हरमनप्रीत कौर बायोग्राफी: यह 20 जुलाई 2017 की बात है, इंग्लैंड के डर्बी की। बारिश से प्रभावित सेमीफाइनल मैच में भारत की टीम छह बार की विश्व कप विजेता ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मुश्किल में थी।
सिर्फ 35 रन पर 2 विकेट गिर चुके थे, पिच गीली थी और दबाव अपने चरम पर था। ऐसा लग रहा था कि भारत के लिए आगे बढ़ना बेहद कठिन होगा।
इसी समय हरमनप्रीत कौर क्रीज पर आईं और उन्होंने ऐसी पारी खेली, जिसे आज भी महिला क्रिकेट के इतिहास की सबसे शानदार पारियों में गिना जाता है।
उन्होंने 115 गेंदों में नाबाद 171 रन बनाए, जिसमें 20 चौके और 7 छक्के शामिल थे। खास बात यह थी कि उन्होंने यह पारी कंधे की चोट के बावजूद खेली।
उनकी बल्लेबाज़ी का अंदाज़ इतना आक्रामक था कि उन्होंने आखिरी 71 रन सिर्फ 25 गेंदों में बना दिए।
इस शानदार प्रदर्शन के दम पर भारत ने ऑस्ट्रेलिया को टूर्नामेंट से बाहर कर दिया और 12 साल बाद विश्व कप के फाइनल में जगह बनाई।
उस दिन पूरी दुनिया का ध्यान भारतीय महिला क्रिकेट की ओर गया, जिसे पहले उतनी पहचान नहीं मिलती थी।
मैच के बाद हरमनप्रीत ने कहा, “दुनिया जाग गई है।” और सच में, उस दिन सिर्फ दुनिया ही नहीं, बल्कि महिला क्रिकेट के प्रति लोगों की सोच भी बदल गई।
यह कहानी है उस खिलाड़ी की, जिसने खेल का रुख बदल दिया – हरमनप्रीत कौर।
पर्सनल प्रोफाइल
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| पूरा नाम | हरमनप्रीत कौर भुल्लर |
| जन्म तिथि | 8 मार्च 1989 |
| आयु | 36 वर्ष |
| जन्मस्थल | मोगा, पंजाब, भारत |
| राष्ट्रीयता | भारतीय |
| भूमिका | बल्लेबाज / ऑफ-ब्रेक गेंदबाज (ऑलराउंडर) |
| बल्लेबाजी शैली | दाएं हाथ से बल्लेबाजी |
| बॉलिंग शैली | दाएं हाथ से ऑफ-ब्रेक |
| अंतर्राष्ट्रीय पदार्पण (ओडीआई) | 7 मार्च 2009 बनाम पाकिस्तान |
| अंतर्राष्ट्रीय पदार्पण (टी20 अंतरराष्ट्रीय) | 11 जून 2009 बनाम इंग्लैंड |
| वनडे रन | 163 मैचों में 4,516 रन |
| टी20आई रन | 190 मैचों में 3,822 रन |
| जर्सी संख्या | 17 |
| मौजूदा टीम | भारतीय महिला टीम (कप्तान), मुंबई इंडियंस (महिला प्रीमियर लीग) |
| प्रमुख पुरस्कार | पद्म श्री (2026), अर्जुन पुरस्कार (2017), विस्डेन क्रिकेटर ऑफ द ईयर (2023) |
| अनुमानित कुल संपत्ति | ₹25–60 करोड़ (लगभग $3M–$7M USD) |
प्रारंभिक जीवन और परिवार का सहयोग
हरमनप्रीत कौर का जन्म 8 मार्च 1989 को पंजाब के मोगा में हुआ, जहाँ उस समय लड़कियों का क्रिकेट खेलना बहुत ही कम देखा जाता था।
एक पारंपरिक माहौल में पली-बढ़ीं हरमनप्रीत को अक्सर समाज की रोक-टोक का सामना करना पड़ा, लेकिन उनके अंदर की प्रतिस्पर्धी भावना ने कभी हार नहीं मानी।
उनके पिता हरमंदर सिंह भुल्लर, जो कोर्ट क्लर्क और पूर्व क्लब क्रिकेटर थे, उनके पहले कोच और सबसे बड़े समर्थक बने।
उन्होंने अपनी बेटी के साथ कभी बेटे जैसा या अलग व्यवहार नहीं किया, बल्कि उसके सपनों को पूरा करने में हर संभव मदद की।
