‘डॉक्टर’ की आड़ में धर्मांतरण का धंधा: लखनऊ के प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में सामने आया मामला केवल एक डॉक्टर का नहीं बल्कि एक पूरे नेटवर्क का है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रेजिडेंट डॉक्टर रमीज़ मलिक और उसके पिता सलीमुद्दीन ने मिलकर हिंदू लड़कियों को प्रेमजाल में फंसाकर धर्मांतरण कराने का एक व्यवस्थित नेटवर्क चला रखा था।
पुलिस की जांच में खुलासा हुआ कि सलीमुद्दीन ने 35 साल पहले अपनी पहली पत्नी के होते हुए भी प्रेमजाल में फंसाकर पंजाबी लड़की से दूसरा निकाह किया था,
जिसका बाद में धर्म परिवर्तन करवाकर खतीजा नाम रखा गया। यही माहौल रमीज़ के बचपन और मानसिकता पर असर डाल रहा था।
महिलाओं पर शोषण के साथ धर्मांतरण का दबाव
केजीएमयू की दो महिला रेजिडेंट डॉक्टरों के यौन शोषण और धर्मांतरण के मामले में रमीज़ मलिक मुख्य आरोपी है।
आरोपी ने प्रेमजाल और शादी का झांसा देकर महिलाओं को फंसाया, धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डाला और गर्भपात कराने तक के आरोप हैं।
पुलिस को शक है कि रमीज़ के माता-पिता और काजी जाहिद हसन ने भी इसमें भूमिका निभाई।
दोनों महिलाओं ने मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज कराए, जिससे स्पष्ट हुआ कि यह केवल व्यक्तिगत मामला नहीं बल्कि बड़े पैमाने पर चल रहा जाल था।
पिता-पुत्र की साज़िश में काजी गिरोह भी शामिल
‘डॉक्टर’ की आड़ में धर्मांतरण का धंधा: रमीज़, उसके पिता सलीमुद्दीन और काजी जाहिद हसन मिलकर हिंदू लड़कियों को निशाना बनाने की योजना बनाते थे।
रमीज़ अपने पिता और काजी के मार्गदर्शन में महिलाओं को इलाज, रुपये या भावनात्मक मदद का झांसा देकर फंसाता था।
सलीमुद्दीन का खटीमा में होम्योपैथिक क्लीनिक था, जहां वह महिलाओं के संपर्क में आता और उनके विश्वास को अपने पक्ष में करने की कोशिश करता।
इस पूरे नेटवर्क में धार्मिक कट्टरता और नफरत की भी भूमिका थी, जिससे यह मामला और गंभीर बन गया।
बैंक जांच में मिले चौंकाने वाले सुराग
पुलिस ने रमीज़ और उसके पिता के मोबाइल और बैंक खातों की पड़ताल शुरू की। खातों से हुए लेन-देन और विदेशों से फंडिंग के शक पर जांच चल रही है।
साथ ही रमीज़ के सोशल मीडिया अकाउंट और कॉल डिटेल्स की भी जांच की जा रही है।
प्रारंभिक जांच से पता चला कि वह अमेरिकी गांजे का सेवन करता था और इसे ऑनलाइन मंगाता था। यह सब उसके नेटवर्क और गिरोह के संचालन का हिस्सा माना जा रहा है।
मुख़्य आरोपी फ़रार लेकिन माता-पिता गिरफ़्तार
‘डॉक्टर’ की आड़ में धर्मांतरण का धंधा: पीलीभीत पुलिस ने रमीज़ के माता-पिता, सलीमुद्दीन और खतीजा को गिरफ्तार किया।
यह गिरफ्तारी महिला डॉक्टरों के मजिस्ट्रेट बयान के आधार पर हुई।
जांच में यह सामने आया कि माता-पिता ने भी धर्मांतरण और निकाह कराने में सक्रिय भूमिका निभाई थी। रमीज़ की पत्नी और अन्य महिला डॉक्टरों के बयान से स्पष्ट हुआ कि यह नेटवर्क वर्षों से चलता आ रहा था।
फरार चल रहे रमीज़ मलिक के लिए पुलिस ने 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। आरोपी को पकड़ने के लिए पुलिस उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में छापेमारी कर रही है।
पुलिस के अनुसार, रमीज़ को अंदरूनी मदद मिल रही थी, इसलिए वह कार्रवाई के पहले ही फरार हो गया। जांच में संदिग्धों और मददगारों की भूमिका भी सामने आई है।
सिस्टम की चूक बनी सामाजिक चुनौती
केजीएमयू और पुलिस की यह जांच केवल एक अपराध के तौर पर नहीं बल्कि सिस्टम की चूक और सामाजिक जागरूकता की चुनौती के रूप में देखी जा रही है।
आरोपी का नेटवर्क, कट्टरपंथ और महिलाओं पर शोषण का जाल यह दिखाता है कि इस तरह के मामलों में सतर्कता और समय पर कार्रवाई कितनी अहम है।
सामाजिक और कानूनी न्याय के बीच की लड़ाई अब भी जारी है।
केजीएमयू का यह मामला केवल व्यक्तिगत अपराध नहीं है, बल्कि एक बड़े नेटवर्क, धार्मिक कट्टरता और सिस्टम की चूक का दिखावा है।
फरार डॉक्टर रमीज़ और उसके सहयोगियों की गिरफ्तारी, बैंक और साइबर जांच, और महिला डॉक्टरों के मजिस्ट्रेट बयान इस पूरे नेटवर्क के सच को उजागर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
समाज और कानून दोनों के लिए यह चेतावनी है कि शोषण और धर्मांतरण के मामलों में समय पर कार्रवाई ही न्याय सुनिश्चित कर सकती है।

