होर्मुज जलडमरूमध्य पर टकराव: मिडिल ईस्ट में हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। Iran और United States के बीच इस्लामाबाद में हुई अहम वार्ता के विफल होने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है।
इस असफल बातचीत ने कूटनीतिक समाधान की उम्मीदों को झटका दिया है और अब हालात टकराव की ओर बढ़ते दिख रहे हैं।
ट्रंप की कड़ी चेतावनी, होर्मुज बंद करने की तैयारी
इस घटनाक्रम के बाद Donald Trump ने बड़ा कदम उठाते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकी दी है।
अमेरिकी नौसेना के अनुसार, 13 अप्रैल की शाम 7:30 बजे (भारतीय समयानुसार) से इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की नाकेबंदी शुरू की जा सकती है।
यह रास्ता दुनिया की तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है, ऐसे में इसका बंद होना वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाल सकता है।
इजरायल का समर्थन, नेतन्याहू का सख्त रुख
इस बीच Benjamin Netanyahu ने अमेरिका के फैसले का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और किसी भी समय संघर्षविराम समाप्त हो सकता है।
नेतन्याहू ने लेबनान के सुरक्षा क्षेत्र में तैनात सैनिकों की तारीफ करते हुए कहा कि वे दुश्मन को सीमा से दूर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
ईरान पर समझौते तोड़ने का आरोप
नेतन्याहू के अनुसार, ईरान लगातार अंतरराष्ट्रीय समझौतों का उल्लंघन कर रहा है। उन्होंने बताया कि इस्लामाबाद से लौटते समय JD Vance ने उन्हें फोन कर वार्ता के असफल होने की जानकारी दी।
उनका कहना है कि ईरान ने बातचीत के दौरान तय शर्तों का पालन नहीं किया, जिसके कारण अमेरिका को सख्त कदम उठाना पड़ा।
कोई भी जहाज सुरक्षित नहीं रहेगा
अमेरिका की नाकेबंदी की घोषणा के बाद ईरान ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। तेहरान ने साफ कहा है कि यदि उसके बंदरगाहों को खतरा हुआ, तो फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में कोई भी जहाज सुरक्षित नहीं रहेगा।
यह बयान इस बात का संकेत है कि हालात किसी भी समय बड़े सैन्य संघर्ष में बदल सकते हैं।
वैश्विक असर
होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने की संभावना ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख केंद्र है और इसकी नाकेबंदी से तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।
साथ ही, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सुरक्षा पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ेगा।
मौजूदा स्थिति में यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि क्या कूटनीतिक प्रयास इस संकट को टाल पाते हैं या फिर दुनिया एक और बड़े संघर्ष की ओर बढ़ रही है।