उन्होंने अपने पुराने बल्ले को भी हरमनप्रीत के हिसाब से छोटा कर दिया, ताकि वह आराम से खेल सकें। उनकी मां सतविंदर कौर भी हमेशा चुपचाप उनका हौसला बढ़ाती रहीं।
उस समय लड़कियों की क्रिकेट टीम उपलब्ध नहीं थी, इसलिए हरमनप्रीत लड़कों के साथ गली में क्रिकेट खेलती थीं, जिससे उनकी आक्रामक बल्लेबाजी शैली और मजबूत होती गई।
बाद में कोच कमलदीश सिंह सोढ़ी की नजर उनकी प्रतिभा पर पड़ी। उन्होंने हरमनप्रीत को अपनी अकादमी में ट्रेनिंग का मौका दिया, जो उनके घर से करीब 30 किलोमीटर दूर थी।
वहां उन्हें मुफ्त कोचिंग, जरूरी उपकरण और रहने की सुविधा मिली। यही वह मौका था जिसने उनके सपनों को सही दिशा दी और उनके सफर को एक नई शुरुआत दी।
डोमेस्टिक क्रिकेट
हरमनप्रीत कौर ने 2006-07 में पंजाब के सीनियर घरेलू क्रिकेट में कदम रखा और जल्द ही एक मजबूत मिडिल ऑर्डर बल्लेबाज के रूप में अपनी पहचान बना ली।
वह न सिर्फ आक्रामक बल्लेबाजी करती थीं, बल्कि ऑफ-स्पिन गेंदबाजी से भी टीम के लिए योगदान देती थीं। उनके लगातार अच्छे प्रदर्शन ने चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा और 2013 तक उन्हें वनडे टीम की कार्यवाहक कप्तानी भी सौंपी गई।
यह उनके अंदर उभरते नेतृत्व गुणों का साफ संकेत था। 2014 में, पूर्व भारतीय कप्तान डायना एडुलजी के मार्गदर्शन में वह मुंबई शिफ्ट हो गईं और इंडियन रेलवेस की टीम से जुड़ गईं, जो घरेलू क्रिकेट की सबसे मजबूत टीमों में गिनी जाती है।
वेस्टर्न रेलवे में ऑफिस सुपरिटेंडेंट की नौकरी और सुबह-सुबह के कठिन अभ्यास सत्रों के बीच संतुलन बनाते हुए उन्होंने अपने खेल में और अनुशासन व रणनीति विकसित की।
2017 विश्व कप में उनके ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद पंजाब सरकार ने उन्हें पुलिस उपाधीक्षक (DSP) के पद पर नियुक्त किया।
2018 में उन्होंने रेलवे की नौकरी छोड़ दी और इस नई जिम्मेदारी को अपनाया। यह उनके सफर का एक बड़ा मोड़ था जहाँ एक युवा क्रिकेटर से वह अपने राज्य के लिए गर्व और प्रेरणा का प्रतीक बन गईं।
अंतरराषट्रीय शुरुआत और चुनौतियां
हरमनप्रीत कौर ने 7 मार्च 2009 को सिर्फ 20 साल की उम्र में पाकिस्तान के खिलाफ अपना पहला वनडे मैच खेला, जिसमें भारत ने शानदार तरीके से 10 विकेट से जीत हासिल की।
इसके कुछ ही महीनों बाद, 11 जून 2009 को उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ अपना पहला टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच भी खेला।
खास बात यह रही कि उनके दोनों डेब्यू आईसीसी टूर्नामेंट के दौरान हुए, जिससे उन्हें अपने करियर की शुरुआत में ही बड़े मंच और दबाव भरे मुकाबलों का अनुभव मिला।
हालांकि, उनका शुरुआती सफर बिल्कुल आसान नहीं था। अपने पहले विश्व कप में वह तीन पारियों में सिर्फ 42 रन ही बना सकीं, जिसके बाद उनके प्रदर्शन को लेकर चयनकर्ताओं के बीच सवाल उठने लगे।
इस दौरान उन्हें मैदान के बाहर भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। साल 2011 में, जब वह दो साल से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल रही थीं, तब भी उन्हें पंजाब पुलिस की नौकरी के लिए अस्वीकृति झेलनी पड़ी।
