फलाहारी बाबा ने सीएम योगी से की मांग: होली के त्योहार से पहले मथुरा से एक पत्र ने सियासी और सामाजिक हलकों में बहस छेड़ दी है।
कृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास केस से जुड़े अध्यक्ष दिनेश फलाहारी ने योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर होली पार खास तरीके की मांग की है।
होली के आयोजनों के दौरान मुसलमानों की एंट्री पर रोक लगाई जाए।
यह पत्र सामने आने के बाद सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय स्तर तक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
त्योहार को नुकसान पहुंचाने की कोशिश
पत्र में दावा किया गया है कि कुछ लोग त्योहार के दौरान दुकानों पर रंग बेचते हुए कार्यक्रमों में शामिल होते हैं और त्योहार को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर सकते हैं।
साथ ही आरोप लगाया गया कि पहचान छिपाकर रंगों की बिक्री की जाती है और इससे त्योहार की पवित्रता प्रभावित हो सकती है।
हालांकि इन आरोपों के समर्थन में कोई आधिकारिक प्रमाण सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं।
पहचान छिपाकर मजहबी बेचते है रंग
पत्र लिखने वाले पक्ष ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि जो लोग नाम या पहचान छिपाकर रंग बेचते हैं, उनके खिलाफ सख्त जांच और कार्रवाई की जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि अन्य धर्मों के धार्मिक आयोजनों में हिंदू समुदाय के लोग शामिल नहीं होते, इसलिए उनके त्योहारों में भी बाहरी हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए।
इस मांग को लेकर प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
वृंदावन और बरसाना की होली विश्वभर में प्रसिद्ध
उत्तर प्रदेश के इस क्षेत्र को धार्मिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है। खासतौर पर वृंदावन और बरसाना की होली विश्वभर में प्रसिद्ध है, जहां हर साल लाखों श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं।
ऐसे में त्योहार के समय प्रशासन आमतौर पर सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतता है।
धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मुद्दा
इस पत्र के सामने आने के बाद अलग-अलग वर्गों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखी जा रही हैं।
कुछ लोग इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मुद्दा बता रहे हैं, जबकि कई सामाजिक विश्लेषकों का कहना है कि त्योहारों के समय इस तरह के बयान माहौल को संवेदनशील बना सकते हैं,
इसलिए प्रशासन और समाज दोनों को संयम बरतना चाहिए।
उनका मानना है कि त्योहार परंपरागत रूप से मेल-मिलाप और सद्भाव का प्रतीक रहे हैं, इसलिए किसी भी प्रकार के आरोप या मांग की जांच तथ्यों के आधार पर ही होनी चाहिए।
फिलहाल इस मामले में सरकार या प्रशासन की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
माना जा रहा है कि यदि शिकायत आधिकारिक रूप से दर्ज होती है तो संबंधित एजेंसियां तथ्यों की जांच कर सकती हैं।
वहीं स्थानीय प्रशासन का ध्यान हर साल की तरह इस बार भी त्योहार को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने पर रहेगा, ताकि श्रद्धालु बिना किसी तनाव के उत्सव में शामिल हो सकें।

