाख करोड़ रुपये की रक्षा डील न केवल एक आर्थिक सौदा है, बल्कि दो महाशक्तियों के बीच रणनीतिक साझेदारी को एक नई दिशा देने वाला अवसर भी है।
राफेल जेट्स के माध्यम से भारत की वायु क्षमता को नई ऊंचाई मिलेगी, और दोनों देशों के बीच रक्षा, तकनीक तथा नवाचार के सहयोग को एक नया भरोसेमंद आधार मिलेगा।