यह उस समय महिला क्रिकेटरों की आर्थिक अस्थिरता और संघर्ष को साफ दिखाता है, लेकिन इन मुश्किलों ने उन्हें कमजोर नहीं किया, बल्कि और मजबूत बनाया।
उन्होंने हार मानने के बजाय अपनी तकनीक को सुधारने पर ध्यान दिया और कोचों के साथ लगातार मेहनत करती रहीं।
उनकी इस मेहनत का परिणाम 2010 में इंग्लैंड के खिलाफ उनके पहले वनडे अर्धशतक के रूप में सामने आया।
इसके बाद धीरे-धीरे, हर पारी के साथ उनका आत्मविश्वास बढ़ता गया और उन्होंने खुद को एक भरोसेमंद खिलाड़ी के रूप में साबित किया, जिससे उनके मजबूत और सफल करियर की नींव तैयार हुई।
2017 विश्व कप की ऐतिहासिक पारी
2017 महिला विश्व कप में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेला गया सेमीफाइनल मैच हरमनप्रीत कौर के करियर का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ। यह वही पारी थी जिसने उन्हें सिर्फ एक खिलाड़ी से एक पहचान बना दिया।
भारत 2005 के बाद पहली बार फाइनल में पहुंचने के करीब था, लेकिन सामने छह बार की चैंपियन ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम खड़ी थी।
डर्बी के उस अहम मुकाबले में भारत की शुरुआत खराब रही और टीम 35 रन पर 2 विकेट खोकर दबाव में आ गई थी।
ऐसे मुश्किल समय में हरमनप्रीत ने संभलकर खेलने के बजाय आक्रामक अंदाज अपनाया। उनकी बल्लेबाजी में आत्मविश्वास और निडरता साफ दिख रही थी।
उन्होंने अपना पहला अर्धशतक 64 गेंदों में पूरा किया, लेकिन इसके बाद उन्होंने खेल की रफ्तार पूरी तरह बदल दी।
अगला अर्धशतक उन्होंने सिर्फ 26 गेंदों में बना डाला। कंधे में दर्द होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी पारी के आखिरी 71 रन केवल 25 गेंदों में बना दिए।
हरमनप्रीत ने 115 गेंदों पर नाबाद 171 रन की शानदार पारी खेली, जिसमें कई चौके और छक्के शामिल थे।
उनकी इस पारी की बदौलत भारत ने 4 विकेट खोकर 281 रन बनाए और ऑस्ट्रेलिया को टूर्नामेंट से बाहर कर दिया।
यह महिला विश्व कप के नॉकआउट मुकाबले में किसी भी भारतीय खिलाड़ी का सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर भी बना। यह पारी सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं थी,
बल्कि इसने भारत में महिला क्रिकेट की तस्वीर ही बदल दी।
इस मैच के बाद महिला क्रिकेट को देखने वाले दर्शकों की संख्या तेजी से बढ़ी, स्पॉन्सर्स का ध्यान इस खेल की ओर गया और महिला क्रिकेट को एक नई पहचान मिली।
बाद में महिला प्रीमियर लीग जैसे बड़े टूर्नामेंट के बनने की नींव भी कहीं न कहीं इसी ऐतिहासिक पारी से जुड़ी हुई मानी जाती है।
डब्ल्यूपीएल में शानदार सफर
जब 2023 में महिला प्रीमियर लीग (WPL) की शुरुआत हुई, तो हरमनप्रीत कौर इस लीग का सबसे बड़ा चेहरा बनकर सामने आईं।
मुंबई इंडियंस ने उन्हें नीलामी में ₹1.8 करोड़ में अपनी टीम में शामिल किया और कप्तानी सौंपी। हरमनप्रीत ने टीम के भरोसे पर खरा उतरते हुए पहले ही सीजन में मुंबई इंडियंस को चैंपियन बना दिया।
