Gaza: दो महीने तक चले युद्धविराम को तोड़ते हुए इजराइल ने एक बार फिर गाजा पट्टी पर हमला शुरू कर दिया है। इस हमले में अब तक 60 से अधिक फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर इसकी कड़ी आलोचना हो रही है। इसके साथ ही इजराइल सरकार ने गाजा से फिलिस्तीनियों को बेदखल करने के लिए एक विशेष एजेंसी स्थापित करने की घोषणा की, जिससे अरब देशों में आक्रोश बढ़ गया है।
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Gaza: अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन
इजराइली कार्रवाई के खिलाफ मुस्लिम वर्ल्ड लीग (MWL) ने एक बयान जारी कर इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का गंभीर उल्लंघन बताया है। MWL ने इजराइल के गाजा से जबरन विस्थापन के फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए इसे अमानवीय कदम करार दिया। MWL ने वेस्ट बैंक में 13 अवैध बस्तियों को अलग करने के इजराइली फैसले की भी निंदा की और कहा कि इस तरह की नीतियां शांति प्रयासों को कमजोर कर रही हैं।
शांति की जा रही भंग
MWL ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर महासचिव शेख डॉ. मोहम्मद बिन अब्दुलकरीम अल-इस्सा का बयान शेयर किया है। इसमें उन्होंने कहा कि इजराइल की ये कार्रवाइया अंतरराष्ट्रीय और मानवीय कानूनों का बर्बर उल्लंघन हैं। जबरन विस्थापन और हिंसक हमले न्यायसंगत और स्थायी शांति की संभावनाओं को कमजोर कर रहे हैं, जिससे वैश्विक स्थिरता भी खतरे में पड़ सकती है।
युद्धविराम के टूटने पर गहरी चिंता
गाजा में बढ़ते हमलों के बीच अरब-इस्लामिक मंत्रिस्तरीय समिति ने इजराइल पर दबाव बनाने की योजना बनाई है। हाल ही में काहिरा में यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कलस के साथ बैठक में इस समिति ने युद्धविराम के टूटने पर गहरी चिंता व्यक्त की और इजराइली हमलों की आलोचना की।
इस्लामिक देश इजराइल पर बना रहे दबाव
मुस्लिम वर्ल्ड लीग (MWL) एक अंतरराष्ट्रीय इस्लामिक संगठन है, जिसकी स्थापना 1962 में सऊदी अरब के मक्का में हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य मुस्लिम देशों और समुदायों के बीच सहयोग बढ़ाना है। इस्लामिक मूल्यों को बढ़ावा देना और मुस्लिम अधिकारों की रक्षा करना है। यह संगठन दुनियाभर के इस्लामिक देशों से मिलकर बना है और वैश्विक शांति व स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
गाजा पर इजराइली हमले और फिलिस्तीनियों के विस्थापन की योजना को लेकर वैश्विक स्तर पर आलोचना बढ़ रही है। मुस्लिम वर्ल्ड लीग और अरब-इस्लामिक देश इजराइल पर कूटनीतिक दबाव बनाने की तैयारी कर रहे हैं। अब देखना होगा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस संकट को सुलझाने के लिए क्या कदम उठाता है।
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