India-EU Trade Deal: भारत और यूरोपीय संघ ने मंगलवार को एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर किए।
इसे अब तक का सबसे बड़ा और सबसे अहम व्यापार समझौता माना जा रहा है। यह डील भारत-यूरोप संबंधों में एक नए दौर की शुरुआत है।
इस समझौते के जरिए भारत ने साफ संदेश दिया है कि वह अपने आर्थिक और रणनीतिक हितों से समझौता नहीं करेगा।
साथ ही यह भी दिखा दिया कि भारत किसी देश के दबाव या धमकी में आकर फैसले नहीं लेता।
डील की टाइमिंग क्यों है खास
भारत-ईयू ट्रेड डील ऐसे समय पर हुई है जब वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में उथल-पुथल मची हुई है।
अमेरिका ने भारत से आने वाले कई उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगा रखा है। इसमें 25 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ और 25 प्रतिशत रूसी तेल आयात से जुड़ा हुआ है।
वहीं भारत-अमेरिका ट्रेड डील लंबे समय से अटकी हुई है। दूसरी ओर, यूरोप भी अमेरिका और चीन पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है।
वह नए साझेदारों के साथ व्यापार और कूटनीतिक रिश्ते मजबूत करने की कोशिश में है। ऐसे में भारत-ईयू डील दोनों के लिए फायदे का सौदा बनकर सामने आई है।
अमेरिका की नाराजगी और आलोचना
इस समझौते के बाद अमेरिका की नाराजगी भी साफ नजर आने लगी है।
हालांकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीधे तौर पर कोई बयान नहीं दिया, लेकिन अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने इस डील की आलोचना की।
उन्होंने कहा कि यह समझौता अप्रत्यक्ष रूप से रूस-यूक्रेन युद्ध को फंड कर रहा है।
अमेरिका का मानना है कि इस डील से भारत के एक्सपोर्ट को बड़ा फायदा होगा और अमेरिकी टैरिफ का असर कम हो जाएगा।
खासकर टेक्सटाइल, ज्वेलरी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को इससे राहत मिलने की उम्मीद है।
भारत के लिए क्या बदलेगा
इस मुक्त व्यापार समझौते से भारतीय कंपनियों को यूरोपीय बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी। भारतीय सामानों पर लगने वाले कई टैक्स और शुल्क कम होंगे या खत्म हो जाएंगे।
इससे भारत का निर्यात बढ़ेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इसके साथ ही भारत को टेक्नोलॉजी, ग्रीन एनर्जी, इंफ्रास्ट्रक्चर और इनोवेशन के क्षेत्र में यूरोप के साथ मिलकर काम करने का मौका मिलेगा।
सप्लाई चेन मजबूत होगी और भारत वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में और उभरेगा।
कनाडा और अन्य देशों की प्रतिक्रिया
कनाडा ने भारत-ईयू डील का समर्थन करते हुए अमेरिका पर इशारों-इशारों में निशाना साधा है।
कनाडा के एनर्जी मंत्री टिम हॉजसन ने कहा कि यह समझौता उन वैश्विक ताकतों के लिए करारा जवाब है, जो टैरिफ को दबाव बनाने के हथियार के रूप में इस्तेमाल करती हैं।
उनके मुताबिक, इस डील से अलग-अलग क्षेत्रों में सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे।
यूरोप का संदेश और वॉन डेर लेयेन का बयान
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस समझौते की जमकर सराहना की।
उन्होंने कहा कि भारत-ईयू साझेदारी यह दिखाती है कि वैश्विक चुनौतियों का सबसे अच्छा जवाब सहयोग से मिलता है।
उन्होंने इसे “दो अरब लोगों का साझा बाजार” बताया और कहा कि यह समझौता रणनीतिक निर्भरता को कम करेगा।
क्या बदलेगा वर्ल्ड ऑर्डर?
इस डील के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इससे वैश्विक शक्ति संतुलन बदलेगा। क्या अमेरिका का दबदबा धीरे-धीरे कम होगा और मल्टी-पोलर वर्ल्ड ऑर्डर मजबूत होगा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि दुनिया इस समय भारी बदलाव के दौर से गुजर रही है। ऐसे में भारत-यूरोपीय संघ की साझेदारी वैश्विक स्थिरता को मजबूत करेगी।
उन्होंने साफ कहा कि यह समझौता सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह साझा समृद्धि, निवेश, इनोवेशन और मजबूत सप्लाई चेन का रोडमैप है।