उस सीजन में उन्होंने 281 रन बनाए और टीम की दूसरी सबसे ज्यादा रन बनाने वाली खिलाड़ी रहीं। 2024 के सीजन में भी उनका प्रदर्शन शानदार रहा।
उन्होंने गुजरात जायंट्स के खिलाफ 48 गेंदों में 95 रन की बेहतरीन पारी खेली, जो उनके डब्ल्यूपीएल करियर का सर्वश्रेष्ठ व्यक्तिगत स्कोर रहा।
हालांकि, इस बार मुंबई इंडियंस सेमीफाइनल में पहुंचकर बाहर हो गई।2025 में हरमनप्रीत ने एक बार फिर अपनी कप्तानी और बल्लेबाजी का दम दिखाया।
फाइनल मैच में उन्होंने 44 गेंदों पर 66 रन की शानदार पारी खेली और प्लेयर ऑफ द मैच बनीं। उनकी इस ‘क्लच’ पारी की बदौलत मुंबई इंडियंस ने अपना दूसरा खिताब जीता।
2026 का सीजन उनके लिए अब तक का सबसे बेहतरीन साबित हुआ। उन्होंने 8 मैचों में 150.66 के शानदार स्ट्राइक रेट से 342 रन बनाए और ऑरेंज कैप अपने नाम की।
इसी के साथ वह डब्ल्यूपीएल इतिहास में 1000 रन पूरे करने वाली दूसरी बल्लेबाज भी बनीं।
आज हरमनप्रीत कौर डब्ल्यूपीएल में सबसे ज्यादा रन बनाने वाली भारतीय खिलाड़ी हैं। उन्होंने जनवरी 2026 में शेफाली वर्मा को पीछे छोड़कर यह उपलब्धि हासिल की।
एक कप्तान के तौर पर भी उनका रिकॉर्ड बेहद शानदार है पहले तीन सीजन में दो खिताब जीतकर उन्होंने लीग के इतिहास में अपनी अलग पहचान बना ली है।
कप्तानी और नेतृत्व का सफर
हरमनप्रीत कौर ने अपने नेतृत्व की शुरुआत साल 2016 में की, जब उन्हें भारतीय महिला टी20 टीम की कप्तान बनाया गया।
उस समय यह फैसला इसलिए भी अहम था ताकि मिताली राज अपनी वनडे बल्लेबाजी पर ज्यादा ध्यान दे सकें।
यहीं से हरमनप्रीत ने धीरे-धीरे अपनी कप्तानी की पहचान बनानी शुरू कर दी। साल 2022 में मिताली राज के संन्यास के बाद हरमनप्रीत कौर को भारत की तीनों फॉर्मेट की कप्तानी सौंपी गई।
यह उनके करियर का एक बड़ा मोड़ था, जहां उन्हें सिर्फ टीम को संभालना ही नहीं बल्कि महिला क्रिकेट में एक नए दौर की शुरुआत की जिम्मेदारी भी निभानी थी।
उनकी कप्तानी की सबसे खास बात उनकी निडर सोच और खिलाड़ियों के प्रति भरोसा है। वह अपनी टीम पर दबाव बनाने के बजाय उन्हें खुलकर खेलने का मौका देती हैं।
मैदान पर उनके फैसले अक्सर साहसी और समझदारी भरे होते हैं।
2025 विश्व कप फाइनल में उनका एक अहम गेंदबाजी बदलाव मैच का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ, जिसने भारत को जीत दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई।
2025 आईसीसी महिला वनडे विश्व कप उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि बनकर सामने आया।
इससे पहले 2017 विश्व कप, 2020 टी20 विश्व कप और 2022 राष्ट्रमंडल खेलों के फाइनल में भारत को हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन हरमनप्रीत ने हार से सीख ली।
आखिरकार उनकी कप्तानी में भारत ने दक्षिण अफ्रीका को 52 रनों से हराकर अपना पहला सीनियर महिला विश्व कप खिताब जीता।
