लहरों के नीचे राष्ट्र का मान: भारतीय नौसेना की पनडुब्बी INS वाघशीर में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की यात्रा केवल एक औपचारिक सैन्य कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि यह भारत की समुद्री शक्ति, स्वदेशी रक्षा क्षमता और रणनीतिक आत्मनिर्भरता का सशक्त प्रतीक बनकर उभरी है।
इससे पहले वर्ष 2006 में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने पनडुब्बी में यात्रा कर इतिहास रचा था।
राष्ट्रपति मुर्मू की यह यात्रा उसी प्रेरक परंपरा को आगे बढ़ाती है और बदलते समय में भारत के बढ़ते आत्मविश्वास को दर्शाती है।
INS वाघशीर: समुद्र के नीचे भारत का अदृश्य प्रहरी
लहरों के नीचे राष्ट्र का मान: INS वाघशीर भारतीय नौसेना की कलवरी श्रेणी की अत्याधुनिक डीज़ल-इलेक्ट्रिक अटैक सबमरीन है।
यह उन चुनिंदा युद्धपोतों में शामिल है जो दुश्मन की निगरानी, समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और आवश्यकता पड़ने पर निर्णायक प्रहार करने में सक्षम हैं।
‘वाघशीर’ नाम एक ऐसे शिकारी जीव से प्रेरित है जो चुपचाप, सटीकता और घातक शक्ति के साथ हमला करता है ठीक उसी तरह जैसे यह पनडुब्बी समुद्र की गहराइयों में कार्य करती है।
राष्ट्रपति की यात्रा क्यों है ऐतिहासिक?
लहरों के नीचे राष्ट्र का मान: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का किसी सक्रिय पनडुब्बी में जाना अपने आप में अत्यंत दुर्लभ और प्रतीकात्मक घटना है।
यह यात्रा भारतीय नौसेना के जवानों का मनोबल बढ़ाती है, और यह संदेश देती है कि देश का सर्वोच्च संवैधानिक पद रक्षा बलों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है।
भारत की समुद्री रणनीति में पनडुब्बी बेड़े की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करती है। यह केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि राष्ट्र और उसकी सेनाओं के बीच विश्वास और सम्मान का सार्वजनिक प्रदर्शन है।
डॉ. कलाम से राष्ट्रपति मुर्मू तक: एक प्रेरक परंपरा
लहरों के नीचे राष्ट्र का मान: डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम एक महान वैज्ञानिक होने के साथ-साथ रक्षा तकनीक के गहरे जानकार थे।
उनकी पनडुब्बी यात्रा को उस समय वैज्ञानिक सोच और सैन्य आत्मविश्वास के संगम के रूप में देखा गया था।
राष्ट्रपति मुर्मू की यात्रा उसी विरासत को आगे बढ़ाती है और यह दर्शाती है कि भारत का नेतृत्व, उसकी सेनाएँ और उसकी रक्षा तकनीक एक साझा राष्ट्रीय लक्ष्य के लिए एकजुट हैं।
13 फरवरी 2006 को डॉ. कलाम ने INS सिंधुराज से जो इतिहास शुरू किया था, उसे 19 साल बाद 28 दिसंबर 2025 को राष्ट्रपति मुर्मू ने INS वाघशीर के साथ शिखर तक पहुँचा दिया।
INS वाघशीर को क्या बनाता है विशेष?
लहरों के नीचे राष्ट्र का मान: INS वाघशीर कई अत्याधुनिक क्षमताओं से लैस है इसमें अत्यंत कम शोर में संचालन की क्षमता, आधुनिक सोनार और सेंसर प्रणालियाँ, लंबी दूरी तक गुप्त निगरानी, टॉरपीडो और मिसाइल प्रक्षेपण की क्षमता है।
यह पनडुब्बी समुद्र की गहराइयों में रहते हुए भी दुश्मन पर निरंतर निगरानी रखने और आवश्यकता पड़ने पर अचानक हमला करने में सक्षम है।
‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर रक्षा की मिसाल
लहरों के नीचे राष्ट्र का मान: INS वाघशीर का निर्माण भारत में हुआ है, जहाँ स्वदेशी तकनीक और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का संतुलित उपयोग किया गया है।
यह पनडुब्बी इस बात का प्रमाण है कि भारत अब केवल हथियार आयात करने वाला देश नहीं रहा, बल्कि अत्याधुनिक रक्षा प्लेटफॉर्म विकसित करने में भी सक्षम राष्ट्र बन चुका है।
समुद्री सुरक्षा के बदलते मायने
लहरों के नीचे राष्ट्र का मान: आज समुद्री सीमाएँ केवल व्यापार मार्ग नहीं रह गई हैं। वे ऊर्जा सुरक्षा, रणनीतिक संतुलन और राष्ट्रीय प्रभुत्व से सीधे जुड़ी हैं।
INS वाघशीर जैसी पनडुब्बियाँ भारत को हिंद महासागर क्षेत्र में निर्णायक रणनीतिक बढ़त प्रदान करती हैं और क्षेत्रीय स्थिरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
गहराइयों में छुपी भारत की शक्ति
लहरों के नीचे राष्ट्र का मान: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की INS वाघशीर यात्रा एक स्पष्ट संदेश देती है कि भारत अपनी समुद्री सुरक्षा को लेकर सजग, सक्षम और आत्मविश्वासी है।
डॉ. कलाम से लेकर आज तक, पनडुब्बियों में राष्ट्रपति की मौजूदगी यह दर्शाती है कि भारत की शक्ति केवल ज़मीन और आकाश तक सीमित नहीं, बल्कि समुद्र की गहराइयों में भी पूरी मजबूती से स्थापित है।