इस टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उनकी 89 रनों की शानदार पारी भी बेहद अहम रही, जिसने भारत को 339 रनों के बड़े लक्ष्य का सफल पीछा करने में मदद की।
यह महिला वनडे इतिहास का सबसे बड़ा सफल रन चेज माना जाता है। साल 2026 की शुरुआत तक हरमनप्रीत कौर टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे सफल कप्तान भी बन गईं।
उन्होंने 130 मैचों में 77 जीत हासिल कर ऑस्ट्रेलिया की मेग लैनिंग को पीछे छोड़ दिया और अपने नेतृत्व का एक नया मुकाम स्थापित किया।
रिकॉर्ड और प्रमुख उपलब्धियां
- विश्व क्रिकेट में सबसे ज्यादा टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाली खिलाड़ी (190 मैच और जारी), चाहे पुरुष हों या महिला।
- टी20 अंतरराष्ट्रीय में शतक लगाने वाली पहली भारतीय महिला (न्यूजीलैंड के खिलाफ 103*, 2018)।
- महिला विश्व कप के नॉकआउट मैच में किसी भारतीय द्वारा सबसे बड़ा स्कोर (171*)।
- महिला वनडे विश्व कप के नॉकआउट मैचों में सबसे ज्यादा रन (331 रन), बेलिंडा क्लार्क का रिकॉर्ड तोड़ा।
- अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा मैच खेलने वाली महिला क्रिकेटर (357 मैच), सूजी बेट्स को पीछे छोड़ा।
- घरेलू धरती पर सीनियर ICC विश्व कप जीतने वाली पहली भारतीय कप्तान (2025)।
करियर के आंकड़े (फरवरी 2026 तक)
प्रारूप मैच रन बल्लेबाजी औसत 100 / 50 विकेट
टेस्ट 6 200 25.00 0 / 1 12
वनडे 163 4,516 37.31 7 / 24 31
टी20 190 3,822 29.40 1 / 15 32
यह आंकड़े सिर्फ नंबर नहीं हैं, बल्कि उस निरंतर मेहनत, संघर्ष और जुनून की कहानी बताते हैं, जिसने हरमनप्रीत कौर को महिला क्रिकेट की सबसे प्रभावशाली खिलाड़ियों में से एक बना दिया।
हरमनप्रीत कौर की कुल संपत्ति और ब्रांड एंडोर्समेंट
भारत की 2025 विश्व कप जीत के बाद हरमनप्रीत कौर की कमाई और ब्रांड वैल्यू में बड़ा उछाल देखने को मिला। 2026 की शुरुआत तक उनकी अनुमानित कुल संपत्ति करीब ₹25 करोड़ से ₹60 करोड़ (लगभग 3 से 7 मिलियन डॉलर) के बीच मानी जाती है।
उनकी आय के कई स्रोत हैं। इसमें बीसीसीआई का ग्रेड ए सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट शामिल है, जिससे उन्हें सालाना करीब 50 लाख रुपये मिलते हैं। इसके अलावा, समान वेतन नीति के तहत उन्हें मैच फीस भी मिलती है।
महिला प्रीमियर लीग (WPL) 2026 के लिए मुंबई इंडियंस के साथ उनका 2.5 करोड़ रुपये का रिटेंशन डील भी उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा है। साथ ही, भारत की विश्व कप जीत के बाद उन्हें बोनस राशि का भी अहम हिस्सा मिला।
ब्रांड एंडोर्समेंट की बात करें तो विश्व कप के बाद उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। पंजाब नेशनल बैंक, प्यूमा, सीएट और एशियन पेंट्स जैसे बड़े ब्रांड्स के साथ जुड़ने से उनकी ब्रांड वैल्यू और मजबूत हुई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह एक दिन के विज्ञापन शूट के लिए लगभग 10 से 12 लाख रुपये तक चार्ज करती हैं। यह सब दिखाता है कि हरमनप्रीत कौर सिर्फ मैदान पर ही नहीं, बल्कि मैदान के बाहर भी एक मजबूत और सफल पहचान बना चुकी हैं।
पुरस्कार और मान्यता
- अर्जुन पुरस्कार (2017) – 2017 विश्व कप में शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें यह सम्मान मिला, जो खेल में उनकी बेहतरीन उपलब्धियों को दर्शाता है।
- विस्डेन क्रिकेटर ऑफ द ईयर (2023) – वह यह प्रतिष्ठित सम्मान पाने वाली पहली भारतीय महिला बनीं, जो क्रिकेट जगत में उनकी खास पहचान को दिखाता है।
- टाइम 100 नेक्स्ट (2023) – उन्हें दुनिया के उन उभरते नेताओं में शामिल किया गया, जो भविष्य को नई दिशा दे रहे हैं।
- पद्म श्री (2026) – भारत की विश्व कप जीत के बाद उनके योगदान को सम्मानित करते हुए उन्हें देश का चौथा सबसे बड़ा नागरिक पुरस्कार दिया गया।
कम ज्ञात तथ्य
- नंबर 17 का खास कनेक्शन: वह जर्सी नंबर 17 पहनती हैं। उनका जन्म 8 मार्च (8+9 = 17) को हुआ और उनकी ऐतिहासिक 171* की पारी भी उनके करियर के 17वें साल के आसपास आई यह संयोग फैंस को काफी दिलचस्प लगता है।
फुटबॉल से शुरुआत: क्रिकेट से पहले वह एक बेहतरीन फुटबॉल स्ट्राइकर थीं। अपनी फिटनेस, ताकत और स्टैमिना का श्रेय वह अपने शुरुआती फुटबॉल ट्रेनिंग को देती हैं।
- वीरेंद्र सहवाग का कॉल: 171* की ऐतिहासिक पारी के बाद उनके आइडल वीरेंदर सहवाग ने उन्हें खुद फोन करके बधाई दी। हरमनप्रीत ने बाद में बताया कि वह उस समय इतनी खुश थीं कि ठीक से बात भी नहीं कर पाईं।
गाड़ियों का शौक: उनके पास एक कस्टमाइज्ड विंटेज जीप और Harley-Davidson बाइक है, जिसे वह मोगा में घूमने के लिए इस्तेमाल करती हैं।
- टीम की ‘शेफ’: विदेशी दौरों पर टीम के साथी उन्हें मजाक में “टीम की रसोइया” कहते हैं। उनकी पंजाबी कढ़ी और खुद बनाई हुई मसाला चाय काफी मशहूर है।
निकनेम ‘हैरी’: ज्ञान ज्योति अकादमी में उनके दोस्तों ने उनका नाम छोटा करके “हैरी” रख दिया था, क्योंकि मैच के दौरान “हरमनप्रीत” नाम पुकारना लंबा लगता था।
एक ऐसी विरासत जिसने भारतीय महिला क्रिकेट को बदल दिया
हरमनप्रीत कौर ने भारतीय महिला क्रिकेट को पूरी तरह बदल दिया है। उनके आने से पहले और बाद का फर्क साफ दिखाई देता है। 2017 से पहले, महिला क्रिकेट को ज्यादा पहचान नहीं मिलती थी।
खिलाड़ियों को कॉन्ट्रैक्ट और बड़े स्पॉन्सर पाने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता था, लेकिन विश्व कप सेमीफाइनल में उनकी 171* रनों की शानदार पारी के बाद लोगों का नजरिया बदल गया और महिला क्रिकेट को गंभीरता से लिया जाने लगा।
2025 विश्व कप जीत के बाद यह बदलाव और भी मजबूत हो गया। अब महिला क्रिकेट को सम्मान, पैसा और मौके तीनों मिलने लगे हैं। आज उनकी मेहनत का असर हर जगह दिखता है।
WPL जैसी लीग शुरू हुई, खिलाड़ियों को प्रोफेशनल कॉन्ट्रैक्ट मिलने लगे, और हजारों लड़कियां क्रिकेट खेलने के लिए प्रेरित हुईं। टी20 में शतक लगाने वाली पहली भारतीय महिला और विश्व कप जीतने वाली पहली भारतीय कप्तान बनकर उन्होंने नए रास्ते खोल दिए हैं।
लेखिका – नमिता देवड़ा
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